BBC में रेहान फजल का लिखा एक आर्टिकल पढा
नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने पहली शादी एक मुस्लिम से बाकायदा इस्ल���म कबूल करके किया था । इलाहाबाद की एक मस्जिद में इलाहाबाद के शहर काजी ने उन्हें कलम पड़वा कर इस्लाम कबुल करवाया था
फिर दो महीने के बाद मोतीलाल नेहरू के कहने पर महात्मा गांधी के दबाव में विजयलक्ष्मी पंडित का तलाक करवाया गया और उनकी निकाह के सारे कागजात खुद नेहरू ने जला दिए
वैसे एक और बात बता दूं विजय लक्ष्मी पंडित और कृष्णा नेहरू दोनों ने ना तो स्कूल का मुंह देखा ना कॉलेज का मुंह दिखा दोनों को घर पर ही एक टीचर जाकर पढ़ाता था
लेकिन नेहरू ने अपनी अनपढ़ बहन विजयलक्ष्मी को स्विट्जरलैंड का राजदूत रूस का राजदूत अमेरिका में राजदूत और यूनाइटेड नेशन में भारत का राजदूत बना दिया था इतना ही नहीं वह 5 सालों तक उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी थी
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जब राहुल गांधी भारत के सुपर प्रधानमंत्री थे सरकार का ऑर्डिनेंस फाड़ने की हिम्मत रखते थे कांग्रेस का शासन था
तब एनडीटीवी पर शबाना आजमी ने जमा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी से सवाल पूछा कि आप महिलाओं के पहनावे पर फतवा क्यों दे रहे हैं ? महिलाएं जो चाहेगी वह पहन सकती हैं
तब इमाम बुखारी ने कहा था कि मैं तवायफो नाचने गाने वालीयो बाजारू महिलाओं के सवाल का जवाब नहीं देता
अफसोस उसे वक्त पितृसत्तात्मक व���यवस्था को खत्म करने वाली बरखा दत्त भी थी लेकिन इतनी घटिया जवाब के बाद भी वह मौलाना साहब मौलाना साहब कह रही थी
@INCIndia tumhara babu sona kabhi bhi PM nahi ban sakta ..........likh ke rakh lo ..aur suno next 3 term tak congress power me nhi aane wali .........
aur suno tab tak ye bolte bolte pagal ho jayega
आज राज्यसभा में नवनिर्वाचित सांसद “सी. सदानंदन मास्टर जी” ने बजट सत्र के दौरान ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया, जिसने पूरे सदन को झकझोर दिया।
उन्होंने अपने कृत्रिम (नक़ली) पैर सदन की मेज़ पर रखे और उस अमानवीय घटना का उल्लेख किया, जब वामपंथी हिंसा ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया।
सदानंदन मास्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवक थे।
वे कम्युनिस्ट-प्रभावित क्षेत्रों में संघ का कार्य कर रहे थे, गाँव-गाँव प्रवास कर हिंदुत्व की चेतना जगा रहे थे। यही बात कम्युनिस्टों को असह्य लगी।
एक दिन शाखा से लौटते समय, उन्हें रास्ते में घेर लिया गया।
ज़मीन पर पटककर कुल्हाड़ी से उनके दोनों पैर घुटनों तक काट दिए गए।
इतना ही नहीं… ताकि वे दोब���रा जुड़ न सकें… उन्हें घसीटते हुए जंगल में फेंक दिया गया।
यह कोई साधारण हिंसा नहीं थी, यह वैचारिक नफ़रत की पराकाष्ठा थी।
आप विश्वास नहीं करेंगे…
जब उनके पैर काट दिए गए और उन्हें लगभग 400 किलोमीटर दूर कोच्चि के अस्पताल ले जाया जा रहा था और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण लगभग सभी को विश्वास था कि वे जीवित नहीं बचेंगे।
जिसकी गोद में उनका सिर था—
वह संघ के जिला संपर्क प्रमुख था, आज प्रांत स्तर का दायित्व निभा रहे हैं ।
उसने देखा कि सदानंदन मास्टर कुछ बुदबुदा रहे हैं��� उसे लगा, शायद हमलावरों का नाम बता रहे हों। वह कान पास ले गए…
लेकिन वे ये पंक्तियाँ गुनगुना रहे थे
“क्या हुआ जो एक पत्ता टूटकर गिरा ज़मीन पर,
कल नई कोंपलें आएँगी, नव पर्णों से सजेगा वृक्ष।
एक सदानंद गिरा मातृभूमि पर,
दूसरा सदानंद आएगा
हिंदू राष्ट्र गौरव-वैभव नित आगे बढ़ता जाएगा।”
ईश्वर की कृपा से वे जीवित बचे।
पैर चले गए… लेकिन संकल्प नहीं।
उन्होंने कृत्रिम पैर लगाए और संघ कार्य पहले से अधिक दृढ़ता से जारी रखा।
आज, राज्यसभा में खड़े होकर,
उन्होंने पूरे देश और दुनिया को दिखा दिया कि
वामपंथी हिंसा कितनी कुरूप, कितनी नीच और कितनी सड़ांध से भरी हुई है।
यह भाषण नहीं था
यह जीवित सत्य का उद्घोष था।
इतिहास के पन्नो में से 16 दिसम्बर 1993 का दिन ढूँढ के देखो। जिसमें केसरी नाथ त्रिपाठी सहित 33 विधायक बुरी तरह घायल हो गए थे। इस घटना को विधानसभा के इतिहास में एक "काला ���िवस" के रूप में याद किया जाता है, जिसमें मर्यादा का उल्लंघन हुआ और हाथापाई हुई।
4 दिसंबर 1993 के दिन मुलायम यादव ने मुख्यमंत्री का प्रभार संभाला था और 16 तारीख़ के दिन बीजेपी के चुने हुए एमएलए को सदन में मार पीट कर भगाया था।
मुलायम सिंह के कहने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अपने साथ छुपा कर लोहे की रॉड सदन में लेकर आए थे क्योंकि मुख्यमंत्री मुलायम सिंह थे तो किसी की तलाशी नहीं ली गई थी
बीजेपी ने राम मंदिर के नाम पर बहुत दंश झेले हैं। वीडियो देखे और अखिलेश यादव को याद दिल���ए की गुंडो का समर्थन कम से कम सनातन संस्कृति और भगवान राम को मानने वाले नहीं करते।
ईश्वर-अल्लाह सब एक है ऐसा एक बुजुर्ग नें बताया था। (ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान ।)
मैने सोचा चलो इस बार तीर्थ यात्रा नही करते #मक्का#मदीना चलते है।
तीर्थ भी हो जायगा और घूम भी लेंगे।
मै रजिस्ट्रेशन करवाने गया।
मेरा नाम सुनकर ही विंडो वाला चौक गया।
बोला "भाई आप हज पर नही जा सकते!"
मैने पूछा, क्यों भाई ?
वो बोला "ऐलाउ नही है । "
मै बोला 'क्यों भाई ऐलाउ क्यों नही है?
#हिंदू हूँ और #ईश्वर #अल्लाह तो एक है और सबके है, वो बोला "ऐसा किसने कहा??"
मैने सीना चौड़ाकर कहा #सज्जन पुरुषों ने
वो बोला सूतिया है वो आदमी जो ऐसा बोला होगा और "आपका दिमाग खराब हो गया है क्या? घूमने के लिये इतनी जगह पड़ी है और आप वहाँ जाना चाहते है
जहाँ ऐलाउ नही है।
वहाँ केवल अल्लाह के बन्दे ही जा सकते है।
तब से मैं उन चेलों को ढूंढ रहा हूं??
जिन्होंने #हिंदुस्तान से इतना बड़ा झूठ बोला ।।
कहते हैं कि महाभारत के युद्ध में अयोध्या का धर्म ध्वज खो गया था।आज जब यह फिर से स्थापित हो गया हैं तब इसपे अंकित उस वृक्ष के बारे में और धर्म ध्वज के बारे में जान लेते हैं।
फिर जब राम मंदिर बन ही रहा था,तब नित्य नए खोज हो रहे थे,इसी दौरान तब ललित मिश्रा नाम के इंडोलाजिस्ट की नजर मेवाड़ राजघराने की एक पुरानी पेंटिंग पर पड़ी,जिसमें हूबहू रामायण के वर्णन में इस ध्वज को बनाया गया था,जिसमें एक सूर्य का चिन्ह,एक #कोविदार का पेड़ अंकित था।
फिर बाल्मीकि रामायण में एक श्लोक है
एष वै सुमहान् श्रीमान् विटपी सम्��्रकाशते |
विराजत्य् उद्गत स्कन्धः कोविदार ध्वजो रथे ||
वाल्मीकि रामायण के 84वें सर्ग में कोविदार वृक्ष के चिह्न को देखकर निषादराज गुह अयोध्या की सेना को पहचानते हैं। वहीं 96वें सर्ग के 18वें श्लोक में यह वर्णित है कि लक्ष्मण जी ने भी कोविदार वृक्ष के चिह्न को देखकर सेना को पहचाना था। इस चिह्न को देखने के बाद लक्ष्मण कहते हैं कि भरत को आने दीजिए।
ललित मिश्रा ने इस पेड़ की वनस्पति-शास्त्रीय पहचान सुनिश्चित करने के लिए, Banaras Hindu University के वनस्पतिशास्त्रियों Gyaneshwar Chaube और Abhishek Dwivedi की मदद ली साथ ही पुराणों में भी इसका वर्णन ढूंढा।
और चित्रमयी रामायण जो मेवाड़ राजघराने एक बहुमूल्य और स्वर्ण-चित्रित पांडुलिपि है, जिसे मेवाड़ के महाराणा जगत सिंह प्रथम (1628-52) ने बनवाया था। इसका निर्माण 1649 और 1653 के बीच हुआ था, जिसमें 400 से अधिक चित्र थे और इसका उद्देश्य श्रीराम के जीवन को चित्रित ��रना था, विशेष रूप से मेवाड़ की राज-सत्ता के साथ उनके संबंध को रेखांकित करना।क्योंकि मेवाड़ राजघराने का सीधा संबंध श्री राम के बेटे कुश से है।
आज यह आरिजनल पांडुलिपि ब्रिटिश संग्रहालय में है और उससे देख कर बनाए गए पेंटिंग राजघराने के दिवारों पर।
और ये जो कोविदार का वृक्ष है ये दुनिया का पहला हाइब्रिड प्लांट है जिसे कश्यप ऋषि ने मंदार और परिजात के मिश्रित संस्करण से बनाया था।
#GatewayChurch
जस गुरु तस चेला ! 🎭😝
ये अमेरिका के President Donald J. Trump के आध्यात्मिक गुरु "पास्टर- रॉबर्ट मॉरिस" हैं जिन्होंने वर्ष 2000 में विश्व प्रसिद्ध "गेटवे चर्च" की स��थापना की थी, जो दुनिया भर में अपने विशाल आकार, वैश्विक प्रभाव और धार्मिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है।
यह अमेरिका के टॉप 10 मेगा-चर्चों में शामिल है, जिसमें हर हफ्ते 25,000 से अधिक लोग उपासना के लिए जाते हैं और दुनियाभर के ईसाइयों पर इसका गहरा प्रभाव है।
#पास्टर रॉबर्ट मॉरिस ने अपनी आध्यात्मिक छवि को इतना चमकाया कि लोग उन्हें "भगवान का दूत" मानने लगे।
लेकिन जब उनकी असली तस्वीर सामने आई, तो प��ा चला कि यह दूत तो नाबालिग बच्चियों के साथ खेलने वाला शैतान था!
"अमेरिका का "जेम्स रॉबिसन इवांजेलिकल एसोसिएशन" दुनिया भर के #ईसाई समुदाय के लिए एक प्रमुख धार्मिक संस्था है, जो धार्मिक प्रचार, मिशन और कथित तौर पर मानवतावादी सेवाएँ देता है।
1982 में, जब रॉबर्ट मॉरिस सिर्फ 21 साल के थे,तब उन्हें इसी संस्था ने प्रशिक्षित कर "ट्रैवलिंग इवांजलिस्ट" की हैसियत से ईसाई धर्म प्रचार का जिम्मा दिया।
#ट्रैवलिंग इवांजलिस्ट" एक तरह के घुमंतू धर्म प्रचारक होते हैं, जो अक्सर चर्च या संस्था की ओर से प्रचार के लिये भेजे जाते हैं। उनकी यात्रा व धार्मिक कार्यक्रमों का इंतजाम भी संस्था के द्वारा किया जाता है।
धर्म प्रचारक को धार्मिक संस्थाएँ और एसोसिएशन धर्म प्रचार के लिए वेतन देते हैं,जिसमें यात्रा भत्ता, आवास भत्ता और अन्य लाभ श���मिल होते हैं।
अमेरिका में एक वरिष्ठ "ट्रैवलिंग इवांजलिस्ट" को सालाना $30,000 से लेकर $60,000 कमाई होती है, जबकि बड़े धार्मिक संस्थानों के वरिष्ठ धार्मिक नेताओं को $50,000 से अधिक वेतन मिलता है।
जिसका अर्थ यह है कि भारत में या कहीं भी ईसाई मिशनरियों के प्रचारक कोई मुफ्त में सेवा नहीं देते, वो चर्च के वेतनभोगी कर्मचारी होते हैं, बस चोंगा किसी प्रीस्ट या फादर का ओढ़ लेते हैं, जिसे कासकॉक (Cassock) कहा जाता है।
���ह लोग अक्सर अलग-अलग परिवारों या चर्चों के साथ रहते हैं और उनके विश्वास का फायदा उठाकर अपना काम करते हैं।
इस तरह 1982 में जब मॉरिस "ट्रैवलिंग इवांजलिस्ट" नियुक्त हुये तो वो विभिन्न परिवारों के साथ रहते हुए धार्मिक प्रचार करने लगे।
इसी उद्देश्य से वो अमेरिकी शहर #ओक्लाहोमा में "क्लेमिशायर" परिवार के साथ रहने लगे—मॉरिस ने अपने आध्यात्मिक पद का इस्तेमाल कर उनकी 12 साल की बच्ची "सिंडी क्लेमिशायर" और उसके परिवार का विश्वास जीता। उसके बाद उसने उस बच्ची का यौन शोषण शुरू कर दिया और यह खेल चार साल तक चला।
बच्ची ने अपने माता-पिता के साथ इसकी शिकायत की, लेकिन उनकी संस्था ने उन्हें कोई सजा नहीं बस एक लम्बे अवकाश पर भेज दिया। लौटने के बाद भी वो धर्म प्रचार में लगे रहे।
धीरे-धीरे उनकी पहचान बहुत बड़े धर्म गुरु की बन गयी। फिर जैसा कि होता है इस बढ़े हुये कद का लाभ उठा कर मॉरिस ने अनुयायियों से मिले भारीभरकम दान से विश्व प्रसिद्ध "गेटवे चर्च" की स्थापना किया।
और फिर वो इस तरह चमके कि दुनियाभर में उपदेश के लिये बुलाये जाने लगे।
जल्द ही "रॉबर्ट मॉरिस", डोनाल्ड ट्रंप के भ�� आध्यात्मिक गुरु और धार्मिक सलाहकार बन गए।
लेकिन 2024 में जब सिंडी क्लेमिशायर (1982 वाली बच्ची) ने फिर से आवाज उठाई, तो उन्हीं के चर्च ने उन्हें इस्तीफा देने को कहा। अदालत में उन्होंने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया और बीते वृहस्पतिवार उन्हें 10 साल की सजा मिली।
किन्तु उन्हें सिर्फ छह महीने ही जेल में बिताने हैं, बाकी समय पैरोल पर बाहर रहेंगे —जैसे यह कोई छुट्टी का टूर हो! किन्तु उन्हें "सेक्स-ऑफे���डर" के रूप में रजिस्टर किया जाएगा, और "सिंडी क्लेमिशायर" को 2.5 लाख डॉलर का मुआवजा भी देना होगा।
#वीडियो में "सिंडी क्लेमिशायर" और "रॉबर्ट मॉरिस" दोनों देखे जा सकते हैं।
कहना ना होगा कि "डोनाल्ड ट्रम्प" के ऊपर भी छोटी बच्चियों के यौन शोषण के आरोप हैं, वाबजूद इसके वो दूसरी बार भी अमेरिकी राष्ट्रपति बनने में सफ़ल हो गये।
मतलब जस गुरु तस चेला!
Manoj Kumar
राज कपूर को 1988 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह समारोह दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया था,(कुछ रिपोर्टों से पता चलता है कि समारोह सिरी फोर्ट में आयोजित किया गया था।)
इस समारोह में प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी आने वाले थे
राज कपूर अपने परिवार के सदस्यों के साथ थे। वह अस्थमा से पीड़ित थे, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ स्थिर थे। हालांकि उन्हें सुरक्षा कारणों से संबंधित प्रोटोकॉल के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ आने से मना कर दिया राज कपूर के परिवार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से अपील किया कि उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर साथ रखने की इजाजत दी जाए लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह बताया कि राजीव गांधी की सुरक्षा प्रोटोकॉल बहुत कड़ी है उन्हें लिट्टे तथा अन्य आतंकवादी संगठनों से खतरा है इसलिए वह प्रोटोकॉल में कोई ढील नहीं देंगे
समारोह में जब राष्ट्रपति वेंकटरमन अपना भाषण दे रहे थे त���ी दम फूलने और सांस घुटने से राज कपूर बेहोश होकर गिर गए
उन्हें एम्स में भर्ती किया गया डॉक्टरों का यह कहना था कि काफी देर तक उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं मिल पाई इसलिए उनके दिमाग में और उनके शरीर में जहरीले तत्व काफी बन चुके हैं
एम्स में 1 महीने तक जीवन और मौत से जूझते हुए अंततः महान अभिनेता राज कपूर ने प्राण त्याग दिया डॉक्टरों का स्पष्ट कहना था कि यदि उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर साथ रखने की अनुमति मिल जाती तब राज कपूर का निधन नहीं हुआ होता
सोचिए हमें ऐसी तमाम घटनाओं के बारे में कभी बताया ही नहीं गया
जब अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने कहा छोड़ो जाने ���ो मर्द तो मर्द ही होते हैं
सद्दाम हुसैन ने इराक को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्र बनाने का निर्णय लिया था। फ्रांस जैसे बड़े एवं शक्तिशाली राष्ट्र भी इराक की सहायता कर रहे थे क्योंकि इसके लिए उन्हें इराक से अत्यधिक धन की प्राप्ति हो रही थी।
इजरायल ने फ्रांस, इटली, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे शक्तियों से अपनी पीड़ा को व्यक्त किया। सबसे बताया कि इराक की नीयत परमाणु बम बनाने की है और यदि फ्रांस उस��े यहा�� परमाणु संयन्त्र बनाएगा तो उसका उपयोग शांति के लिए नहीं किया जाएगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रसिद्ध अभिनेता रोनाल्ड रीगन जो आगे चल कर वहाँ के राष्ट्रपति बने, वे भी इजरायल के चिंताओं को नहीं समझ सके। उन्होंने इजरायल को कहा कि इराक अपने परमाणु संयन्त्र को शांतिपूर्वक उद्देश्यों के लिए बना रहा है और ये उपयुक्त समय नहीं है जब उसके कार्यक्रम को रोका जाना चाहिए। अब इजरायल की चिंता बढ़ती जा ��ही थी। उसे आभास हुआ कि अपने मरे बिना स्वर्ग नहीं मिलता। इन परिस्थितियों में इजरायल को जिस राष्ट्र का समर्थन प्राप्त हुआ, वह था ईरान . . .
ईरान के नीतिनिर्माताओं को सद्दाम हुसैन से समस्या थी। ईरान कभी भी नहीं चाहता था कि इराक एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बन जाए। ईरान इस परमाणु कार्यक्रम के विरोध में इस सीमा तक था कि 1980 में ईरान ने अपने युद्धक विमान भेजकर इराक के परमाणु संयन्त्र पर बमबारी तक क��ा दिया था। रोचक बात ये है कि इनका निशाना तब भी चूक गया था
इजरायल को ईरान से चाहिए था इराक के परमाणु संयन्त्र की तस्वीरें, लेआउ�� व समस्त प्रासंगिक सूचनाएँ क्योंकि ईरान के विमानों का निशाना अवश्य चूक गया था किन्तु उन्होंने जासूसी कुशलतापूर्वक किया था। उन्होंने अपने सूत्रों के उपयोग से इराक के परमाणु संयन्त्र की अनेकों तस्वीरेंं, मानचित्र, सब प्राप्त कर लिया था। ईरान ये सारा कुछ उठाकर इजरायल को सौंप दिया
इजरायल के प्रधानमंत्री मेनाशेम ने मोसाद और इजरायल की वायुसेना के सर्वोच्च अधिकारियों से बात की कुछ अधिकारिय���ं ने तो स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा अभियान सम्भव नहीं है और इसके पीछे कई कारण थे। इजरायल को जॉर्डन और सऊदी जैसे राष्ट्रों की वायु सीमा का उल्लंघन करते हुए 1600 KM दूर जाकर इराक के परमाणु संयन्त्र को नष्ट करना था। ये कोई छोटी सी बात नहीं थी। वो भी तब जब इजरायल घिरा हुआ है अपने शत्रुओं से जो इजरायल को कच्चा चबा जाने तक की इच्छा रखते हैं पर कर कुछ नहीं पाते
अधिकारियों से सबकुछ समझ लेने के पश्चात इजराइल क��� कैबिनेट ने सहमति से सर्जिकल स्ट्राइक करने के पक्ष में निर्णय ले लिया। 8 F-16 लड़ाकू विमान तैयार किये गए और हर विमान को दो दो मार्क 84 बम से सुसज्जित किया गया। प्रत्येक बम का भार 2000 किलो था। ये सब करने के पश्चात 7 जून 1981 को इजरायली वायु सेना के रणबाँँकुरे बाज की भाँति चल पड़े अपने लक्ष्य की ओर। इस अभियान में रडार से बचने के लिए इन पायलटों को यह ध्यान रखना था कि उनके विमान 100 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर ना उड़े। इसके अतिरिक्त उन्हें जॉर्डन और सऊदी की वायु सेना का उल्लंघन करते हुए और बि��ा पकड़े गए अपने लक्ष्य तक जाना था और वापस आना था। इसमें विमान में ईंधन का भी ध्यान रखना था क्योंकि उन्हें इंधन भरने के लिए कोई भी सुविधा नहीं देता। जब वह जॉर्डन में गए और उनको एकाध स्थान पर 100 मीटर से ऊंचा उठना पड़ा तो जॉर्डन के रडार पर वे चिन्हित कर लिए गए। वहाँँ पर वे सऊदी लहजे में अरबी बोलने लग गए और ATR द्वारा पूछे जाने पर कहा कि वे सऊदी के विमान हैंं और भटक कर इधर आ गए हैं। यही उनके साथ सऊदी में भ�� हुआ।
वहाँ उन्होंने बोल दिया कि वे जॉर्डन के ��ैं और भटक करके इधर आ गए हैं
इराक की सीमा में पहुंचते ही इजरायल के F-16 विमानों ने अचानक से सीधा हो करके ऊँँचा उठना ऊँँचा उठना आरंभ किया और एक निश्चित ऊंचाई पर जाकर के हर विमान ने पांच-पांच सेकंड के अंतराल पर अपने सारे बम इराक के परमाणु संयंत्र पर गिरा दिया। इराक का परमाणु संयंत्र कुछ सेकंड में राख हो गया था। इराक के सुरक्षाबल उन पर गोलियाँँ दागने लग गए किंतु इजरायल के युद्धक विमान इतनी ऊंचाई पर ��ा चुके थे कि वहां तक गोलियां पहुंचना संभव नहीं रह गया था। इसके पश्चात पूरे रफ्तार के साथ वे जॉर्डन, सऊदी सब की सीमाओं का उल्लंघन करते हुए आराम से अपने यहां पहुंच गये। यह समाचार जंगल की आग की भांति पूरे विश्व में फैल गया। फ्रांस तो अत्यधिक कुपित हुआ। संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक भी बुलाई गई जहां पर इजराइल की कड़ी आलोचना की गई परंतु उसके पहले जब यह समाचार अमेरिका के राष्ट्रपति को प्राप्त हुआ। दो सेकंड सोचने के पश्चात उन्होंने मुस्करा कर कहा कि मर्द तो मर्द ही होते हैं
अगर आप कभी अमेरिका के शहर मैसाच्युसेट्स जाएंगे तब वहां के एक बड़े उपनगर शैलेम में एक म्यूजियम है जहां कई डरावने पुतले रखे गए हैं ।
और शैलम एक व्यक्ति गिल्स कोरी और उनकी पत्नी मार्था की कब्र है जिस पर पूरा शहर उसकी मौत के दिन फूल चढ़ाता है
16वी सदी में अमेरिका में भी भारत के झारखंड की तरह किसी को जादू टोना करने वाला या किसी को डायन या चुड़ैल बता कर बकायदा शहर के शेरिफ के आदेश से मार दिया जाता था
कई महिलाओं पुरुषों को शैतान बताकर या चुड़ैल बताकर मार दिया गया
फिर 1692 में एक किसान गिल्स कोरी और उनकी पत्नी मार्था को शैतान और ��ुड़ैल बताकर शेरिफ के सामने पेश किया गया और शेरिफ ने उन दंपत्ति को बेहद बेरहमी से मौत की सजा दी
दोनों को लिटा कर उनके ऊपर धीरे-धीरे पत्थर रखने के आदेश दिए और 2 दिन तड़पने के बाद दोनों दंपत्ति की मौत हो गई
लेकिन मरते समय गिल्स कोरी ने श्राप दिया की इस शहर का हर शरीफ बेमौत मरेगा।
फिर 1692 से लेकर 1978 तक मैसाचुसेट्स के इस बड़े उपनगर के हर शेरिफ बेमौत मरते गए किसी को ड्यूटी के दौरान अचानक हार्ट अटैक आ जाता था तो कोई एक्सीडेंट में मरता था तो कोई पानी में डूब कर मरा कोई आग लगने से जलकर मरा
अंत में इस शहर का शेरिफ कार्यालय बदल दिया गया कई पूजा पाठ की गई उसके बाद जाकर यह सब कुछ खत्म हुआ
जब कांग्रेस सत्ता में थी तो सरकार के दूसरे सबसे बड़े ताकतवर मंत्री ��पिल सिब्बल से जब महंगाई के बारे में सवाल पूछा जाता था
तब देखिए कांग्रेस सरकार का क्या जवाब होता था
काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।
यह सभी को नहीं मालूम है। खांटी बनारसी लोग या अगल बगल के लोग ही इस परम्परा को जानते हैं। बाहर से आये शवदाहक जन इस बात को नहीं जानते।
जीवन के शतपथ होते हैं। 100 शुभ कर्मों को करने वाला व्यक्ति मरने के बाद उसी के आधार पर अगला जीवन शुभ या अशुभ प्राप्त करता है। 94 कर्म मनुष्य के अधीन हैं। वह इन्हें करने में समर्थ है पर 6 कर्म का परिणाम ब्रह्मा जी के अधीन होता है।हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश- अपयश ये 6 कर्म विधि के नियंत्रण में होते हैं।
अतः आज चिता के साथ ही तुम्हारे 94 कर्म भस्म हो गये। आगे के 6 कर्म अब तुम्हारे लिए नया जीवन सृजित करेंगे।
अतः 100 - 6 = 94 लिखा जाता है।
गीता में भी प्रतिपादित है कि मृत्यु के बाद मन अपने साथ 5 ज्ञानेन्द्रियों को लेकर जाता है। यह संख्या 6 होती है। मन और पांच ज्ञान इन्द्रियाँ।
अगला जन्म किस देश में कहाँ और किन लोगों के बीच होगा यह प्रकृति के अतिरिक्त क��सी को ज्ञात नहीं होता है। अतः 94 कर्म भस्म हुए 6 साथ जा रहे हैं।
विदा यात्री। तुम्हारे 6 कर्म तुम्हारे साथ हैं।
आपके लिए इन 100 शुभ कर्मों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है जो जीवन को धर्म और सत्कर्म की ओर ले जाते हैं एवं यह सूची आपके जीवन को सत्कर्म करने की प्रेरणा देगी......
100 शुभ कर्मों की गणना धर्म और नैतिकता के कर्म-
1.सत्य बोलना
2.अहिंसा का पालन
3.चोरी न करना
4.लोभ से बचना
5.क्रोध पर नियंत्रण
6.क्षमा करना
7.दया भाव रखना
8.दूसरों की सहायता करना
9.दान देना (अन्न, वस्त्र, धन)
10.गुरु की सेवा
11.माता-पिता का सम्मान
12.अतिथि सत्कार
13.धर्मग्रंथों का अध्ययन
14.वेदों और शास्त्रों का पाठ
15.तीर्थ यात्रा करना
16.यज्ञ और हवन करना
17.मंदिर में पूजा-अर्चना
18.पवित्र नदियों में स्नान
19.संयम और ब्रह्मचर्य का पालन
20.नियमित ध्यान और योग सामाजिक और पारिवारिक कर्म
21.परिवार का पालन-पोषण
22.बच्चों को अ��्छी शिक्षा देना
23.गरीबों को भोजन देना
24.रोगियों की सेवा
25.अनाथों की सहायता
26.वृद्धों का सम्मान
27.समाज में शांति स्थापना
28.झूठे वाद-विवाद से बचना
29.दूसरों की निंदा न करना
30.सत्य और न्याय का समर्थन
31.परोपकार करना
32.सामाजिक कार्यों में भाग लेना
33.पर्यावरण की रक्षा
34.वृक्षारोपण करना
35.जल संरक्षण
36.पशु-पक्षियों की ��क्षा
37.सामाजिक एकता को बढ़ावा देना
38.दूसरों को प्रेरित करना
39.समाज में कमजोर वर्गों का उत्थान
40.धर्म के प्रचार में सहयोग आध्यात्मिक और व्यक्तिगत कर्म
41.नियमित जप करना
42.भगवान का स्मरण
43.प्राणायाम करना
44.आत्मचिंतन
45.मन की शुद्धि
46.इंद्रियों पर नियंत्रण
47.लालच से मुक्ति
48.मोह-माया से दूरी
49.सादा जीवन जीना
50.स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन)
51.संतों का सान्निध्य
52.सत्संग में भाग लेना
53.भक्���ि में लीन होना
54.कर्मफल भगवान को समर्पित करना
55.तृष्णा का त्याग
56.ईर्ष्या से बचना
57.शांति का प्रसार
58.आत्मविश्वास बनाए रखना
59.दूसरों के प्रति उदारता
60.सकारात्मक सोच रखना सेवा और दान के कर्म
61.भूखों को भोजन देना
62.नग्न को वस्त्र देना
63.बेघर को आश्रय देना
64.शिक्षा के लिए दान
65.चिकित्सा के लिए सहायता
66.धार्मिक स्थानों का निर्माण
67.गौ सेवा
68.पशुओं को चारा देना
69.जलाशयों की सफाई
70.रा��्तों का निर्माण
71.यात्री निवास बनवाना
72.स्कूलों को सहायता
73.पुस्तकालय स्थापना
74.धार्मिक उत्सवों में सहयोग
75.गरीबों के लिए निःशुल्क भोजन
76.वस्त्र दान
77.औषधि दान
78.विद्या दान
79.कन्या दान
80.भूमि दान, नैतिक और मानवीय कर्म
81.विश्वासघात न करना
82.वचन का पालन
83.कर्तव्यनिष्ठा
84.समय की प्रतिबद्धता
85.धैर्य रखना
86.दूसरों की भावनाओं का सम्मान
87.सत्य के लिए संघर्ष
88.अन्याय के विरुद्ध आवाज ��ठाना
89.दुखियों के आँसू पोंछना
90.बच्चों को नैतिक शिक्षा
91.प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
92.दूसरों को प्रोत्साहन
93.मन, वचन, कर्म से शुद्धता
94.जीवन में संतुलन बनाए रखना
विधि के अधीन 6 कर्म
95.हानि
96.लाभ
97.जीवन
98.मरण
99.यश
100.अपयश
"हिन्दुस्तान में जो मुसलमान पड़े हैं वो मुसलमान ने, ज़्यादातर ने, पाकिस्तान बनाने में साथ दिया। अब एक रोज़ में, एक रात में, सबका दिल कैसे बदल गया, ये मेरी समझ में नहीं आता।" - सरदार वल्लभ भाई पटेल कोलकाता में