@Mayawati बीएसपी को सब से ज्यादा युवाओं की जरुरत है और युवा के साथ ज्यादा से ज्यादा जुड़े ये हम युवा लोगों को जिम्मेदारी है बीएसपी जिंदाबाद बहन जी जिंदाबाद
#Reservation
“ जो लोग इनके तथाकथित हितैषी बन रहें हैं और सरकार को इनके समस्याएं क्या है ‚ दिक्कत कहां है ‚उस पर काम करना चाहिए ”
साथ ही PDA वाले अंकल को भी अपने समाज। के लोगों से इस बारे में बात करनी चाहिए।
वोट चाहें कहीं भी डालते हो आप
पर आपकी हक की आवाज बहन जी के अलावा कोई नहीं उठाता है ये बात आप अच्छे से जानते हैं फिर जानबूझ के अगर अनजान बनाना चाहते हैं तो आपकी मर्जी है हम राजनीति में अपने फायदे के लिए नहीं बल्कि आपके हित के लिए है
बहन जी जिंदाबाद
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने मानवतावादी, कल्याणकारी व सभी जाति-धर्मों के मानने वालों को एक-समान समतामूलक अधिकार देने वाला सेक्युलर संविधान देकर पूरे देश को एक कड़ी में जोड़ कर सशक्त भारत बनाने की गारण्टी सुनिश्चित की है और इसके तहत् सभी धर्म के ग्रंथों व उनके धार्मिक रीति-रिवाज व मान्यताओं के आधार पर शान्त एवं सुखी जीवन जीने का अधिकार है, जिसकी अनदेखी करने व उसमें दख़ल देने के बजाय सभी को उसकी पवित्रता का सम्मान करना चाहिये।
2. इस क्रम में महिलाओं की अस्मिता, सम्मान व पर्दा आदि के ज़रिये अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा जैसे मामलों को उसकी उसी संवेदनशीलता से देखना चाहिये और जहाँ तक स्कूलों में यूनीफार्म, पर्दा, चादर, हिजाब आदि पहन्ने का मामला है, तो इन मामलों को ज़्यादा तूल देकर कोर्ट-कचहरी में विवाद का क़ानूनी मुद्दा बनाने के बजाय, उन्हें स्थानीय स्तर पर स्कूल प्रबंधन व शासन-प्रशासन की आपसी समझ व सूझबूझ से सुलझा लेना चाहिये ताकि किसी को भी इसकी आड़ में संकीर्ण राजनीति करने का मौक़ा ना मिल पाये।
3. जबकि बी.एस.पी. सर्वसमाज के सम्मान व उनके जान-माल व मज़हब की सुरक्षा की गारण्टी वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है और यही मानना है कि किसी भी धर्म, धार्मिक ग्रंथ व धार्मिक प्रचलन/मान्यताओं के संवेदनशील मामलों पर सभी लोग टीका-टिप्पणी करने से बचें तो यह देश व जनहित में होगा।
4. इसके साथ ही, यूपी के ज़िला बदायूँ में भारतरत्न परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जारी विवाद व तनाव की स्थिति को शासन-प्रशासन तुरन्त इसका शान्तिपूर्ण व उचित समाधान निकाले तो यह उचित होगा।
#Reservation
आरक्षण गरीबी हटाओ योजना नहीं‚
सामाजिक न्याय का साधन है।
यह आर्थिक कमजोरी नहीं‚
ऐतिहासिक सामाजिक वंचना के प्रश्न से जुड़ा है
“इसका उद्देश्य प्रतिनिधित्व और अवसरों में असमानता को कम करना है”
रही बात गरीबी हटाओ उन्मूलन की तो उसके लिए सरकारें अपनी अपनी सहूलियत के हिसाब से पॉलिसीज बगैरा चलाती हैं।
जय भीम 🌿
साधुवाद और सम्मान 🙏
बसपा की लगभग हर रैली( प्रदेश और प्रदेश के बाहर ) में अपने सीमित संसाधनों के साथ पहुंचकर खबर को जमीनी स्तर से लोगों तक पहुंचाने के आपके प्रयास को दिल से साधुवाद।।
आपका समर्पण और निरंतरता काबिल-ए-तारीफ है।
बिना किसी दिखावे के अपने काम के प्रति प्रतिबद्ध रहना ही आपकी सबसे बड़ी पहचान है।
आपकी टीम की मेहनत को सलाम 🙏
जय भीम 🌿
एक बार फिर से
@journalist_syed सर
@PKGautam0 भाई
आपका और आपकी टीम का बहुत बहुत साधुवाद ।🌹
https://t.co/F7TZjr77w5
#Reservation
VMMC–Safdarjung का 2012 मामला:
2010–2012 के दौरान दिल्ली के Vardhman Mahavir Medical College (VMMC)‚Safdarjung Hospital से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया था। मामला SC छात्रों के साथ कथित caste-based discrimination और परीक्षा में बार-बार fail किए जाने के आरोपों से संबंधित था।
रिपोर्टों के अनुसार‚ MBBS examination में 35 SC students ‘Physiology’ में fail हुए और इनमें से 25 students दोबारा उसी subject में fail हुए। छात्रों का आरोप था कि वे दूसरे subjects में पास हो रहे थे‚लेकिन Physiology में उन्हें लगातार fail किया जा रहा था।
यह मामला केवल examination result तक सीमित नहीं रहा। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के सामने अपनी शिकायतें रखीं। जब उन्हें पर्याप्त राहत नहीं मिली‚तो मामला RTI और फिर बाद में Delhi High Court तक पहुंचा।
इसके बाद Court के intervention में students की दोबारा examination कराई गई तो फिर 25 में से 24 students re-exams में पास हो गए।
यहीं से मामले पर गंभीर सवाल उठे ...???
इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए National Commission for Scheduled Castes (NCSC) की ओर से Prof. Bhalchandra Mungekar को inquiry की जिम्मेदारी दी गई।
Mungekar inquiry में VMMC में SC students के साथ discrimination के आरोपों को गंभीरता से लिया गया। रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि institutional environment और कुछ faculty/officials के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल थे।
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे केवल ‘कौन पास हुआ और कौन fail हुआ’ के रूप में नहीं देखा गया।
सवाल यह था कि क्या किसी student को उसकी caste identity के कारण academic evaluation में disadvantage किया जा रहा था?
अगर किसी particular subject में एक ही social category के students असामान्य रूप से बार-बार fail हों‚और दूसरे subjects में perform कर रहे हों और independent re-exams में अधिकांश students पास हो जाएं‚तो naturally यह सवाल उठता है कि evaluation system कितना fair, transparent and unbiased था।
इसीलिए इस मामले में केवल students के marks नहीं‚बल्कि पूरे examination process और institutional behaviour की जांच महत्वपूर्ण बन गई। Mungekar inquiry से जुड़ी recommendations में affected students के लिए compensation, जिम्मेदार अधिकारियों/faculty के खिलाफ action और SC students की grievances को effectively address करने के लिए institutional mechanism मजबूत करने जैसी बातें सामने आईं।
इस घटना से बड़ा सवाल क्या उठता है?
आज जब reservation के खिलाफ अक्सर ‘Merit’ और ‘Equality’ की बात की जाती है‚ तब ऐसे historical cases को भी समझना जरूरी है।
Reservation केवल examination और सरकारी जॉब्स में कुछ छूट देने की व्यवस्था मात्र नहीं है ....यह उस structural inequality का response है जिसमें historically marginalized communities को education‚ employment और institutions में समान अवसर तक पहुंचने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ा।
अगर किसी reputed medical institution में भी caste discrimination की शिकायत इतनी गंभीर हो सकती है कि मामला High Court और NCSC inquiry तक पहुंच जाए, तो यह समझना जरूरी है कि केवल यह कह देना कि:
“सबके लिए competition बराबर है, इसलिए reservation की जरूरत नहीं है”
पूरी social reality को explain नहीं करता।
Merit का मतलब केवल marks नहीं है।
Merit के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है
कि
•opportunity सबको बराबर मिली या नहीं
•evaluation impartial था या नहीं
• institutional environment discrimination-free था या नहीं
• historically disadvantaged students को वास्तव में समान अवसर मिला या नहीं।
VMMC‚Safdarjung का यह प्रकरण इसी बड़े सवाल की ओर ध्यान खींचता है।
Equality का अर्थ केवल एक जैसा treatment नहीं है बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना भी है जिसमें discrimination और historical disadvantage के कारण कोई व्यक्ति पीछे न रह जाए। और शायद इसी वजह से reservation पर बहस करते समय केवल “Merit vs Reservation” की binary बनाना पर्याप्त नहीं है। हमें यह भी पूछना चाहिए
‘Merit तय करने वाली व्यवस्था खुद कितनी neutral और discrimination-free है?’
जय भीम 🌿
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@drjayeshkr@dr_adrenaline19
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालाँकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गाँधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज़ नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहाँ पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।
मत छीनो सहारा उस हाथ से‚
जो सदियों से दबा रहा है।
आरक्षण भीख नहीं‚ हक है‚
जो बराबरी तक ले जा रहा है।
जिसने झेली है सदियों की मार‚
जिसे मिला ना कभी अधिकार।
उसे अगर आज मौका मिला‚
तो क्यों तुम्हें होने लगी तकरार?
ये कुर्सी नहीं‚सम्मान की लड़ाई है‚
ये पिछड़ेपन से उठने की दुहाई है।
जब तक जाति का भेद मिटा नहीं‚
तब तक आरक्षण का काम घटा नहीं।
कहते हो योग्यता घटती है इससे‚
सोचो योग्यता को रोका किसने ?
मंदिर में‚ नौकरी में‚ सत्ता में‚
पहले कब मौका दिया था जिसने ?
गरीबी देखकर नहीं‚
भेदभाव देखकर बना‚
ये कानून किसी को
रुलाने को नहीं बना।
जब सबको एक लाठी से हाँका जाएगा‚
तब कैसे सबका साथ निभाया जाएगा?
आरक्षण हटाना हल नहीं‚
‘जातिवाद’ मिटाना हल है।
जब ‘सबको’ एक समान समझोगे‚
तभी तो देश सफल है।। 🥀
✍️ अज्ञात
नमोबुद्धाये जय भीम 🌿
जय संविधान ✨
1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी माँगनी चाहिये तो यह उचित होगा।
2. वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।
3. इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में श्री मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ।
और फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ वाली पार्टी बी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।
4. अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।
5. इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं।
6. इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहिन-बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यू.पी. आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।
2027 की तैयारी अब पूरी रफ्तार पर
बहुजन समाज पार्टी का संगठन आज जमीनी स्तर तक मजबूत हो चुका है। कार्यकर्ता पूरी ऊर्जा‚ अनुशासन और समर्पण के साथ जनता के बीच सक्रिय हैं। अब लक्ष्य केवल संगठन को मजबूत करना नहीं‚बल्कि इस मजबूत संगठन को जनसमर्थन में बदलकर 2027 में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनाना है।
बहन कुमारी मायावती जी के नेतृत्व में बसपा जनहित‚सामाजिक न्याय‚कानून-व्यवस्था और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज को मजबूती से आगे बढ़ा रही है। गांव-गांव‚बूथ-बूथ और घर-घर तक पहुंचकर कार्यकर्ता जनता से संवाद कर रहे हैं और बसपा की नीतियों को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
2027 अब दूर नहीं है। संगठन तैयार है, कार्यकर्ता तैयार हैं और मिशन स्पष्ट है—बहुजन समाज पार्टी की सरकार।
जय भीम | जय भारत | जय बसपा
मायावती जी | आकाश आनंदजी 🌿
@AnandAkash_BSP जी
@bspindia
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1. देश में वन्दे मातरम् गायन को पूरा गाना है या शुरू के दो छंद (पैरा) गाना है या नहीं गाना है, इसको लेकर जो इस समय में देश में राजनीति चल रही है, यह ठीक नहीं है और इस मामले में हमारी पार्टी का यही कहना है कि वन्दे मातरम् गायन को लेकर अभी हाल ही में संसद में जो क़ानून पास किया गया है यह कोई पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है।
2. क्योंकि केन्द्र व राज्यों में भी सत्ता परिवर्तन के दौरान् सभी पार्टियाँ अपने राजनैतिक स्वार्थ/फ़ायदे के हिसाब से या फिर अपनी कमियों पर से जनता का ध्यान बाँटने के लिए यह सब करती रहती हैं अर्थात् एक-दूसरे के बने क़ानूनों को बदलती रहती हैं।
3. जबकि इस समय देश व जनहित के मुद्दों पर व ख़ासकर बेरोज़गार युवाओं व छात्र-छात्राओं ’जेन-जी’ व स्कूली बच्चे-बच्चियों की ’जी-अल्फा’ एवं इस समय देश के कुछ भागों में भयंकर आई बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि आदि के अनेकों और भी अति-महत्वपूर्ण मुद्दों पर केन्द्र व सभी राज्य सरकारों को तथा साथ ही सभी राजनैतिक पार्टियों को भी सही से समुचित ध्यान देना चाहिये, यही वर्तमान में देश व जनहित में समय की सबसे ज़रूरी माँग भी है।
1. जेन-अल्फा अर्थात् सन् 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में भी ख़ासकर अपने थोड़े ’अच्छे दिन’ की उम्मीद लगाये स्कूली छात्र-छात्रायें व उनके माता-पिता भी सुखी भविष्य हेतु अच्छी शिक्षा को लेकर हमेशा चिन्तित ही नहीं बल्कि उसके लिये लगातार काफी जद्दोजहद भी करते रहे हैं, किन्तु देश भर में व विशेषकर यूपी एवं उत्तर भारत के राज्यों के स्कूलों के बदतर हालत की कड़वी ज़मीनी हक़ीक़त के कारण वे लोग अति-मुखर होे गये हैं।
2. वे लोग जेन-जी अर्थात् कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी ’स्कूल ठीक करो’ अभियान में काफी बढ़चढ़ कर व पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।
3. किन्तु यह बड़े दुख और चिन्ता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने व पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें अपनी प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा हेतु बुनियादी सुविधाओं के लिये भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
4. वैसे परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’शिक्षित बनो’ आह्वान के कारण शिक्षा में भी ख़ासकर स्कूली शिक्षा ’बहुजन समाज’ के लोगों के लिये हमेशा विशेष चिन्ता की बात रही है, और इसी के तहत् हमारी पार्टी बी.एस.पी. ने इन दबे-कुचले व शोषित-पीड़ित समाज के लोगों की, जिनकी केन्द्र व राज्य में रही सरकारें लगातार उपेक्षा करती रहीं हैं, उनके हित व कल्याण एवं शिक्षा आदि के लिये यूपी में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की सभी चारों रही सरकारों में पूरा-पूरा ध्यान दिया गया, ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी एवं कल्याणकारी भारतीय संविधान के हिसाब से उन सभी परिवार वालों को रोटी-रोजी व शिक्षा-युक्त आत्म-सम्मान का समतामूलक जीवन नसीब हो सके।
5. किन्तु यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि सरकारी स्कूल की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तरफ समुचित ध्यान देने के बजाय सभी सरकारों ने ज़्यादातर इसकी घोर अनदेखी ही की है तथा इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को एक प्रकार से, इन वर्गों के आरक्षण की तरह ही, काफी हद तक निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया हुआ है और इस प्रक्रिया में हज़ारों सरकारी स्कूल बंद भी किये जा रहे हैं, जिसका भी विरोध बी.एस.पी. ने लगातार किया है और अब स्कूलों के भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी ज़रूरतों की अत्यन्त कमी को लेकर नन्हें जेन-अल्फा स्वंय अति-मुखर होने के साथ-साथ अब आन्दोलित भी हैं।
6. अतः यूपी सहित अन्य राज्यों की भी सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था सम्बंधी उनकी ज़रूरतों/माँगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत व नीति से तत्काल ध्यान देना प्रारंभ करें और उनके विरुद्ध कोई भी सरकार बल का प्रयोग करने से पूरी तरह से बचें तो यह उचित होगा।