@_KhAyAl_PArijAt मरुस्थल बनने से पहले एक बार आकाश की ओर देखना। हो सकता है, कोई बादल बनकर तुम्हारे ही ऊपर ठहरा हुआ मिले... जीवन, प्रेम और प्रतीक्षा.. यूं ही खत्म नहीं होने चाहिए।
है समय छिछला, बहुत ओछा, नशे के ज्वार जैसा
स्वप्न मेरा गुरु-गहन है जागरण के सार जैसा
मुक्त, चिर निर्बंध में मेरे उदय की भव्यता हो
इन घृणा के कंटकों में तुम दया की दिव्यता हो।
#cp
कुछ ऐसे विचार
जो संभवतः
आपकी सोच में बने हों
कुछ ऐसे शब्द
जिन्हें कदाचित्
आप लिखना चाहे हों
ऐसी अनुभूतियाँ
जो आपको
मेरा काव्य पढ़कर हों
तो स्वयं को खोजिए
'प्रेयसी' में
जो न व्यक्त अक्सर हों... 🎭
#काव्याक्षरा🖊️
#प्रेयसी_दिनकर_की📖
जानती हो! मेरा हर बसंत बस तुमसे है।
भींगे खुले बाल..कत्थई और पीली चूनर ओढ़े, फुलवारी के बीच.. किसी हल्की सर्द सुबह में खिंचवाई गई तुम्हारी वो तस्वीर मैं अक्सर घंटो निहारता हूं। मन उछाह से भर जाता है। मन को हजारों बसंत एक बार में छू जाते हैं।
शुभकामनाएँ। 💛💛💛
आज नए वर्ष का पहला दिन था।
सभी लोग खुशियां मना रहे थे लेकिन मैं पूरे दिन सोया रहा। ना जाने क्यों अब मुझे इन सब चीजों से चिढ़ सी होने लगी है। शाम में मम्मी मेरे कमरे में आई और मुझे सोता देख "अरे तुम सोया हुआ है? मुझे लगा कहीं गया होगा..!" तब जाकर शाम में नहाया हूं।