साहिल की FIR दर्ज न होने देने का एक ही मतलब है -
नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर खुलेआम पैलेट गन चलाई जा सकती है, मगर उन्हें इंसाफ नहीं मिल सकता।
जब तक FIR दर्ज नहीं होती, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता - हम डटे रहेंगे।
लक्ष्य न्याय है और वो हर हाल में लेकर ही रहेंगे।
मुख्यमंत्री @Dev_Fadnavis जी,
महाराष्ट्र के अनेक आदिवासी छात्र 10 दिनों से अधिक से अपने अधिकारों के लिए भूख हड़ताल पर हैं।
पुणे में 'छात्रों की गूंज' के दौरान छात्राओं ने बताया कि छात्रावासों में 30 वर्ष की अनावश्यक उम्र सीमा, अपमानजनक नियम, असुरक्षित सुविधाएं और महिलाओं के लिए गर्भावस्था जांच जैसे अमानवीय प्रावधान लागू हैं।
सुदूर गांवों-कस्बों से आने वाले ये छात्र कोई दान नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं। अपेक्षा है कि आप उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करेंगे।
Women are the strength of India - its foundation, its present, and its future.
You belong to no one but yourself.
Be loud. Be proud. Fight for your space.
Smash the patriarchy!
#ChhatronKiGoonj
झारखंड के छात्रों और राज्य सरकार के बीच सहमति बनी, और छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की - यह ख़बर सुनकर बहुत खुशी हुई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी और झारखंड सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना, और समाधान निकाला। छात्रों ने संयम रखा, और अपनी बात मनवाई।
यही सही तरीक़ा है - छात्र सवाल पूछें, तो जवाब मिलना चाहिए।
हम देश के हर छात्र के साथ खड़े हैं। और हम इस वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे - ताकि हर छात्र को उसकी मेहनत का पूरा फल और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का हक़ मिले।
पूरे देश में ये system बदलेगा - अब ऐसी व्यवस्था बनेगी जो छात्रों को आगे बढ़ाए, उन्हें पीछे न खींचे।
मोदी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि “दिल्ली पुलिस की तारीफ करनी चाहिए।”
संसद से आधा किलोमीटर दूर, शांतिपूर्ण छात्रों पर पैलेट गन चली, कील लगी लाठियाँ चलीं, एक बच्चे की आँख चली गई, एक बच्ची का कान कट गया। इस बर्बरता की तारीफ करनी चाहिए?
मैं ख़ुद उन घायल बच्चों से मिला हूँ। हज़ारों वीडियो देश ने देखे हैं।
इस सरकार का मूल मंत्र ही असत्य और हिंसा है। पहले बच्चों पर लाठी चलाओ, फिर बोल दो कि कुछ हुआ ही नहीं।
पूरे सत्र “लापता” अमित शाह विपक्ष से भागते रहे। और प्रधानमंत्री ने आज तक छात्रों से माफ़ी नहीं माँगी।
सच्चाई यह है कि इस देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा यही दिमाग से खाली लोग हैं - जिन्हें न अपनी ग़लती दिखती है, और दिखने पर मानते नहीं।
देश के बच्चों से झूठ मत बोलिए। उनके पास आँखें हैं और याददाश्त भी।
केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासी भाई-बहनों की समस्याएं, मांगें, संघर्ष और आपबीती - उनकी जुबानी।
सालों से सिर्फ़ अपने अधिकारों के लिए अन्याय और अत्याचार सह रहे ये बुंदेलखंड निवासी सम्मान और समर्थन के हक़दार हैं।
आदिवासी भाई-बहनों की इस लड़ाई में, मैं और कांग्रेस उनके साथ हैं।
भारतीयों के बीच सद्भावना, हर दिल में करुणा और, हर नागरिक को न्याय और लोकतंत्र में समान अधिकार..
पापा, आपकी ये सीख मेरी शक्ति है और आपकी यादें मेरी हिम्मत। आपके सपनों का भारत बनाने का संकल्प हमेशा मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा।
एक भारतीय महिला होने का क्या मतलब है?
मैं जानना चाहता हूँ कि आप क्या महसूस करती हैं।
समाज की नहीं, परिवार की नहीं - आपकी अपनी आवाज़ क्या कहती है?
आपके संघर्ष, आपकी रुकावटें, आपका नज़रिया और आपके सपने।
आपकी कहानी क्या है? सबसे जवाब की उम्मीद कर रहा हूं।
22 अगस्त | महिला विशेष महारैली
📍AISSMS कॉलेज ग्राउंड, पुणे
#ChhatronKiGoonj
आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी बर्बरता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, एक गंभीर अपराध है। इस क्रूरता के लिए न गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को कोई सफाई दी, न प्रधानमंत्री ने उनसे माफ़ी मांगी।
अब जब साहिल न्याय के लिए FIR दर्ज कराना चाहता है तो वो भी नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह संविधान और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।
@AmitShah जी, न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं? ये डर दिखा रहा है कि आप अपना अपराध कबूल कर रहे हैं।
FIR होगी। न्यायिक जाँच होगी। और ऊपर से नीचे तक जो भी इस बर्बरता के दोषी हैं, उन सभी पर कार्रवाई होगी।
साहिल और उसके जैसे पीड़ित हर छात्र को न्याय दिलाकर रहेंगे।
साहिल की FIR दर्ज हुई। यह न्याय की तरफ़ पहला क़दम है।
पर सोचिए - एक FIR लिखने की इजाज़त तक गृह मंत्रालय से आनी पड़ी। अब समझ आया कि न्याय पर लगाम किसने लगा रखी है।
सोचिए... बच्चों के सिर पर छत नहीं, स्कूलों में शिक्षक नहीं, 12वीं तक के स्कूल में 1 भी लेक्चरर नहीं! शिक्षा मंत्री मदन दिलावर RSS के एजेंट बनकर सुनियोजित तरीक से शिक्षा और उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर को चौपट करने में लगे हैं।
ये ऐसे हालात बना देना चाहते हैं कि बच्चे मजबूरन सरकारी स्कूल छोड़ दें, और महंगी फीस के कारण निजी स्कूलों न जाकर RSS के सरस्वती शिशु मंदिर और आदर्श विद्या मंदिर में जाएं और वहां नफरत सीखें।
ये केवल टोंक के इलाहीपुरा और बाड़मेर के गंगाला रामसर के सरकारी स्कूलों का मामला नहीं हैं... पूरे प्रदेश के यही हालात हैं। शिक्षा मंत्री एक तरफ आरएसएस का एजेंडा और तबादला उद्योग चला रहे हैं... और दूसरी ओर कांग्रेस विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में द्वेषतापूर्वक शिक्षकों के ट्रांसफर करके शिक्षक विहीन स्कूलें बना रहे हैं।
सोचिए.. राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को किस गर्त में धलेका जा रहा है।
राजस्थान कांग्रेस का कार्यकर्ता दिल्ली की हुकूमत को झुकाने के लिए तैयार हैं
नेता विपक्ष @RahulGandhi जी का बब्बर शेर कार्यकर्ता दिल्ली को घेरने और छावनी बनाने का दम रखता है।
Mama,
I last saw you and Papa together more than 35 years ago. Since the day Papa left, I have watched you face everything life threw at you with never-ending courage and dignity. Only Priyanka and I really know what you have been through, and how difficult your life after Papa truly was.
I am happy, and so proud, that your story - “Belonging: A Journey of Love” - will finally be read by the millions of people who love you. I know how hard it was for someone as private as you to tell the world your beautiful story.
Today, on his birthday, I can see Papa smiling and looking down proudly at his beautiful Sonia.
Love,
Rahul