निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय -
निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे।
01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बा��धेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे।
01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे ।
08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक स��स्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे।
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मेरठ में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का संकल्प : पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ कई बड़े शहरों के फ्रेंचाइजी के समाचार से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूटा
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में मेरठ में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा ज�� तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
पूर्व दिल्ली विद्युत बोर्ड के इ सत्यपाल और इ यशपाल शर्मा जो ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के संरक्षक और सेक्रेटरी (मुख्यालय) है, ने निजीकरण के बाद दिल्ली में बिजली कर्मियों और अभियंताओं की हो रही दुर्दशा के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की ��ैयारी करिये।
मेरठ में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने से कि, पश्चिमांचल के बड़े शहरों में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी होने जा रहा है, अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि यह पुख्ता जानकारी मिली है कि जिन जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है उन सभी शहरों के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का टेंडर भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के टेंडर के साथ ही जारी किया जाएगा।
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर ���ेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
अभियन्ता संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा सारस्वत, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, संयुक्त सचिव आलोक श्रीवास्तव, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव निखिल कुमार, संघर्ष समिति पश्चिमांचल के संघर्ष समिति के संयोजक सी पी सिंह ने शिविर को संबोधित किया।
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कॉर्पोरेट घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने निजीकरण पर उठाए पांच सवाल
ऊर्जा निगमों के निजीकरण के मामले में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजी घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी ��े निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
इसे देखते हुए संघर्ष समिति ने प्रारंभिक तौर पर ही निजीकरण के सारे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी। समिति ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाली सबसे बड़ी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया से भी इस बाबत विचार विमर्श किया। विस्तृत विचार विमर्श के बाद ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे ऐसा लगता है कि निजीकरण के मामले में बहुत बड़ा घोटाला और भ्रष्टाचार होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की मीटिंग है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांच�� विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि यही तैयार की गई थी। इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई है। निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति मे��� हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना जा रहा है जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिं��� डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी कीआपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर काम किया जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने हाल ही में तीसरी बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है ज��समें उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल पूर्व निर्धारित निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी के आधार पर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को ल���न्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी ने कहा कि यह सब बहुत ही गंभीर मामला है। उत्तर प्रदेश में बिजली की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को लूट से बचाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी को तत्काल हस्तक्षेप कर सारी प्रक्रिया रोकनी चाहिए और चल रहे घोटाले की उच्च स्तरीय सीबीआई कराई जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान, उपभोक्ता, व्हीसल ब्लोअर, सरकारी कर्मचारी, राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन सब मिलकर निजीकरण के पीछे हो रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते रहेंगे।
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आज दिनांक 22/07/25 को
वि0वि0ख0-सिकंदराबाद के अन्तर्गत गुलावठी टाउन में कैम्प व कांवड़ मार्ग का निरीक्षण अधीक्षण अभियन्ता द्वारा किया ���या एवं कावड यात्रा के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति करने हेतु निर्देशित किया गया।
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चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में फर्जी आंकड़ों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री जी को गुमराह क�� किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन। बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के गांव-गांव घर-घर तक बिजली पहुंचाने का काम किया है अब बिजली के निजीकरण के बाद यह सारे गांव लालटेन युग में पहुंचने वाले हैं।
कुछ ब्यूरोक्रेट्स, राजनेता, बड़े पूंजीपतियों के साथ मिलकर बिजली के निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने की फिराक में है।
माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले को रोके तथा गरीब��ं के हित में, किसानो के हित में, छोटे व्यापारियों के हित में, कर्मचारियों के हित में, छात्रों के हित में, बेरोजगार के हित में, सरकारी विभागों में पिछड़ों एवं दलितों का आरक्षण बचाने के लिए व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त करने की कृपा करें।
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निजीकरण हेतु बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाने पर संघर्ष समिति ने उठाया सवाल : निजी घरानों को बेजा मुनाफा पहुंचाने की साजिश की जांच की मांग : 22 जून की महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रांसपेरेन्सी इंटरनेशल�� के कार्यकारी निदेशक सम्मिलित होंगे : 22 जून को बिजली महापंचायत में व्यापक जन आन्दोलन का फैसला लिया जायेगा :
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने आरोप लगाया है कि निजी घरानों को बेजा मुनाफा पहुंचाने के लिए पॉवर कारपोरेशन ने आर एफ पी डाक्यूमेंट में बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाया है। संघर्ष समिति ने इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। 22 जून की महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रांसपेरेन्सी इंटरनेशलन के कार्यकारी निदेशक सम्मिलित होंगे। 22 जून को बिजली महापंचायत में व्यापक जन आन्दोलन का फैसला लिया जायेगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन द्वारा विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण हेतु सौंपे गये आर एफ पी डॉक्यूमेंट में 45 हजार करोड़ रूपये का घाटा दिखाया गया है जो पूर्णतया निराधार और भ्रामक है। दरअसल निजी घरानों को बेजा मद��� पहुंचाने के लिए पॉवर कारपोरेशन ने बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे के उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी को पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़ कर दिखा रहा है। जबकि इस सब्सिडी की धनराशि को देना सरकार का दायित्व होता है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के आर एफ पी डाक्यूमेंट में निजीकरण के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत व���तरण निगम के निजीकरण के बाद 9102 करोड़ रूपये की सब्सिडी देने की बात कही गयी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में सब्सिडी को पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़ रहा है वहीं दूसरी ओर निजी घरानों के लिए सब्सिडी की धनराशि का अग्रिम भुगतान करने को तैयार है। इससे साफ होता है कि बढ़ा कर दिखाया गया घाटा गलत और भ्रामक है तथा आकड़ों की यह कलाबाजी केवल निजी घरानों को मुनाफा देने के लिए की जा रही है।
22 जू�� को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इण्डिया के कार्यकारी निदेशक रमानाथ झा ने आने की सहमति दे दी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष श्री अवधेश कुमार वर्मा भी महापंचायत में सम्मिलित होंगे। अन्य प्रान्तों के बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं के संगठनों के कई पदाधिक��ी महापंचायत में सम्मिलित होने आ रहे हैं। इसके अतिरिक्त बड़े पैमाने पर किसान, मजदूर, अधिवक्ता, मजदूर नेता, छात्र नेता, बुद्धिजीवी, उपभोक्ता संगठनों के पदाधिकारी और बिजली कर्मी बड़ी संख्या में सम्मिलित होंगे।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल ने कहा है कि बिजली के निजीकरण के विरोध में हमेशा से ही किसान वर्ग रहा है। डॉ द���्शन पाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले उत्तर प्रदेश के लाखों किसान बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन का न केवल समर्थन करेंगे अपितु उसमें सक्रिय रूप से सम्मिलित होंगे।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन इण्डिया के कार्यकारी निदेशक और मा. सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता रमानाथ झा ने कहा है कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन ने अवैध ढंग से नियुक्त किये गये ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रान��ट थॉर्टन के झूठा शपथ पत्र देने और फर्जीवाड़ा करने के मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक माह पूर्व पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और शासन में बैठे उच्च अधिकारियों ने निहित स्वार्थ के चलते ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन का पत्र दबा दि��ा है। बिजली महापंचायत में निजीकरण के पीछे हो रहे मेगा घोटाले को ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन उठायेगी।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि बिजली महापंचायत में भारी संख्या में उपभोक्ता सम्मिलित होंगे और किसी भी कीमत पर निजीकरण के बाद प्रदेश को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे।
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विद्युत नियामक आयोग पर निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर अभिमत देने के लिए निजी घरानों और पावर कारपोरेशन का दबाव: संघर्ष समिति ने नियामक आयोग पर मौन प्रदर्शन कर विरोध दर्ज किया और ज्ञापन दिया: उत्पीड़न और लेने देन के आरोप के घेरे में आए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में वाराणसी में सत्याग्रह जारी:
विद्युत कर्मच���री संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में आज सैकड़ो बिजली कर्मचारियों ने नियामक आयोग पर प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि निजी घरानों के दबाव में निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग से अभिमत लेने की तैयारी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
उधर बिजली कर्मियों के उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए बड़े पैमाने पर ट्र��ंसफर एवं लेनदेन की बात वायरल होने के विरोध में आज वाराणसी में बिजली कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संगठन समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग को तत्काल अभिमत देने के लिए निजी घरानों और पावर कारपोरेशन प्रबन्धन दबाव डाला जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि संभावना बताई जा रही है कि निजी घरानों के दबाव में विद्युत नियामक आयोग किसी भी समय अपना अभिमत पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को दे सकता है।
इसके विरोध में आज सैकड़ो बिजली कर्मचारियों ने विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय के मुख्य द्वार पर मौन प्रदर्शन किया। बिजली कर्मी अपने हाथ में ��ख्तियां लिए हुए थे जिसमें लिखा था कि "कारपोरेट के दबाव में निजीकरण स्वीकार्य नहीं स्वीकार्य नहीं।"
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल निगम के निजीकरण हेतु इतना उतावला हो गया है कि पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष निदेशक वित्त निधि नारंग के साथ मिलकर अधिकारियों पर गलत संस्तुति पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डलवा रहे हैं। यह जानकारी म��ली है इसी दबाव के चलते पावर कारपोरेशन के डायरेक्टर फंड सचिन गोयल ने त्यागपत्र दे दिया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में निजीकरण से उपभोक्ताओं को और किसानों को होने वाले नुकसान की तो चर्चा होगी ही साथ ही निजीकरण के पीछे होने वाले मेगा घोटाले का भी पर्दाफाश किया जाएगा।
उधर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों के उत्पीड़न की दृष्टि से ��ड़े पैमाने पर हजारों की संख्या में किए गए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में आज प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक और ऊर्जा मंत्री की बातचीत का ऑडियो वायरल होने के साथ ही ट्रांसफर आदेशों में लेनदेन की बात भी सामने आ गई है। ट्रांसफर घोटाले के विरोध में आज सैकड़ो बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया। बिजली कर्मचारियों के गुस्से से घबराए हुए प्रबंध निदेशक ने मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया। सैकड़ो बिजली कर्मी मुख्य द्वार पर ही बैठ गए हैं।
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निजीकरण के विरोध में विद्युत नियामक आयोग पर मूक प्रदर्शन : निजीकरण के डॉक्यूमेंट क�� नामंजूर करने की मांग: सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मचारियों ने विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय पर मूक प्रदर्शन किया और निजीकरण के विरोध में ज्ञापन दिया। प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर भी निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए।
आज सायं 04 बजे सैकड़ो की संख्या में बिजली कर्मचारी विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे। बिजली कर्मियों ने विद्युत नियामक आयोग के मुख्य द्वार के सामने निजीकरण के विरोध में तख्तियां लेकर मूक प्रदर्शन किया। नियामक आयोग के सचिव ने मुख्य द्वार पर आकर संघर्ष समिति का ज्ञापन लिया। ज्ञापन के जरिए संघर्ष समिति ने निजीकरण पर नियामक आयोग द्वारा सुनवाई पर अपनी आपत्ति और विरोध दर्ज किया।
संघर्ष समिति ने विद��युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के नाम दिए गए ज्ञापन में उनसे मांग की है कि वह पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु दिए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को मंजूरी न दें और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाए। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से यह भी मांग की है कि निजीकरण के मामले में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को भी नियामक आयोग के सामने अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाय।
ज्ञापन में कहा गया है कि विद्युत नियामक आयोग को अवैध ढंग से नियुक्त किए गए, झूठा शपथ पत्र देने वाले और फर्जीवाडा स्वीकार कर लेने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाए गए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर पॉवर कॉरपोरेशन से कोई बात नहीं करनी चाहिए थी और न ही इस पर कोई अभिमत देना चाहिए।
एक अन्य मुख्य बात यह है कि श्री अरविंद कुमार ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद पर रहते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ 06 अक्टूबर 2020 को एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री माननीय श्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री माननीय श्री श्रीकांत शर्मा की उप��्थिति में हुआ था।
इस समझौते में लिखा गया है कि "पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाता है । इसके अतिरिक्त किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जाएगी । कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।"
06 अक्टूबर 2020 के इस समझौते पर श्री अरविंद कुमार के हस्ताक्षर हैं जिसमें पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की बात है और साफ लिखा है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। अतः उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष रहते हुए वे कैसे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर अपना अभिमत दे सकते हैं।
इसके अतिरिक्त विद्युत नियामक आयोग में दूसरे सदस्य श्री संजय सिंह उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के कर्मचारी रह चुके है। ऐसी स्थिति में पावर कॉरपोरेशन की सब्सिडियरी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट पर वे भी अपना अभिमत नहीं द��� सकते।
विद्युत नियामक आयोग में आज की तारीख में कोई मेंबर लॉ नहीं है। इस तरह विद्युत नियामक आयोग का तकनीकी दृष्टि से कोरम ही पूरा नहीं है।
ज्ञापन में कहा गया है कि इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण के किसी भी डॉक्यूमेंट पर न ही कोई अभिमत देना चाहिए और न ही को कोई मंजूरी नहीं देनी चाहिए।
पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा नियामक आयोग के सामने निजीकरण के दस��तावेज प्रस्तुत किए जाने के समाचार से प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों में गुस्सा फैल गया है। आज समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और विद्युत नियामक आयोग से मांग की कि वह पॉवर कारपोरेशन के निजीकरण के प्रस्ताव को कोई मंजूरी न दे।
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सप्ताहांत में संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री और प्रबंधन से पूछे पांच नये सवाल: 22 जून की बिजली महा पंचायत में बिजली कर्मियों के परिवार भी सम्मिलित होंगे: अवकाश के दिन आवासीय कालोनियों में सभाओं का दौर:
निजीकरण के विरोध में चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत संघर्ष समिति ने सप्��ाहांत में निजीकरण क�� लेकर ऊर्जा मंत्री और पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पांच नए सवाल पूछे हैं। 22 जून को लखनऊ में हो रही बिजली महापंचायत में बिजली कर्मियों के साथ उनके परिवार माता, पिता, पत्नी और बच्चे भी सम्मिलित होंगे।
घाटे के नाम पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है। पहला प्रश्न है - क्या यह सच है कि वर्ष 2024 - 25 में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने कई निजी घरानों ���े उत्पादन घरों से एक भी यूनिट बिजली नहीं खरीदी और इन निजी घरानों को फिक्स कॉस्ट के एवज में 6761 करोड रुपए का भुगतान किया है ? यदि यह सच है तो इतने बड़े घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
सरकारी क्षेत्र में विद्युत उत्पादन निगम से 04 रुपए 26 पैसे प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलती है और जल विद्युत की बिजली मात्र 01रुपए प्रति यूनिट की दर पर मिलती है। सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए उत्पादन निगम और जल विद्युत निगम में नए बिजली घरों की स्थापना नहीं की ।इस कारण बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर निजी घरानों से काफी महंगी बिजली खरीदनी पड़ रह��� है । दूसरा प्रश्न है- क्या यह सच है कि के एस के महानंदी से 11 रुपए 58 पैसे प्रति यूनिट, बजाज के छोटे बिजली घरों से 10 रुपए प्रति यूनिट, ललितपुर से 06.50 रुपए प्रति यूनिट,रोजा से 06.05 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है ? यदि यह सच है तो इससे होने वाले हजारों करोड़ रुपए के घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
ऊर्जा मंत्री कह रहे हैं कि सरकार ने पाया है कि निजी ��ंपनियों के पास समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर तकनीक और प्रबंध कौशल है। दिल्ली में रिलायंस बीएसईएस की दो कंपनियां बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर पिछले 23 वर्ष से काम कर रही है। 23 वर्ष काम करने के बाद रिलायंस की इन दोनों कंपनियों का बेहतर प्रबंधन कौशल यह है कि इन कंपनियों पर दिल्ली जैसे छोटे राज्य में 25000 करोड रुपए से ज्यादा का दिल्ली की पावर यूटिलिटीज का बकाया हो गया है। दिल्ली ट्��ांस्को का 10000 करोड रुपए का बकाया है, प्रगति पावर जनरेशन लिमिटेड का 5600 करोड रुपए का बकाया है और इंद्रप्रस्थ पावर जेनरेशन कंपनी का 5000 करोड रुपए का बकाया है। तीसरा प्रश्न है - क्या यह सच है कि दिल्ली की भाजपा सरकार निजी क्षेत्र की विफलता को देखते हुए बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करने जा रही है ? यदि यह सच है तो भारत की राजधानी में निजी क्षेत्र की इतनी बड़ी विफलता को देखते हुए भी उत्तर प्रदेश के बेहद गरीब 42 जनपदों पर निजीकरण क्यों थोपा जा रहा है ?
ग्रेटर नोएडा का निजीकरण 1993 में किया गया था। ग्रेटर नोएडा एक औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र है। ग्रेटर नोएडा में बिजली का लगभग 84% भार औद्योगिक और वाण���ज्यिक उपभोक्ताओं का है जिनसे मुनाफा मिलता है। ग्रेटर नोएडा में कार्य कर रही नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का घाटे वाले क्षेत्र मसलन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के प्रति बिजली आपूर्ति का व्यवहार अच्छा नहीं है। चौथा प्रश्न है - क्या यह सच है कि उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोएडा में नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कराने का मुकदमा लड़ रही है ? यदि यह सच है तो जो निजीकरण औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र में विफल हो गया है उसे पूर्वांचल और बुंदेलखंड की बेहद गरीब जनता पर क्यों थोपा जा रहा है ?
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड कई निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीद रहा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लेने के बाद यह पता चला है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ए��ं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को सबसे सस्ते बिजली क्रय करार आवंटित किए गए हैं । पांचवा प्रश्न है - यदि यह सच है तो निजीकरण के ठीक पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की सबसे सस्ते पावर परचेज एग्रीमेंट आवंटित करना क्या प्रस्तावित निजीकरण के बाद निजी घरानों की परोक्ष रूप से मदद करना नहीं है ?
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*निजीकरण के विरोध में 22 जून को होने वाली बिजली महापंचायत में किसानों और उपभोक्ताओं के बड़े राष्ट्रीय संगठन सम्मिलित होंगे: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में देश के किसानों और उपभोक्ताओं के कुछ बड़े संगठन सम्मिलित होंगे। संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली महापंचायत का ऐलान होते ही कई संगठनों ने संघर्ष समिति से संपर्क किया है। संघर्ष समिति ने आज पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं। संघर्ष समिति ने कहा है कि प्रत्येक शनिवार और रविवार को संघर्ष समिति 5 - 5 प्रश्न निजीकरण को लेकर प्रबंधन से पूछेगी।
संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है।
पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने 06 जून को चंडीगढ़ ���ें हुए विद्युत मंत्रियों के सम्मेलन में कहा है कि उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम है। सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 22 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो स���ाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ?
चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभ���क्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ?
और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं ���ो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 34 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक शनिवार और रविवार को संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी। शनिवार को आम उपभोक्ताओं के विषय में प्रश्न पूछे जाएंगे और रविवार को कर्मचारियों के विषय में प्रश्न पूछे जाएंगे।
आज अवकाश का दिन होने के कारण बावजूद बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ आपस में बैठक कर निजीकरण के विरोध चल रहे आंदोलन को और तेज और सशक्त बनाने पर विचार विमर्श किया।
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ग्रांट थॉर्टन के बारे में पॉवर कारपोरेशन की स्वीकारोक्ति से उठे बड़े सवाल : ग्रांट थॉर्टन ने सितम्बर 2024 के टेण्डर के सम्बन्ध में एकाउण्टेंट की भर्ती का विज्ञापन भी निकाल दिया था : निदेशक वित्त निधि नारंग की बर्खास्तगी की मांग :
ग्रांट थॉर्टन और निजीकरण को लेकर भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे के बाद संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि निजीकरण के मामले में इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बाद वे तत्काल हस्तक्षेप कर निजीकरण की आंड़ में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कार्यवाही करें। संघर्ष समिति ने निदेशक वित्त निधि नारंग की निजी घरानों के साथ मिली भगत को लेकर उनकी बर्खास्तगी की मांग की है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा आज देश शाम जारी किये गये प्रेस नोट को संघर्ष समिति द्वारा लगाये गये घोटाले के आरोप की पुष्टि बताते हुए कहा है कि मार्च 2024 के टेण्डर एवं निजीकरण को लेकर बड़ा घोटला सामने आया है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि ग्रांट थॉर्टन द्वारा सितम्बर 2024 के टेण्डर के सापेक्ष दिसम्बर 2024 में 19 महीने के लिए लेखाकारों की भर्ती का विज्ञापन भी निकाल दिया था। यह विज्ञापन दिसम्बर 2024 में नौकरी डॉट कॉम के पोर्टल पर निकाला गया था। संघर्ष समिति ने इस विज्ञापन का डॉक्यूमेंट जारी करते हुए कहा कि इसमें कार्य स्थल बरेली, लेसा, सीतापुर, रायबरेली, वाराणसी, आगरा, मथुरा, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, केस्को आदि उत्तर प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों के सभी वितरण क्षेत्रों का नाम लिखा है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि ग्रांट थॉर्टन और निदेशक वित्त निधि नारंग की मिली भगत नहीं थी तो किस आधार पर ग्रांट थॉर्टन ने सितम्बर 2024 में टेण्डर के सापेक्ष दिसम्बर 2024 में नियुक्तियों के लिए विज्ञापन निकाल दिया।
संघर्ष समिति न�� कहा कि आज जारी किये गये प्रेस नोट में पॉवर कारपोरेशन ने कहा है कि वर्तमान में उक्त टेण्डर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सवाल यह है कि सितम्बर 2024 के जिस टेण्डर की टेक्निकल बिड खोली जा चुकी है उस टेण्डर को 7 महीने से निदेशक वित्त निधि नारंग क्यों दबाये रहे। सवाल यह भी है कि सितम्बर 2024 के टेण्डर में ग्रांट थॉर्टन के प्रतिभाग करने की बात निदेशक वित्त निधि नारंग ने निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कसंलटेंट के टेण्डर में ग्रांट थॉर्टन क�� नियुक्ति के समय टेण्डर मूल्यांकन समिति को क्यों नहीं बताया।
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रॉलेट एक्ट 1919, ब्रिटिश सरकार द्वारा 1919 में पारित एक कानून था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में बढ़ते राष्ट्रवादी आंदोलनों को दबाना था. इस एक्ट के तहत, सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना अदालत में मुकदमा चलाए अनिश्चित काल के लिए जेल में डाल सकती थी, और उसे अपील, दलील या वकील करने का कोई अधिकार नहीं था.
रॉलेट एक्ट की भांति ही 23 मई 2025 को पावर कॉरपोरेशन अपने कार्मिकों की अनुशासन एवं अपील नियमावली 2020 में पांचवा संशोधन किया है जिसके तहत बिना किसी जांच और सुनवाई के सरकारी कार्मिकों को सीधे बर्खास्त किए जाने क��� प्रावधान किया है जो कि संविधान की मूल भावना एवं नेचुरल जस्टिस के सर्वदा विपरीत है, इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य चुनिंदा पूंजीपतियों को बिजली विभाग की सारी कीमती जमीनें और सरकारी संपत्तियों को कौड़ियों के भाव हस्तांतरण करने के विरोध में उठ रही लोकतांत्रिक आवाजों को कुचलने का प्रयास है।
पिछले 6 महीने से बिजली कर्मचारियों का निजीकरण के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी है। पावर क���रपोरेशन का प्रबंधन दमनकारी नीति अपनाकर बलपूर्वक निजीकरण के विरोध में उठ रही लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास कर रहा है और आजाद भारत में पावर कॉरपोरेशन का प्रबंध अंग्रेजों की तरह दमनकारी नियम बनाने में लगा है ,परंतु बिजली कर्मी किसी भी प्रकार की धमकी और दमनकारी नियमों से डरने वाले नहीं है।
जन विरोधी बिजली के निजीकरण से बिजली के दामों में बेहताशा वृद्धि होगी, किसानों को मिल रहे मुफ्त बिजली समाप्त हो जाएगी, बिजली व���भाग में सरकारी नौकरी के सपने देख रहे युवाओं के सपने खत्म हो जाएंगे, दलित और पिछड़े वर्ग को मिल रहे आरक्षण की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी, बिजली एक आवश्यक सेवा की जगह व्यापार बन जाएगी और गरीब की पहुंच से बाहर हो जाएगी। बिजली के निजीकरण से सिर्फ चुनिंदा पूंजीपतियों को फायदा होगा और किसी को नहीं।
जब तक बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त नहीं होता बिजली कर्मचारियों का संघर्ष जारी रहेगा। कल 24 मई क��� पूरे प्रदेश में पावर कारपोरेशन ने बनाए काले कानून की प्रतियो को जलाकर दमनकारी नियमों का जबरदस्त विरोध किया।
शहीद ए आजम भगत सिंह ने कहा था -" उसे फिक्र है हरदम नया तर्ज ए जफा क्या है। हमेशा शौक है, देखें तो सितम की इंतिहा क्या है"।
उत्तर प्रदेश की जनता एवं माननीय जनप्रतिनिधियों से अनुरोध है सरकारी विभागों और संपत्तियों को बचाने में बिजली कर्मचारियों को अपना साथ दें।
माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है की व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त किया जाये।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया जी कहते थे कि “अगर सड़कें खामोश हो जाएं तो संसद आवारा हो जाएगी।” आज उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों ने बिजली के निजीकरण क��� विरोध में लखनऊ की सबसे ऐतिहासिक शांतिपूर्ण रैली कर सड़क की खामोशी को तोड़ने का काम किया है। क्योंकि बिजली के निजीकरण से सिर्फ चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जाएगा, जनता की जेब पर डाका डाला जाएगा, कर्मचारियों को बाहर निकल जाएगा, सरकारी नौकरी के सपने देख रहे युवाओं के सपनों को चकनाचूर किया जाएगा, आज बिजली जन-जन की आवश्यकता है आवश्यक सेवा है उसे लग्जरी बनाकर व्यापार कराया जाएगा, गरीब की पहुंच से बिजली को बाहर किया जाएगा, किसान बिजली के लिए तरस जाएगा। पूंजीपति सिर्फ अपना मुनाफा कमायेगा।
इसलिए माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि बिजली के निजीकरण के नाम प��� हो रहे महा घोटाले को रोका जाए और जन विरोधी, किसान विरोधी, गरीब विरोधी, आरक्षण विरोधी, युवा विरोधी, कर्मचारी विरोधी बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को व्यापक जनहित में निरस्त किया जाए।
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