छपरा विधानसभा में खेसारी ही आगे चल रहे हैं।
खेसारी अलग प्रचार कर रहे हैं।
खेसारी के पिता अलग प्रचार कर रहे हैं।
खेसारी के भाई अलग प्रचार कर रहे हैं।
खेसारी की पत्नी अलग प्रचार कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर सिर्फ खेसारी छाए हैं।
भोजपुरी इंडस्ट्री खेसारी के लिए प्रचार कर रहा हैं
जमुई कांड के वक्त जातीय सम्मेलन कर रहे सम्राट चौधरी ने रात में पुलिस अधिकारी को फ़ोन घुमाकर पूछा
CM: लड़की छेड़ने वाले ने किस रंग का गमछा लपेटा हुआ था?
पुलिस- सर…..भगवा! एकदम आप जैसा
CM:- फिर तो वह भगवा बलात्कारी ना हुआ। मतलब विचार से तो सात्विक और मोदी समर्थक ही होगा ना जी?? अच्छा…ध्यान से देखिए उस भगवा गमछे में कहीं राई भर भी हरा रंग है?
पुलिस:- नहीं हुज़ूर, हमारे IO ने तो आपकी फर्जी AI को दर्जी बनाकर पूछ लिया, कहीं हरा नहीं है। AI कह रहा है कि इन आरोपियों की उम्र में बोरिंग रोड पर आपका CM भी यही काम करता था।
CM:- बकवास बंद करो, जल्दी से आरोपियीं की जाति बताओ?
पुलिस:- सर, ये सब इधर के ही समर्थक है।
CM:- कुछ करो, मुस्लिम और यादव एंगल ढूंढो, कैसे भी।
पुलिस:- सर मुश्किल है
CM:- सस्पेंड कर देंगे तुमको, जो बोला वो करो! किसी दारू और मर्डर केस के आरोपी को इस केस में फँसा दो लेकिन कछु करो यार….
पुलिस:- सर, हम तो आपसे ज्यादे ही व्याकुल है।
CM:- ज़्यादा होशियार बनते है, जल्दी करो!
दाँत पीसते हुए, मोदी जी अब चुनाव में कहाँ से ,“मारब सिक्सर की छहो गोली छाती में रे, पॉवर होला ई ख़ाली…जाति में रे”” गाना टेलीप्रॉम्प्टर पर गायेंगे?
बुदबुदाते हुए, ये हरा गमछा और AI वाला डायलॉग हमको कौन अधिकारी रटवाया था रे….दीपक? जरा पता करो…
Super Exclusive-
योगी से सवाल की ऐसी सज़ा दी!
महिला पत्रकार रो पड़ी!!
प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगी आदित्यनाथ से सवाल पूछने वाली दिव्या श्रीवास्तव का इंटरव्यू।
सुनेंगे तो सिहर उठेंगे।
"मैने योगी आदित्यनाथ से एक सवाल पूछा था।
मुझे बीजेपी दफ्तर में घेर लिया। बहुत धमकाया।
कहा- बुलडोजर चलेगा घर पर।
LIU पीछे पड़ी है।
मुझे चैनल से भी निकाल दिया गया।
मैं अब कहीं नहीं हूं।
मैं बहुत डरी हुई हूं।"
नाम बदलनेवाले अब ‘प्रेस वार्ता’ का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर दें क्योंकि जब सिर्फ़ बयान दिया जाना है और प्रेस को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो बिना वार्तालाप ‘वार्ता’ शब्द का क्या अर्थ रह जाता है? माननीय सबका समय क्यों ख़राब कर रहे हैं, प्रेस रिलीज़ भेजकर ही काम चलाएं और दोनों का समय बचाएं।
सत्य ये है कि उप्र में सवालों की भरमार है लेकिन इनके पास जवाब ही नहीं हैं। मुँह मोड़ कर जाना, मैदान छोड़कर भागना भी कहलाता है।
ये शासन में पक्षपात करते हैं और प्रेस वार्ता में एकतरफ़ा बयानबाज़ी। अब क्या ये भी कहेंगे कि ‘प्रश्न सुनने के मूड में नहीं है।’
#प्रेस_एकालाप
तत्काल निलंबन हो, बर्ख़ास्तगी हो और ऐसा दंड मिले कि कोई दूसरा अधिकारी फिर कभी ऐसी हिम्मत और दुस्साहस न कर सके।
‘नारी वंदन’ का ढोंग करनेवाली भाजपा सरकार है भी या नहीं।
और कुछ नहीं कहना है।
भाजपा का राज सत्ता सजातीयों के ‘दंभ, घमंड, अहंकार’ का आपराधिक त्रिगुट है।
जो लोग समझते हैं कि सत्ता के साथ रहकर उनकी इज़्ज़त और रुतबा बढ़ता है, वो भी अब समझ गये हैं कि भाजपा में दिखावे का पद तो मिल सकता है पर सम्मान नहीं। भाजपाई वर्चस्ववादी अपने प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए किसी की हत्या भी कर सकते हैं किसी को भी ज़मीन पर बैठने को मजबूर कर सकते हैं।
पीड़ा बढ़ रही है, इसीलिए पीडीए बढ़ रहा है और पीडीए की एकता भी।
‘आरक्षण सुधार’ के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के ख़िलाफ़ एक और गहरी साज़िश है। आरक्षण पीडीए का अधिकार है किसी की इच्छा का विषय नहीं।
भाजपा व उनके संगी-साथी समय-समय पर जिस तरह कभी ‘समीक्षा’ तो कभी ‘सुधार’ जैसे अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग कर आरक्षण का विरोध करते हैं या कभी ‘क्रीमीलेयर’ की बात करते हैं या ‘आरक्षण त्यागने’ की सलाह देते हैं, वो सदियों से शोषित-वंचित लोगों को मिले आरक्षण के अधिकार की हक़मारी की लगातार की जा रही कोशिश के अलग-अलग मुखौटे हैं।
आरक्षण था, आरक्षण है, आरक्षण रहेगा!
सुना है जेल रिटर्न तिहाड़ी चौधरी मेरे और रवीश जैसे पत्रकारों के लिए कुछ बोल रहा है .
जो आदमी सीधे- सीधे सौ करोड़ की ब्लैकमेलिंग करने के मामले में जेल जा चुका है .
जो आदमी स्टिंग कैमरे में अपनी करतूतों के साथ क़ैद है .
जो आदमी सरकार के तलवे चाटने की प्रतियोगिता में पहले पायदान पर बने रहने के लिए हर रोज़ जतन कर रहा है .
जो आदमी सत्ता की सरपरस्ती में अपनी ज़ुबान और ज़ेहन को गिरवी रखकर काम कर रहा है .
जो आदमी पत्रकारिता के चोले में रहकर हर दौर में सरकारों से सेटिंग करके
अपना धंधा कर रहा हो .
जो आदमी मोदी की चाटूकारिता करके करोड़ों के सरकारी अुनदान पर बीजेपी का भोंपू बना हो .
जो आदमी विपक्ष और विरोध की आवाजों के ख़िलाफ़ सुपारी लेकर दिन रात काम कर रहा हो .
जो आदमी पत्रकारिता के सबसे कलंकित चेहरों में से एक हो .
वो आदमी बोल रहा है .
छोड़ो यार .
जब बीमारी ROOT में है तो FRUIT के इलाज से कोई नहीं माननेवाला।
देश में हर समस्या की एक ही जड़ है, जो गई अड़ है : नाम तो सुना होगा ‘BJP’
NO FAST TRACK; BJP GO BACK!
#No_More_BJP#नहीं_चाहिए_भाजपा
जब सरकार न सुनेगी बच्चों की आवाज़…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब बच्चों पे बेरहमी से होगा निर्मम वार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सरेआम बच्चियों के फटेंगे लिबास…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब करोगे दुखी माँ-बाप पर भी प्रहार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब हर एक नौजवां होगा हताश-निराश…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सत्ता का अहंकार होगा हद से पार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सरकार बंद कर लेगी संसद के द्वार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब मौक़ा नहीं दोगे, न संसद में न बाहर…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!