माननीय मुख्यमंत्री जी और संबंधित अधिकारियों से अनुरोध है कि DTC कर्मचारियों की सैलरी की समीक्षा की जाए। हम प्रतिदिन लाखों यात्रियों की सेवा करते हैं। बढ़ती महंगाई में वर्तमान वेतन पर परिवार चलाना कठिन है। कृपया इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लें। #DTC#Delhi#SalaryRevision
नितिन गडकरी कहेंगे ये #AI वीडियो है ?
या देशविरोधी लॉबी जानबूझकर सड़कों को धंसा रही है।
मैं भी कहता हूँ इस गाड़ी वाले पर मानहानि का मुकदमा करना चाहिए। 🙂
मेघा प्रसाद -- टोल पर MP -MLA को छूट क्यों है ?
गडकरी -- वो छूट पहले से है
मेघा -- तो आप बंद करिए
गडकरी -- मैं क्यों बंद करूं..? MP -MLA लोकतंत्र का हिस्सा है
मतलब लोकतंत्र का हिस्सा केवल MP -MLA है जनता नहीं ...🤔
"We don't want Phunsukh Wangdu to die."
ऐसे समय में जब ज़्यादातर बड़े फ़िल्मी सितारे और नामचीन सेलिब्रिटी चुप हैं, 3 Idiots में चतुर का किरदार निभाने वाले ओमी वैद्या की यह अपील और भी ज़्यादा मायने रखती है।
जब देश का एक सम्मानित नवप्रवर्तक 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठा हो, तब चुप्पी भी एक संदेश देती है। लगता है कि सत्ता के सामने सच बोलने का साहस धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
ऐसे दौर में वही लोग याद रखे जाते हैं जो डर या सुविधा नहीं, बल्कि इंसानियत के साथ खड़े होने का फैसला करते हैं। सोनम वांगचुक के लिए उठी यह आवाज़ सिर्फ़ एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवाद की संस्कृति के लिए भी है।
IIT कानपुर में प्रोफेसर रह चुके और पर्यावरण कार्यकर्ता GD अग्रवाल ने गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकार की लापरवाही के विरोध में 111 दिन तक आमरण अनशन किया था।
111 दिन अनशन पर रहने के बाद ही 2018 में उनकी मृत्यु हो गई थी न सरकार ने उनकी मांग को माना न ही मीडिया ने उनके प्रदर्शन को कवर किया था।
अब इसी राह पर सोनम वांगचुक चल रहे हैं सरकार इनकी भी मांग को नहीं मानने वाली है और सोनम को आमरण अनशन छोड़ देना चाहिए— इनकी जान एक इस्तीफे से बढ़कर है।
और धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा लेकर भी क्या ही हासिल होगा— उनकी जगह कोई भी मिनिस्टर आए सिस्टम ऐसे ही चलता रहेगा।
समस्या का हल सिर्फ प्रधान जी का इस्तीफा नहीं है।