@fika5656@rahulgaikwad02 Yes, but there’s one condition: it has to be someone “born from the mouth” mukhputra who drinks cow urine and eats cow dung and is considered pure.And they must clean it by licking it.
भीमामुळे बदलली रे जिंदगी,
हे खास इस्त्रीचे कपडे, त्याला अत्तराचा वास.
Last Evening!!
When entrepreneurs and business personalities from Canary Wharf, London come together, the conversations naturally go far beyond business.
It was a wonderful evening filled with meaningful discussions from geopolitics and global markets to entrepreneurship, international experiences, family, and the realities of doing business across different countries.
Great times, great people, and hopefully many more such evenings on the way.
@Prksh_Ambedkar
चारों हेडिंग पढ़िए और फिर आकलन करिए क्या @BhimArmyChief बीजेपी के हनुमान नहीं है ?
दिल्ली जंतर मंतर पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर भाषण देना और अभी हाल ही में छत के ऊपर बैठकर स्टंट करना ���ह बिना सरकार के इशारे पर हो रहा है ?
NBW के बाद भी गिरफ्तारी क्यों नहीं ?
@Advt_Arvind
अपने हक की लड़ाई में अब झिझक कैसी? जो आग और जज़्बा @rahul में दिख रहा है, वही चेतना हर दलित और पिछड़ा वर्ग के युवा में जगनी चाहिए।
आरक्षण के मुद्दे पर बैकफुट पर खेलने की ज़रूरत नहीं है। बाबा साहेब के दिए संविधान और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आक्रामक और लामबंद होना सीखिए!
#EqualRights #SocialJustice #BahujanPower
“हम RSS-BJP को वैसा ही सबक सिखाएंगे जैसा हमने 1988 में शिवसेना को सिखाया था, जब शिवसेना ने बाबासाहेब की लिख��� किताब रिडल्स इन हिंदूइज्म का विरोध किया था।”
यह साफ़ है कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये साज़िश रची गई थी। बाद में, इस पोस्ट का इस्तेमाल बाबासाहेब अंबेडकर और ज्योतिबा फुले के एकेडमिक मटीरियल और साहित्य की आधिकारिक जाँच शुरू करने के लिए किया गया। और इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि इसका इस्तेमाल उन कोर्स को पढ़ने वाले छात्रों की पहचान करने के लिए किया गया।
RSS-BJP हमेशा से बाबासाहेब के विचारों के ख़िलाफ़ रहे हैं जिनमें उन्होंने ब्राह्मणवादी सोच और जाति-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
1987 में, शिवसेना और दूसरे राजनीतिक संगठनों ने 'रिडल्स इन हिंदूइज़्म' के प्रकाशन का विरोध किया था। तब भारिप समेत अंबेडकरवादी संगठनों ने 1988 में शिवसेना के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त जवाबी विरोध-प्रदर्शन किया और उन्हें ऐसा सबक सिखाया जिसे वे आज भी नहीं भूले हैं।
अगर RSS-BJP अपनी हिटलर जैसी और फुले-शाहू-अंबेडकर विरोधी नीतियों को बंद नहीं करते हैं, तो हम पूरे देश में आंदोलन शुरू करेंगे और ज्योतिबा फुले और बाबासाहेब अंबेडकर के साहित्य का बड़े पैमाने पर पब्लिक रीडिंग आयोजित करेंगे।
Sahil Wakode’s parents have been on hunger strike for 5 days demanding justice for their son, yet the Brahmanical system remains unmoved. How long will Dalit families be forced to beg for justice? Hold every authority accountable. Stop protecting caste power. This silence exists because of casteism.
#JusticeForSahil
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री,
भविष्यातील बहुजन विद्यार्थ्यांमध्ये भीती आणि दबावाचे वातावरण न���र्माण होण्याची शक्यता आहे. विद्यार्थी जर अशा दबावाखाली शिक्षण घेऊ लागले, तर त्याचे नुकसान केवळ एका विद्यार्थ्याचे किंवा एका ��ुटुंबाचे नसून संपूर्ण देशाचे असेल @Prksh_Ambedkar @rahulgaikwad02
आकाश आनंद ने इस ट्वीट में बहनजी से माफी मांग ली है और कहा है कुछ गलतफहमी हुई थी।
इस समय युवा नेताओं की सबसे ज्यादा जरूरत है सभी दलों को और हम जैसे युवाओं को भी।
आकाश तो हम GenZ को इसलिए भी अपने लगते हैं क्योंकि इसी उम्र के हैं।
बहनजी @mayawati इस बार मौका देती हैं तो @AkashAnandBSP जी पूरी तबियत से मुद्दा उठाइएग��� हमारे रोजगार का।
हर्ष यादव नाम का रिपोर्टर चिल्ला चिल्लाकर कह रहा है मेरे पास प्रेसकार्ड है मुझे क्यों डिटेन कर रहे हो।
शिकायत है कि गोदी मीडिया को गेस्ट ट्रीटमेंट दिया जा रहा है और इंडिपेंडेंस यूट्यूबर्स को भगाया जा रहा है ��ा डिटेन किया जा रहा है।
ये न्यू इंडिया है।
"Privatisation without reservation is discrimination by design."
Stand up for equality in the private sector with AIISCA today.
📍 Dr. BR Ambedkar Bhavan |
🕒 3:00–6:00 PM
आर एस एस से जो मिलता है उसके साथ ये सब होता है|
१) सहारा -पहले छोटे बड़े पद या नेता बनाया जाता है
२) ईशारा -उसके हिसाब से काम करवाया जाता है
३) किनारा -अगर पता चला कुछ काम नही तो किनारा किया जाता है
४) नकारा-अब ऐसे स्थिती में वो न समाज का रहता है नाही न जिन्होंने बनाया
अररर आडवाणी आणि सुब्रमण्यम स्वामी एलियन होते जे ईवीएम च्या विरोधात न्यायालयामध्ये गेले होते?
सत्तेत काँग्रेस होती.
कांग्रेस - बीजेपी संगतमताने निवडनुक मैनेज करून सत्ता बदलत आले आहेत,पण गफलत ही झाली नरेंद्र मोदी यांना चटक लागली सत्तेची ते काय जाई नाही.😅
•EVM नसताना काॅग्रेसने जिंकलेल्या जागा:
1984-414 जागा
1957-371 जागा
1951-364 जागा
1962-361 जागा
1980-353 जागा
•EVM असताना काॅग्रेसने जिंकलेल्या जागा:
2004-145 जागा
2009-206 जागा
2014-44 जागा
2019-52 जागा
2024-99 जागा
आता लक्षात आले,काॅग्रेसला EVM कां नको?
बेट्या तू मुख्यमंत्री देवाभाऊ वर वैयक्तिक जाऊ नको,बाजार उठलं.
असेच शरद पवार जातीवर गेले होते आज त्यांचा बाजार उठला आहे,उद्धव ठाकरे आई वडिलांवर गेले होते त्यांचा बाजार उठला आहे.
आदित्य ठाकरे मिमिक्री करत होता,त्याचा मागेच बाजार उठवून दिला,बाकी ते पुन्हा येईल च,तर २०२९ ला देवाभाऊ पुन्हा येणार.
@abhijeet_dipke@OfficeofUT@PawarSpeaks@Dev_Fadnavis
आकाश आनंद को फिर से पार्टी में वापस लेना नहीं चाहिए मायावती जी को क्योंकि
यह ��सपा में संघर्ष कर रहे युवाओं का अपमान
होगा पार्टी का उत्तराधिकारी कोई परिवार के
बाहर का होना चाहिए जो खुद गरीबी देखा हो
वही सच्चे मन से गरीब दलित के लिए संघर्ष कर सकता है
यह अरबपति व्यापारी हैं
हमारा शेर @AnandAkash_BSP फिर से जबरदस्त वापसी करने वाला है।
विरोधियों सावधान हो जाओ शेर दो कदम पीछे जाता है क्योंकि उस��� शिकार को सावधानी पूर्वक दबोचना होता है...
और जिसकी मां बहन खुद शेरनी हो उसे किसी और से शिक्षा लेने की जरूरत नहीं है यह साबित करदिया। 🔥🔥
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्श�� में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में ��हीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।