राजस्थान के जालौर में कार्यरत आदिवासी चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार मीणा के साथ पहले अस्पताल में मारपीट और जातिगत उत्पीड़न हुआ। SC/ST Act के तहत FIR दर्ज होने के बाद भी उन्हें FIR वापस लेने के लिए फिर से धमकाया गया। घटना के 8 दिन बाद भी आरोपी खुले घूम रहे हैं। क्या कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है? हम मांग करते हैं कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित डॉक्टर को सुरक्षा प्रदान की जाए।
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जब मंदिरों के लिए बजट उपलब्ध हो सकता है, तो एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए पर्याप्त बजट क्यों नहीं? शिक्षा पर निवेश ही देश का भविष्य तय करता है।
दलित के घर में लगाई आग। 😡
यूपी के पीलीभीत में जातिवादी दंभ से ग्रसित भानुप्रताप और उसके परिजनों ने दलित परिवार के घर में आग लगा दी है। घर में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया।
अत्यंत भयावह! गुंडों पर NSA के तहत कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार के एक लड़के पर हमला भी किया गया है।
बाड़मेर, राजस्थान में गरीब आदिवासी परिवारों की झोपड़ियाँ बुलडोज़रों से तोड़ी जा रही हैं। महिलाएँ, बच्चे खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हैं। यदि प्रशासन इन बस्तियों को अतिक्रमण मानता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कहाँ है?
क्रिकेटर बना सीरियल रेपिस्ट। 😡💔
यूपी के मुजफ्फरनगर का सतपाल उर्फ सत्तू एक क्रिकेटर था। गेंदबाजी में उसने कई पुरस्कार भी जीते थे। 1996 में तो वह युवराज सिंह के साथ दो रणजी मैच खेल चुका था।
2007 में सतपाल चंडीगढ़ में पार्षद बना। इसके बाद वह धीरे-धीरे अपराध के रास्ते पर चल पड़ा। उसने मुजफ्फरनगर में अपना गिरोह बनाया, कई हत्याओं को अंजाम दिया और धीरे-धीरे छोटा राजन से जुड़ गया। सतपाल जेल में रहते हुए भी क्रिकेट खेलता था। वहीं से उसने कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दिलवाया। जेल से बाहर आने के बाद 2024 में उसने अपनी पत्नी के बॉयफ्रेंड की हत्या कर दी।
अब तक सतपाल का खौफ काफी बढ़ चुका था। 2026 में वह लुधियाना जेल से फरार हो गया और इसके बाद उसने सीरियल रेपिस्ट का रूप धारण कर लिया। वह रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और धार्मिक स्थलों पर जाकर नाबालिग लड़कियों से बातचीत करता था। खुद को फौजी बताकर वह उन्हें नौकरी दिलाने का झांसा देता और अपने जाल में फंसा लेता था।
जब लड़कियां उसके झांसे में आ जाती थीं, तो वह डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बहाने उन्हें यूपी से पंजाब ले जाता था। वहां उनका अपहरण कर उनके साथ दुष्कर्म करता था। यह दरिंदा इतना हैवान था कि वह लड़कियों के हाथ-पैर हथकड़ियों से बांधकर उन्हें हंटर से पीटता था। जब उसका मन भर जाता, तो वह उन्हें किसी बस स्टैंड पर छोड़कर फरार हो जाता था।
उसने अब तक कई ऐसी वारदातों को अंजाम दिया, लेकिन पुलिस बेखबर बनी रही। चार राज्यों की पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। एक बार तो एक पीड़िता किसी तरह चलती कार से कूदकर अपनी जान बचाने में सफल हो गई। भीड़ ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले भी कर दिया था, लेकिन परिजनों ने लोकलाज और भय के कारण कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने भी केवल शांतिभंग की कार्रवाई कर उसे छोड़ दिया। हालांकि बाद में कुछ पीड़ित लड़कियां सामने आईं और उन्होंने अपनी आपबीती बताई।
जब मामला मुजफ्फरनगर के IPS अमृत जैन के संज्ञान में आया, तो उन्होंने गहन जांच कराई और इसकी पूरी कुंडली निकाली। जांच के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी। अंततः 23 जून को हुई एक पुलिस मुठभेड़ में दरिंदा मारा गया।
मुर्दा समाज। 💔
मुंबई की एक ट्रैन में बारिश में दरवाजे खुले रखने को लेकर हुए विवाद में रोशन सुवर्णा नामक हैवान ने चाकूओं से वार करके मयंक लोहार की हत्या कर दी। भीड़ देखती रह गई।
अभी यहीं अगर कोई कपल आपस में प्रेम से खड़े भी होते तो इनकी संस्कृति आहत हो जाती और उस पर टूट पड़ते।
बाड़मेर में गरीब भील आदिवासी परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए गए, महिलाएँ और बच्चे खुले आसमान के नीचे आ गए। भजनलाल सरकार बताए कि घर तोड़ने से पहले इन परिवारों के रहने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
नन्ही बच्ची की निर्मम हत्या। 💔
दिल्ली में बबलू सिंह नामक हैवान ने गुब्बारा बेचने वाली एक बच्ची को अगवा किया, उसका रेप किया और फिर उसकी जघन्य हत्या करके जंगलों में फेंक दिया।
बच्ची का परिवार मजदूर है। गरीबी के चलते फुटपाथ पर सोने को मजबूर थे। इस हैवान से उनकी दुनिया उजाड़ दिया।
अछूतों का जीवन। 💔
यूपी, सीतापुर में एक गांव में 400 से अधिक लोग रहते हैं। वैसे तो सरकारी कागजों में उनके लिए सड़क पास है लेकिन उस पर दबंगों का कब्ज़ा था। वे रोड बनने नहीं देते थे।
अब आजादी के 79 साल बाद उनके लिए सड़क नहीं बन सका है। दलितों को आज भी अछूत बनाकर रखा गया है।
घोड़ी से तेरा रिश्ता क्या?
MP के छतरपुर में एक दलित की शादी में घोड़ी चढ़ने पर गाँव के कुछ ब्राह्मणों व ठाकुरों को आपत्ति थी। अतः दलित परिवार की शादी पुलिस सुरक्षा में कराई गई।
इन लफंगों का जातीय दंभ छुईमुई के समान है। अगर कोई दलित घोड़ी चढ़ जाए तो इनका पूरा सिस्टम हिल जाता है।
जब आदिवासी, दलित, महिलाओं के मानवाधिकारों का खुलेआम हनन होता है और महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती, तब सवाल उठना स्वाभाविक है कि महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग आखिर किसके लिए हैं?
NEET का पेपर वायुसेना की भारी सुरक्षा में पहुँचाया जा रहा है। यह शिक्षा व्यवस्था की मजबूती नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्रालय की विफलता का प्रमाण है। जब प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए सेना का सहारा लेना पड़े, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। आखिर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कब होगा?