Police in India detained at least 35 media workers covering protests in New Delhi over a 48-hour period, according to the US-based Committee to Protect Journalists. Authorities allege they were obstructing police duties.
और ये ख़ुद ‘स्वाभिमान-शून्य’ हैं, नहीं तो :
- नाम की पट्टी हटाने पर कुछ तो प्रतिक्रिया देते;
- कुर्सी की जगह स्टूल पर बैठानेवालों के उप नहीं होते;
- जनता द्वारा चुनाव हराये जाने के बाद सरकार में नहीं रहते;
- किसी के द्वारा दिये गये ‘कृपाप्राप्त पद’ को स्वीकार नहीं करते;
- प्रमुख मंत्रालय छिन जाने पर चुप्पी न साध लेते;
- मुख्यमंत्री जी द्वारा सरेआम अपने हाथ से हाथ नीचे कर देने पर वहीं बैठे न रहते;
- वर्चस्ववादियों के दिये अपमान के घूंट नहीं पीते;
- ’पीडीए समाज’ से होते हुए भी पीडीए का दमन- उत्पीड़न करनेवाले प्रभुत्ववादियों के पिछलग्गू न होते!
जनाब @DelhiPolice अब तो आप को बेनकाब एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल News 24 में काम कर चुकी पत्रकार गरिमा जी कर रही है।
आप लोग On Record झूठ बोल रहे है और अब आपके झूठ का पर्दाफाश देश के सम्मानित लोग करने में लगे है।
बाकी धन्यवाद ऐसे ही आप लोग झूठ का दामन थामे रहिए। 🙏
हरिशंकर परसाई ने लिखा है - “आत्मविश्वास कई तरह का होता है - धन का, बल का, ज्ञान का। मगर मूर्खता का आत्मविश्वास सर्वोपरि होता है।”
और जब इस मूर्खता को सत्ता का संरक्षण मिलने लगे, तो यही आत्मविश्वास गुंडई में बदल जाता है!
नागरिकों को डराकर प्रजा बनाने की कोशिश करने वाले याद रखें - यह देश संविधान से चलेगा, गुंडों के आतंक से नहीं!
"इलेक्शन से पहले अमित शाह कैसे बता सकते हैं कि चुनाव का नतीजा क्या होने वाला है,
इससे साफ पता चलता है कि यह लोग चुनाव में बेईमानी करवाते हैं।"
: अभिजीत दीपके
'वोट चोरी' के खिलाफ आवाज उठाने पर अमित शाह की पुलिस ने @nsui की छात्राओं की बर्बरता से पिटाई की।
हिरासत में लेने के बाद पिटाई करते हुए थाने ले गए और वहां बेल्ट और पट्टों से मारा गया।
इस मामले में दोषी महिला कांस्टेबल पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
और दिल्ली पुलिस याद रखे - हम ये भूलेंगे नहीं. मोदी सरकार के इशारे पर की गई इस बर्बरता का हिसाब होगा।
सोनभद्र: अब SDM की पॉवर ख़त्म है BLA का कोई मतलब नही सारी पॉवर ज्ञानू के पास है।
मोदी ज्ञानू से कहते हैं “इस बूथ पर इतना वोट जोड़ना है, इस बूथ पर इतना काटना है”
ज्ञानू कहता है “जी हुज़ूर”
उप्र की जनता भाजपाइयों से जो करवानेवाली है उसका रिहर्सल ये नेतागण कर रहे हैं।
‘भाजपाई’ उठा-बैठक का अभ्यास कर रहे हैं
क्योंकि अपने कुकर्मों की वजह से डर रहे हैं!
'पुलिस ने हमें जबरन गाड़ी में बैठाया, बाल खींचे, बुरी तरह पीटा'
ये बताया है उन प्रदर्शनकारियों ने जिन्हें पुलिस ने दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया.
हिरासत में लिए जाने के बाद इन प्रदर्शनकारियों के साथ कैसा बर्ताव हुआ, सुनिए उनकी आपबीती.
वीडियोः सुमेधा पाल (@Sumedhapal4 ) और शाद मिद्हत (@MidhatHasani )
कल का प्रदर्शन विचारों की साझी लड़ाई की तरह था। संविधान बचाने के संकल्प ने दलों की सीमाएँ तोड़ीं। इसी दौरान @yadavakhilesh ने एक ऐसे दृश्य की ओर देश का ध्यान खींचा, जिसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। उन्होंने एक वामपंथी संगठन का झंडा ख़ुद अपने हाथ में लेकर @neha_aisa को थमाया।
यह प्रतीक वैचारिक साझेपन का संदेश देता है। लाल झंडा क्रांति का है, समाजवाद का है, समानता और न्याय का है, बदलाव और इंक़लाब का है। इसे थामने में उन साझा मूल्यों की पहचान है, जो अलग-अलग संगठनों को एक बड़े संघर्ष में साथ खड़ा करते हैं।
यह दृश्य संविधान और लोकतंत्र बचाने की साझी लड़ाई को ऊर्जा देता है। अखिलेश यादव ऐसे ही प्रयासों से इस साझेपन को मज़बूत करते हुए, इस लड़ाई में अगुआ बनकर उभर रहे हैं।
लोकतंत्र की डकैती के ख़िलाफ़ आंदोलन रुकने के बजाय दिन-ब-दिन और तेज़ होता जा रहा है।
ये दृश्य अभी बिहार की राजधानी पटना के हैं। सड़कों पर उतरती यह भीड़ साफ़ संदेश दे रही है कि जनता अपने वोट, अपने संविधान और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की लूट पर ख़ामोश नहीं बैठेगी।
जिन्होंने भगवान के पैसे चुरा कर भगवान तक को धोखा दिया हो, वो भाजपाई धरती पर भगवान के रूप डॉक्टरों को भला क्या छोड़ेंगे।
भाजपा पैसों को छोड़कर किसी की सगी नहीं है।