मुख्यमंत्री जी के सूचनार्थ : ‘एक और समाचार’
अब बस यही ख़बर आनी बाक़ी थी। अब क्या पुलिस भी आउटसोर्स कर दी है। फ़र्ज़ी आरोपों, फ़र्ज़ी मुक़दमों, फ़र्ज़ी एनकाउंटर, फ़र्ज़ी सिरप, फ़र्ज़ी प्रचार के बाद अब ये फ़र्ज़ी पुलिस… भाजपा सरकार के अंतिम दौर में क्या-क्या दिन देखने बाक़ी हैं।
#ज़ीरो_हुआ_ज़ीरो_टॉलरेन्स
Camouflaging their religious-cultural identity, a ‘Regressive Secret Society’ can no longer play their dirty games. The duality of their autocratic character and their clandestine machinations must be exposed before the nation. Their ulterior motives, political jargon, jugglery, and cunning conspiracies must be unearthed — conspiracies that threaten the very fabric of our harmonious heritage of compassion, love, tolerance & coexistence.
This upcoming new progressive-positive generation will no longer entertain negativity, because it is a question of their future and liberty. They will shape it in their own judicious, scientific, secular, and democratic way. No one can rein them, no one can defame them, no one can muzzle their voice, no one can set their limits. They know the constitutional boundaries of their flight and their sky. And no one can cast them in a mould. They will cast their own moulds with a worldview that seeks global brotherhood and dignified means of living a happy life in a conducive environment and friendly fraternity of unbiased equality and equal opportunity for all.
सलेमपुर से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक श्री सुरेश यादव जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।
शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।
भावभीनी श्रद्धांजलि !
जेन ज़ी और जनता के आक्रोश से बचने के लिए अब संगी-साथी ‘बात की ढाल’ बना रहे हैं। एक जेन ज़ी पर तोहमत लगा रहा है, तो दूसरा अपने को बचाने के लिए उनकी तारीफ़ों के पुल बाँध रहा है। ये संगी-साथी समझ गये हैं कि पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी को वो अपनी सत्ता प्राप्ति की सीढ़ी नहीं बना सकते हैं। जब शताब्दी वर्ष में दो शीर्षस्थ लोगों के विचार एक-दूसरे के विपरीत हैं तो समझ लीजिए सब डर के मारे अपने-अपने को बचाने में लग गये हैं। स्वार्थ के संगी-साथियों के संग की मियाद पूरी हुई। शताब्दी वर्ष, समाप्ति वर्ष में बदल गया है। देश-समाज और भाईचारे को बाँटनेवाले नकारात्मक लोग आपस में ही बँट कर पूर्ण-संपूर्ण पतन की ओर जा रहे हैं। सदैव के लिए संगी-साथियों के भूमिगत होने का समय आ गया है।
इस 15 अगस्त से भाजपाई नकारात्मक राजनीति से आज़ादी का नया आंदोलन शुरू होगा।
’PDA शिखर अभियान’- 15 अगस्त 2026 शुभारंभ
‘PDA शिखर अभियान’ के तहत हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में बारालाचा ला दर्रे में स्थित 6111 मीटर उँची चोटी Mt. YUNAM पर ‘PDA का परचम फहराने’ के संकल्प की पूर्ति के लिए पर्वतारोहियों को शुभकामनाएँ!
PLAY • DEVELOP • ACHIEVE
1. हर खेल को सम्मान
2. हर खिलाड़ी को अवसर
3. हर युवा को उड़ान
सुरंगजीवियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके भूमिगत लोगों का ठिकाना सड़क के नीचे निकला क्योंकि जनता अब इन महा-भ्रष्टाचारियों को सड़क पर लेकर आने के लिए कमर कसकर बैठी है।
मुख्यमंत्री जी जब सुध में हों तो सुध लें।
उप्र के मुख्यमंत्री जी ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया
7000 करोड़ का कॉस्मेटिक फेशियल करवाया
उप्र के मुख्यमंत्री जी ने जिस प्रकार जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स की लगभग 7000 करोड़ की महाराशि को अपनी झूठी छवि को सच्ची बताने-दिखाने पर ख़र्च किया है; वो ग़रीबी-बेकारी, बेरोज़गारी, मंदी, एमएसपी और बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए जूझ रहे देश के सबसे बड़े प्रदेश के लिए बेहद अवांछनीय और अति-निंदनीय है।
हम इतनी ही राशि में ‘KG से PG & RESEARCH’ तक की World Class 2-3 University बनाकर बच्चों-युवाओं का भविष्य सुधारकर दिखाएंगे, ‘उप्र को तरक़्क़ी और ख़ुशहाली के रास्ते पर ले जाएंगे, हम NEO INDIA बनाएंगे!’
‘गोरखपुर मॉडल’ की पोल खोलते-खोलते तुलना के रूप में ‘गुजरात मॉडल’ की घपलेबाज़ी की बात भी सामने आ गई। दोनों में जो बातें कॉमन हैं वो ये हैं कि दोनों जगह भाजपाई सरकार है और भाजपाई महा-भ्रष्टाचार भी।
आपसी टकराहट ने तो ‘डबल इंजन’ को ‘ट्रबल इंजन’ बना दिया है।
बनाने चले Brand, बज गया Band!
अब 7000 करोड़ एक साल में भी खर्च कर दें तो भी कुछ बदलनेवाला नहीं।
डबल इंजन के आपसी कम्पटीशन में गुरु गुड़ रह गया, चेला शक्कर हो गया… ये बात अलग है कि ज़्यादा मीठे के चक्कर में सब कड़वा हो गया।
अच्छे व्यवहार, अच्छे करम और जन हित के काम से बड़ा कोई और प्रचार नहीं होता है।
इनके अत्याचार, अन्याय, महिलाओं-अधिकारियों-पत्रकारों-प्रोफ़ेसरों से दुर्व्यवहार, दुर्वचन, सजातीय पक्षपात, पीडीए पर प्रहार, ‘हाता नहीं भाता’ के फ़ार्मूल के विस्तार, महा-भ्रष्टाचार के द्रव्य के स्वर्ण-ठोसीकरण, मंदिर चोरी के आरोपियों को दोषपूर्ण SIT से बचाने व प्रतिशोध की राजनीति के कारण घर-मकान-दुकान से लेकर यूनिवर्सिटी तक गिराने जैसी नकारात्मक-संकीर्ण राजनीति के कारणवश इनकी इमेज का एनकाउंटर हो गया है और उसके ऊपर से बुलडोज़र भी गुज़र गया है। इनकी छवि तो बनी नहीं, अधिकारियों के घर-महल ज़रूर बन गये।
जनता पूछ रही है लखनऊ से गोरखपुर कोई डाइरेक्ट ट्रेन है क्या क्योंकि अपने बनाए भाजपाई एक्सप्रेसवे से जाने का जोखिम तो वो उठाएंगे नहीं। ‘एक-दो’ आइटम छोड़कर बाक़ी सब वैध सामान ले जाने के लिए मूवर्स एंड पैकर्स भी तैयार बैठे हैं।