हिम्मत है तो हम सबको गोली मारके दिखाओ!
सभ्यता के इतिहास में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जब हमला किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सत्य, विवेक और जागृति की पूरी संभावना पर होता है—और आज हम उसी प्रकार के एक क्षण के साक्षी हैं।
आज के समय में न केवल भारत बल्कि विश्व के प्रमुख दार्शनिकों और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों में गिने जाते हैं। वेदांत और गीता की शिक्षाओं को उन्होंने आधुनिक, तार्किक और निर्भीक भाषा में प्रस्तुत करते हुए लाखों लोगों के जीवन को स्पर्श किया है। उनका कार्य अंधविश्वास, पाखंड, जातिवाद और मानसिक गुलामी के विरुद्ध एक सतत संघर्ष है।
और इसी कार्य के प्रत्युत्तर में उन्हें क्या मिलता है?—धमकियाँ, हिंसा, और मृत्यु की चेतावनी।
यह स्पष्ट समझना आवश्यक है: यह केवल एक व्यक्ति पर आक्रमण नहीं है; यह उस चेतना पर आक्रमण है जो समाज को जगाने का प्रयास कर रही है। यह लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बौद्धिक ईमानदारी पर सीधा प्रहार है।
इतिहास साक्षी है कि जब भी किसी महान व्यक्तित्व ने समाज, भारत और संपूर्ण विश्व को जगाने का प्रयास किया है, तब उसे बदले में विरोध, धमकियाँ, हिंसा और यहाँ तक कि मृत्यु का सामना करना पड़ा है। परंतु सत्य की प्रकृति यह है कि वह दबाया नहीं जा सकता—वह हर बार और अधिक शक्ति के साथ उभरता है।
@Advait_Prashant को गोली मारने की धमकी देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह उस विचार और चेतना पर हमला है जो समाज को जागृत करने का प्रयास कर रही है। ऐसे कृत्य करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई होना अनिवार्य है।
यह भी स्मरण रहे—आज लाखों-करोड़ों युवा ऐसे हैं, जिनके भीतर उनकी दी हुई समझ, उनकी शिक्षा, उनकी दृष्टि जीवित है।
एक व्यक्ति को निशाना बनाकर क्या प्राप्त होगा?
उनका ज्ञान, उनके शब्द, उनका संदेश अब किसी एक शरीर तक सीमित नहीं है। वह हम सबके भीतर जीवित है, और निरंतर फैल रहा है।
*हिम्मत है तो हम सब को गोली मारके दिखाओ!*
यदि सत्य को बोलने वाले को चुप कराना है, तो फिर हम सबको चुप कराना होगा—क्योंकि हममें से हर एक के भीतर वही चेतना, वही आग, वही स्पष्टता अब जीवित है।
@DelhiPolice@HMOIndia@Uppolice@PMOIndia
मैं आपसे गंभीर और तत्काल हस्तक्षेप की मांग करता हूँ। दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए, और आचार्य जी को सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान की जाए। यह केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा का प्रश्न नहीं है—यह उस विचार की सुरक्षा का प्रश्न है जो समाज को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जा रहा है।
यदि हम अपने विचारकों, अपने सत्य वक्ताओं की रक्षा नहीं कर सकते, तो हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ केवल भय, भ्रम और अंधकार शेष रह जाएगा।
मैं दृढ़ता से आचार्य प्रशांत के साथ खड़ा हूँ—और यह केवल मेरा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों का स्वर है जिनके जीवन में उनकी शिक्षाओं ने वास्तविक परिवर्तन लाया है।
सत्य को दबाया नहीं जा सकता। परंतु जो उसे दबाने का प्रयास करते हैं, उन्हें रोका जाना आवश्यक है।
#AcharyaPrashant #StandForTruth #ProtectThinkers #Vedanta #FreedomOfExpression #StopThreats #Justice #EnsureSafetyforAP
#WeStandWithAP
डॉक्टर अंबेडकर पर @Advait_Prashant के साथ मेरे इंटरव्यू के इस टुकड़े पर कुछ लोगों का दिमाग यूँ फिरा कि आचार्य प्रशांत को जान से मारने की धमकी दे दी. ऐसा क्या चुभा भाई? आचार्य प्रशांत कोई पोंगा बाबा, जाहिल नेता या सुपारीखोर बदमाश हैं? वैचारिक रूप से प्रबल-प्रबुद्ध एक युद्धरत चिंतक- समाज को अपने मुताबिक़ सहेजने का अधिकार नहीं रखता क्या?
वैसे इन धमकियों को प्रशासन और सरकारों को गंभीरता से लेना चाहिए.
@CMOfficeUP@noidapolice@dgpup
देश को भीड़ नहीं, सोचने वाले लोग चाहिए।
आचार्य प्रशांत युवाओं को सोचने की ताकत दे रहे हैं।
जो सोचता है, वो झूठ के खिलाफ खड़ा होता है।
इसलिए उनकी सुरक्षा, देश की जरूरत है।
#WeStandWithAP#AcharyaPrashant#EnsureSafetyForAP
राहुल,
>> इसका क्या अर्थ है: "गलती से मेरा नंबर चला गया"?
अपने आप फ़ोन नंबर चलकर हमारे पास आया था? संस्था आपको स्वयं कभी सामने से कॉल नहीं करती - पहले आपने ख़ुद वेबसाइट पर जाकर फ़ॉर्म भरा था और उस फ़ॉर्म में अनुरोध/स्वीकार किया था कि संस्था आपको कॉल करे।
और अगर आप चाहते थे कि संस्था कॉल न करे, तो वेबसाइट पर यह भी साफ़ बताया गया है कि अकाउंट कैसे डिलीट करते हैं। WhatsApp के हर संदेश पर लिखा आता है - "इन संदेशों को रोकें" (STOP Messages)। आप अपना नंबर हटा सकते थे। आप पढ़े लिखे तो होंगे? पाँच साल में ये नहीं पता चला कि अकाउंट कैसे डिलीट करना है? रोज़ सैकड़ों लोग करते हैं, बस आप ही अनूठे निकले.
>> “रोज़ कॉल और व्हाट्सएप आते हैं कि पैसे दो और कोर्स लो। ये अध्यात्म के नाम पर शुद्ध धंधा चला रहे हैं।”
भाई, तुम्हें मुफ़्त में कुछ दिया जा रहा है, और अगर तुम कुछ दो भी दोगे तो भी 50 रुपए दोगे। यही वो न्यूनतम योगदान राशि है जिस पर दो लाख छात्रों को संस्था आज गीता पढ़ा रही है। आज तक तुमने 50 रुपए के लिए किसी को बार-बार कॉल करते हुए सुना है? बड़ी-बड़ी कंपनियाँ भी पैसे बचाने के लिए ऐसा नहीं करतीं। जितना तुम दोगे, उससे कहीं ज़्यादा संस्था सिर्फ़ कॉल और WhatsApp पर तुम पर खर्च कर देती है। तुम्हें गीता से जोड़ने से पहले ही संस्था तुम पर ज़्यादा खर्च कर चुकी होती है - और इसमें हम ये तो गिनाना भी नहीं चाहते कि गीता समझने का मूल्य क्या होता है। तो फ़ोन तुमसे कुछ लेने के लिए नहीं, तुम्हें कुछ देने के लिए किया जाता है।
जो भी व्यक्ति आचार्य जी की गीता से जुड़ता है, उसे
🔸महीने के तीसों दिन या तो सत्र या तो परीक्षा उपलब्ध करवाई जाती है। प्रतिदिन।
🔸गीता के हर श्लोक को दो-दो घंटे समझाया जाता है, और हर श्लोक की रिकॉर्डिंग्स पिछले कई सालों की आपके लिए उपलब्ध हैं।
🔸सिर्फ़ गीता ही नहीं, कबीर साहेब के भजन, बौद्ध दर्शन, अष्टावक्र गीता, ऋभु गीता, लाओ त्ज़ू पर भी सत्र होते हैं।
🔸एक पूरी सोशल मीडिया ऐप आपके लिए बनाई गई है जहाँ गॉसिप नहीं, गहरी चर्चा होती है। एक सोशल मीडिया के IT system पर कितना खर्चा होता है, कुछ अंदाज़ा है? और वो आपको बिना किसी शुल्क के मिलता है।
🔸Ask AP AI आपको मुफ़्त में, हाँ मुफ़्त में, ऐसे जवाब देता है जो पिछले 25 सालों की आचार्य जी की मेहनत से निकले हैं।
🔸महीने में 15 गीता परीक्षापत्र बनाए जाते हैं, आपकी समझ को धार देने के लिए।
थोड़ा बुद्धि को ज़ोर दो, ये सब ₹50 में देना मुमकिन है? जिन्हें तुम धर्मगुरु वगैरह कहते हो, वे तुम्हें ₹50 में मिलने भी न दें, सिखाना तो दूर की बात है। इतने में तो Zomato पर एक समोसे की डिलीवरी भी नहीं आती।
और तुम कहते हो हम धंधा चला रहे हैं? अरे, ये धंधा नहीं, अहंकार के लिए बहुत बड़ा फंदा है, जो गीता से भागना चाहता है। तुम्हारा यह ट्वीट बता रहा है कि हमारा तरीका सच में कारगर है।
>> “इतनी शिद्दत से तो कोई भगवान का नाम नहीं जपता, जितनी शिद्दत से ये लोग मार्केटिंग करते हैं।”
ये भगवान का नाम भी बिना मार्केटिंग के तुम तक नहीं पहुँचा होता - पर खैर, इतना तुम नहीं समझ पाओगे। शुक्र करो कि संस्था मार्केटिंग पर खर्चा कर रही है, वरना 2 लाख से भी ज़्यादा लोग कभी गीता सुनने और परीक्षा देने नहीं आते, वो परीक्षा इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के मुताबिक़ अध्यात्म क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा है। अगर पहली attempt में पास कर लोगे न राहुल, तो जीवन भर के लिए गीता तुम्हें मुफ़्त में सिखाई जाएगी।
>> “अगर आपके ज्ञान में वाकई दम होता, तो आपको फोन कर-करके लोगों से भीख नहीं मांगनी पड़ती।”
उपनिषदों में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? सार्त्र, हैडेगर, विटगेंस्टीन में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? शून्यता सप्तति में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़ी है?
जिस भी चीज़ में दम है, वो तुमने ख़ुद कभी नहीं पढ़ी, तुम्हें ज़बरदस्ती ही पढ़वाई गई - स्कूल से लेकर कालेज तक। अपनेआप तो सड़ा कोकशास्त्र और व्हाट्सएप साहित्य ही पढ़ा है तुमने। अपनी ज़िंदगी देखो - तुम हो किस गुमान में? तुम्हें सचमुच लगता है तुम सच और गहराई की ओर अपनेआप ही चले जाओगे? नहीं, कभी नहीं। अपनेआप तो झूठ और गंदगी ही फैलते हैं। सफाई अपने आप कभी नहीं हो जाती - उसके लिए किसी को जान लगानी पड़ती है। सच स्वयं नहीं फैलता, दार्शनिकों और ज्ञानियों को सच फैलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है।
फ़ोन कर कर के भीख नहीं माँगी जा रही। फ़ोन कर कर के इस दुनिया को कुछ ऐसा दिया जा रहा है जो माँगने की भी इसकी औक़ात नहीं है। एहसान समझो कि तुम्हें कॉल किया जा रहा है। वरना आज कोई नहीं है जो तुम्हें गीता का अतिशुद्धतम अर्थ समझा रहा हो, जो अपना IIT और IIM का करियर छोड़कर तीसों दिन आपको समर्पित कर रहा हो और ऊपर से इस काम के लिए खुद खर्चा कर रहा हो ताकि तुम्हें कुछ सिखा सके।
जो काम आज कोई नहीं कर रहा, वो प्रशांतअद्वैत संस्था कर रही है, चाहे वो अंधविश्वास को तोड़ने की बात हो, चाहे पशु प्रेम सिखाने की बात हो, चाहे स्त्री सशक्तिकरण की बात हो। हमारी संस्था आज इन सब में सबसे अग्रणी है।
अगर ये बात समझ नहीं आ रही तो गीता कम्युनिटी पर आइए और कुछ दिन बिताइए। आपको खुद समझ आ जाएगा, जहाँ हर कुछ मिनटों में नए-नए testimonials आते हैं, जिनमें दुनियाभर के लोग बताते हैं कि गीता मिशन से जुड़ने के बाद उनकी ज़िंदगी में क्या परिवर्तन आया और क्या लाभ हुआ।
और हाँ, हमारे पास तुम्हें किए गए सारे कॉल्स, उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, तारीख़ और समय सहित उपलब्ध हैं। ऐसी झूठी अफ़वाहें फैलाने के कारण तुम्हारा Twitter account रिपोर्ट भी कर सकते है।
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आपके होने न होने से आचार्य प्रशांत गीता मिशन को कुछ नहीं होगा पर आपका नुकसान जरूर होगा। सच को समझें और अभी जुड़ें:
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@Advait_Prashant
Clean air = human right ⚖️
not a privilege.
"हम प्रकृति से कुछ अलग नहीं हैं। प्रकृति को नष्ट करना आत्महत्या करने जैसा है।"
भोग और विनाश
पृथ्वी नहीं गर्म हो रही है, हम भीतर से तप रहे हैं, अपनी कामनाओं में। आग लगी हुई है हमारे भीतर — और भोग लूँ, और भोग लूँ, मुझे और कंज़म्पशन करना है। ये जो हमारे भीतर आग लगी हुई है ना, ये ग्लोबल वार्मिंग के रूप में हमें दिखाई दे रही है। कचरा बाहर नहीं फैल रहा है, कचरा हमारे भीतर है। और जब तक इंसान के भीतर के कचरे को साफ़ नहीं करोगे, बाहर कचरे को रोकने का कोई तरीका नहीं है।
— @Advait_Prashant
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#SayNoToPollution
पैसे वाले दिल्ली छोड़ देंगे, पर हमरा क्या? आपका क्या?
क्या आप अपना शहर छोड़ पाएंगे?
दिल्ली की हवा इतनी ज़हरीली हो चुकी है कि टॉप पल्मोनोलॉजिस्ट अब खुलेआम कह रहे हैं—
"अगर आपके पास पैसा है, तो कुछ दिनों के लिए दिल्ली से बाहर चले जाएं।"
जल्दी शायद ये भी कहना पड़ सकता है—
दिल्ली हमेशा के लिए छोड़ दीजिए। ☹️
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🚨 Negative climate feedback is on ⚠️
हम उस निगेटिव फीडबैक लूप में आ चुके हैं। और ये सबकुछ हमने सोचा था कि जितने दशकों में होगा उससे कहीं ज़्यादा तेज़ी से हो रहा है। हो सकता है कि अगले पाँच-सात साल में ही वो महाप्रलय आ जाए जिससे हम बचना चाह रहे थे।
In frame- @Advait_Prashant
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जलवायु परिवर्तन का मूल कारण क्या है?
अचार्य प्रशांत कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन का मूल कारण मानव का लालच, उपभोगवाद और अज्ञान है। प्रकृति अपने आप में संतुलित है, लेकिन जब मनुष्य ने अपनी इच्छाओं को अनियंत्रित कर लिया, तभी असंतुलन शुरू हुआ।
In frame - @Advait_Prashant
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विलियम शेक्सपियर ने कहा था:
To be or not to be — that is the question.
आज दिल्ली-NCR में लोग कह रहे हैं:
To breathe or not to breathe — that is the existential crisis.
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Review by Dr Renuka ⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️
Truth Without Apology (TWA) = स्पष्टता 😇
स्पष्टता के बिना जीवन व्यर्थ है — और TWA वही सबसे अहम काम करती है,
यह हमें स्पष्टता प्रदान करती है। 🪔
#TWA_TopsAmazon#चाहिए_TWA#AP_TWA_है_ज़रूरी
Review by Dr Renuka ⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️
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TWA इस समय में जीवन को सही ढंग से जीने के लिए सबसे आवश्यक बातों की एक तरह की manual है।
हर इंसान के लिए इसे पढ़ना optional नहीं, बल्कि compulsory है।🪔
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