📍 स्थान: नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, मछ टोली, बलहा गाँव, बिस्फी प्रखंड, मधुबनी (बिहार)।
जब सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका ( Headmaster) ही बुनियादी सवालों का जवाब नहीं दे पाती, तो सवाल किसी एक शिक्षक का नहीं, पूरी भर्ती, प्रशिक्षण और जवाबदेही की व्यवस्था का है।
गांधी और अंबेडकर के भारत का सपना बताकर नेताओं ने हमें कैसा झुनझुना पकड़ा दिया है, ज़रा इस वीडियो को देखकर समझिए।
और यह कोई अकेला मामला नहीं है। एक के बाद एक ऐसे कई महान शिक्षक आपको देखने को मिलेंगे, जिन्हें सरकारी मान्यता भी प्राप्त है।बच्चों का भविष्य नारों से नहीं, योग्य शिक्षकों से बनता है। शिक्षा में हर समझौते की कीमत पूरी पीढ़ी चुकाती है।
झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जो छात्र आंदोलन कर रहे हैं, वह सिर्फ़ अपने रोजगार के लिए नहीं, बल्कि कहीं न कहीं ऐसी ही शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ़ भी एक लड़ाई है। क्योंकि अगर योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता रहा, तो आने वाले समय में हालात इससे भी कहीं अधिक भयावह होंगे।
@Lawyer_Kalpana Yes... But abhi kuch din pahle maine iska samarthan main post dale they, kuch tweet ko retweet kiya, profile pic bhi change ki..aur fir Mera account suspend ho gaya.. badi mushkil main unsuspend hua.
@rishibagree Two major reforms for nation building only
1. Reservation should be based on economic status only. Abolish caste based reservation.
2. Income tax payers should be given facilities and rebates basis the amount of tax they pay.
रिजर्वेशन को बढ़ाकर बिश्वगुरु बनने के सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन ज़रा देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत भी देख लीजिए।
बिहार के शिवहर की 20 वर्षीय रेखा कुमारी कान का इलाज कराने पटना के महावीर आरोग्य संस्थान गई थीं। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद नर्स ने नस की बजाय आर्टरी में इंजेक्शन लगा दिया। रेखा ने दर्द और तकलीफ़ की शिकायत भी की, लेकिन कथित तौर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा इन्फेक्शन इतना बढ़ा कि उनका हाथ काटना पड़ा। नवंबर में होने वाली शादी भी टूट गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि FIR दर्ज कराने गए तो पुलिस ने मना कर दिया।
सोचिए, जिस देश में इलाज कराने जाओ और इलाज के बदले अपना हाथ गंवाकर लौटो, वहाँ सिर्फ़ नारे लगाने से क्या होगा? पहले अस्पतालों में जवाबदेही, डॉक्टरों-नर्सों की जिम्मेदारी और पीड़ितों को न्याय तो सुनिश्चित कीजिए। 100 में से 99 पाने वाले घर बैठेंगे और -40 लानेवाले इलाज करेंगे तो और क्या ही उम्मीद करेंगे हम सब ।
नारों से नहीं, व्यवस्था से देश महान बनता है।
बाबा साहेब के शिक्षा के क्षेत्र में “अतुलनीय योगदान” देखिए…
बिहार की एक सरकारी शिक्षिका इंटर प्रथम श्रेणी (First Division) से पास हैं। स्कूल निरीक्षण के दौरान जब उनसे अंग्रेज़ी के महीनों के नाम पूछे गए, तो उनका जवाब सुनकर शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझ आ जाएगी।
सचमुच, शिक्षा को “नई ऊँचाइयों” तक पहुँचाने का यह Reservation मॉडल अद्भुत है।
भारत को ऐसी “महान” शिक्षा व्यवस्था देने के लिए देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
वाह @AmanChopra_ जी
पूरा Expose कर दिया
जब हर चीज जूठ के बिनाह पर बनी हो तो सवाल पूछने पर गुस्सा तो आएगा ही
जिस व्यक्ति ने हमला किया उस पर FIR होनी चाहिए