हमने उनके दुख भी बांँटे और हमीं आभारी थे,
मानवता के कीट हमारे ज़ह्नो-ओ-दिल पर तारी थे।
आज समय ने कष्ट दिये जब तब यह बात समझ आयी,
हम जिनको अपना कहते थे सब के सब व्यापारी थे।
~ नीरज शर्मा
सत्य-शिव-सुंदर हमारी लेखनी का लक्ष्य हो.
श्रेष्ठ मूल्यों की सतत संस्थापना करते रहें..
युद्ध से निरपेक्ष मत को विश्व-अनुमोदन मिले,
मानवी कल्याण की प्रस्तावना करते रहें..
अक्षरों की अर्चना
आयु भर हम अक्षरों की अर्चना करते रहें.
छंद में ही काव्य की नव सर्जना करते रहें..
स्वर मिले वह साँस को, हर कथ्य जो गाकर कहे.
ज़िंदगी के सुख-दुखों की व्यंजना करते रहें..
वक्ष का रस-स्रोत सूखे दिग्दहन में भी नहीं.
नित्य नीरा वेदना की वन्दना करते रहें..
जो भविष्यत् में कभी भी ठोस रूपाकार ले.
सत्य के उस स्वप्न की हम कल्पना करते रहें..
रम्य प्रियदर्शी रहे, हो रूप में रति भी सहज.
प्रेम हो शुचि काम्य जिसकी कामना करते रहें..
दे नयी उद्भावनाएँ, प्राण ऊर्जस्वित रखे.
हम प्रणत हो प्रेरणा की प्रार्थना करते रहें..
@JaikyYadav16 वो रावण था मगर भगवा पहन के आया था,
सो हमने सनातनी समझ के सर झुकाया था।
कितना अरे कितना गिरेगा इंसान की औलाद,
जो सबको कहा है मां बाप को भी बताया था ?
✍🏻 दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@JaikyYadav16 वो रावण था मगर भगवा पहन के आया था,
सो हमने सनातनी समझ के सर झुकाया था।
कितना अरे कितना गिरेगा इंसान की औलाद,
जो सबको कहा है मां बाप को भी बताया था ?
✍🏻 दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@JaikyYadav16 वो रावण था मगर भगवा पहन के आया था,
सो हमने सनातनी समझ के सर झुकाया था।
कितना अरे कितना गिरेगा इंसान की औलाद,
जो सबको कहा है मां बाप को भी बताया था ?
✍🏻 दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@chaigaliyara दुनिया जैसी दिखती वैसी होती नही,
होती तो फिर इतनी मुश्किल होती नही।
बातें झूठी चेहरा झूठा और लिबास सुनहरा,
हाय हमारी आंखें अब तक फूटी नही।
✍️दशरथ रांकावत 'शक्ति'
अब तो मिल-जुल के परिंदों को रहना होगा,
जितने तालाब हैं सब नील-कमल वाले हैं
यूँ भी इक फूस के छप्पर की हक़ीक़त क्या थी
अब उन्हें ख़तरा है जो लोग महल वाले हैं