@VarunKrRana American agency published a report before few years then it claimed modi 55% follower are fake. Rahul Gandhi having 4% fake followers. Why are you misguided public and spread fake information
@amitmalviya कल तक पूरी बीजेपी बोल रही थी रोहिणी जी ने किडनी नहीं दी झूठा प्रचार किया अब ख़ुद ही प्रचार कर रहे हैं कि किडनी दी पहले सबसे ज्यादा हमले तेज प्रताप पर होते थे अब उन्हीं से हमदर्दी दिखा रहे हैं
सच तो ये है बीजेपी वाले समय देखकर गधे को भी बाप कह देंगे
@riskyyadav41 अखिलेश यादव के पास भी हैं संजय लाठर वो भी हरियाणा से है और विधान परिषद में नेता विपक्ष भी रहे हैं अखिलेश जी के बहुत करीबी लोगों में से है
चुनाव आयोग पर कोई सवाल नहीं सिस्टम पर कोई सवाल नहीं बस जिम्मेदार है तो संजू हैं और तेजप्रताप अपनी हरकतों की वजह से बाहर गए है पूरा दिन मीडिया में क्या चल रहा था किसी को याद नहीं पार्टी और परिवार की बदनामी हो रही थी लालूजी तुमसे ज़्यादा समझते है कौन सही है इसलिए वो फैसला लेंगे
सब लोग अब सलाहकार बने घूम रहे हैं 2015, 2020में सबसे ज्यादा सीट और अबकी बार भी वोट शेयर में सबसे ऊपर है दुसरी बात राज्यसभा लालू जी ने भेजा है इन्होंने कभी कुछ नहीं मांगा 15साल से तेजस्वी के साथ है ना कभी ख़ुद की ब्रांडिंग की ना अपना चेहरा कभी आगे किया जो किया वो संगठन के लिए किया
नाम: संजय यादव
निवास : हरियाणा
राजनीति : बिहार
काम : तेजस्वी का सत्यानाश
तेजस्वी यादव खुद से ज्यादा संजय यादव पर विश्वास करते हैं, इसे RJD का चाणक्य कहा जाता हैं !
तेजस्वी की बदौलत राज्यसभा सांसद हैं लेकिन इसने गलत सलाह देकर राजद को जमीन पर पहचा दिया !
तेजू भैया जयचंद ऐसे ही नहीं कहते हैं इसको , लालू प्रसाद यादव का परिवार बर्बाद करने में सबसे बड़ा हाथ इसी का हैं !
तेजू भैया की वीडियो लीक करवाना और उनको पार्टी और घर निकालने में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान हैं!
वर्तमान भारतीय राजनीति में सबसे बढ़िया वक्ता और क्राउड से कनेक्ट करने वाले नेता कौन हैं?
◆◆
मेरे ख्याल से
1. असदुद्दीन ओवैसी (कोई आसपास भी नहीं है)
2. योगी आदित्यनाथ (फ्री हैंड मिलने पर अभूतपूर्व वक्ता हैं)
3. प्राइम नरेंद्र मोदी (2012-15 वाला काल मिडास टच वाला था)
4. के चंद्रशेखर राव और ओल्ड राज ठाकरे
◆◆
इसके अतिरिक्त युवाओं में रवींद्र सिंह भाटी, कन्हैया और इमरान प्रतापगढ़ी के भाषण भी अच्छे होते हैं।
बहुत से नाम छूट गए हैं जिन्हें लोग जोड़ते जाएंगे पर इन लोगों के अतिरिक्त वैसे कम ही पब्लिक स्पीकर्स हैं जिन्हें सुनने में आंनद आता हो