@Anoopnautiyal1 अब जब सब एक हैं तो तख्तों ताज में हलचल लाज़मी है।
सविनय निवेदन –हिंदी में लिखा करें नौटियाल साहब! आपकी आवाज़ जरूरी है के हजारों लाखों तक पहुंचे।
@HimalayanRoars लालच और आलस ... इतना सब कुछ लुट जाने के बाद भी होश नहीं आया आजतक पहाड़ियों को। ये तुम्हारे देवी देवताओं के पहाड़, तुम्हारे पितरों की जन्मस्थली तुम्हे कितना श्राप देते होंगे... शायद तुम इसी लायक हो।
@pushkardhami@ukcmo
What's holding you back?
We r both Himalayan states, snd there is definitely something wrong with our attitude. If we cannot innovate, we can at least follow the model. Let's not make it feel like we're a failed state. This is a grave concern
@Anoopnautiyal1
के एन राव कहते हैं जो मनुष्य प्रारब्ध को नहीं स्वीकारता वह मूर्ख है समझिए! इगो मत बनाइए कि हमें क्या मिला क्या नहीं या पुरुषार्थ करना मत छोड़िए,या प्रतिष्ठा का प्रश्न भी मत बनाएं कि हम अपने बाहुबल ��े सब पा लेंगे और मृग तृष्णा में फंसे रहे!
प्रारब्ध पहले रचा, पीछे रचा शरीर: