मा. @myogiadityanath जी, एक संतुष्ट कर्मचारी ही बेहतर सेवा दे सकता है। परिवार से 500-700 किमी दूर तैनाती के कारण कर्मचारियों को मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
@UPPCLLKO से मांग है कि मानवीय आधार पर अंतर-डिस्कॉम स्थानांतरण एवं आमेलन नीति को पुनः लागू किया जाए। @UPGovt
भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के कार्य में लगे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों में हमलावरों पर रासुका के तहत कठोर कार्रवाई की मांग: फील्ड पर कार्य कर रहे अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए:
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव इंजीनियर जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए अभियंता एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारी दिन-रात धरातल पर कार्य कर रहे हैं। फील्ड पर विभागीय कार्य करने के दौरान अराजक तत्वों द्वारा ड्यूटी कर रहे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की टीम पर गाली गलौज, मारपीट एवं जानलेवा हमले किये जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में बिजली कर्मी गंभीर रुप से घायल हो रहे हैं, इन मारपीट की घटनाओं से पूरे प्रदेश के कर्मचारियों एवं अभियंताओं में भय व्याप्त हो गया है।
दिनांक 27 मई 2026 को लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र में रेड टीम पर ड्यूटी के दौरान हमलावरों द्वारा घेरकर बेलचा से जानलेवा हमला किया गया तथा हमलावरों द्वारा बिजली कर्मियों को कुत्तों से भी कटवाया गया। इसी तरह दिनांक 26 मई 2026 को राजधानी लखनऊ के मध्य क्षेत्र में चैपटिया विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत पीक आवर्स में बिजली चोरी रोको अभियान के अंतर्गत गई रेड टीम पर बिजली चोरी में संलिप्त व्यक्तियों द्वारा इकट्ठा होकर टीम पर हमला किया। जिसमें एक संविदा कर्मी को गंभीर चोटें आईं।
इसी प्रकार 27 मई 2026 को जनपद शामली के केराना में विभागीय टीम को बंधक बनाकर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कर्मियों को गर्दन एवं सीने में गंभीर चोटें आई हैं।
इस प्रकार की मारपीट की घटनाएं प्रदेश के लगभग सभी जनपदों में घटित हो रही हैं लेकिन ऊर्जा प्रबंधन की ओर से फील्ड पर कार्य कर रहे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की सुरक्षा के संबंध में कोई भी ठोस कार्य नहीं किया जा रहा है। और तो और घटना के बाद संबंधित थाने में एफआईआर लिखाने के लिए भी सभी बिजली कर्मियों को एकजूट होना पड़ता है, तब जाकर एफआईआर लिखी जाती है। एफआईआर लिखने के उपरांत हमलावरों की गिरफ्तारी तक नहीं हो रही है। जिससे हमलावरों के हौसलें बुलंद एवं बिजली कर्मियों में भय का माहौल व्याप्त है।
इस तरह की सभी घटनाओं पर त्वरित रोक लगाने हेतु संघ के महासचिव ने पावर कॉरपोरेशन शीर्ष प्रबंधन को पत्र लिख कर मांग की है कि
1. फील्ड में कार्य कर रहे अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए। इस हेतु शीर्ष ऊर्जा प्रबंधन स्तर से समस्त जिला प्रशासन को तत्काल पत्र के माध्यम से कॉर्पोरेशन व शासन स्तर से निर्देश जारी किया जाए।
2. बिजली कर्मियों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2018 से शासन स्तर पर लंबित पावर सेक्टर इम्प्लाइज प्रोटेक्शन एक्ट को लागू कराया जाए।
3. दुर्भाग्यवश यदि किसी भी अभियंता या उनके अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटना घटित होती है तो तत्काल संबंधित डिस्काॅम के प्रबंध निदेशक, संबंधित कमिश्नर/जिलाधिकारी/पुलिस अधीक्षक से वार्ता कर रासुका जैसी गंभीर धाराओं में हमलावरों की गिरफ्तारी सुनिश्चित कराई जाए।
4. पाॅवर कार्पोरेशन स्तर पर प्रदेश भर में हो रही सभी मारपीट की घटनाओं को संकलित कर उन पर कृत कार्यवाही की समीक्षा की जाए।
5. शीर्ष ऊर्जा प्रबंधन स्तर पर वीडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से की जाने वाली सभी समीक्षा बैठकों में मारपीट की घटनाओं को एजेंडे पर सम्मिलित करते हुए अग्रिम कार्यवाही की जाए।
संघ ने माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath से मांग की है कि अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों को रोकने के लिए शासन स्तर पर प्रभावी कार्यवाही करायी जाये, जिससे बिजली कर्मी बिना किसी भय के प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहें।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@ChairmanUppcl@Uppolice@dgpup@lkopolice@LkoCp@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
@UPPCLLKO की विद्युत व्यवस्था को दिन-रात जागकर सुचारू रखने वाले बिजली कर्मी आज खुद अंधकार और मानसिक तनाव में हैं! पूंजीपतियों के दबाव और शीर्ष प्रबंधन की तानाशाही नीतियों ने पावर कॉरपोरेशन को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
मा. @myogiadityanath जी न्याय कीजिए! 👇
राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम में आज शाम 6 बजे जूनियर इंजीनियर अशोक कुमार पर उपभोक्ता और उसके सहयोगियों ने जानलेवा हमला किया। इस घटना में उपभोक्ता ने जूनियर इंजीनियर को कुत्ते से कटवाए भी। इस हमले में जूनियर इंजीनियर जख्मी हो गया।
बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, राजधानी लखनऊ में कानून का राज समाप्त हो गया है, कानून का किसी को डर नहीं है, अपराधी बेखौफ खुलेआम घूम रहे हैं, एक लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार की हिंसा कतई बर्दाश्त करने योग्य नहीं है, अगर प्रदेश में सरकारी कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता का क्या हाल होगा।
अगर सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर ही इस प्रकार से हिंसा का शिकार हो और उस पर जानलेवा हमला हो तो सोचिए कैसे इस प्रदेश की बिजली व्यवस्था चल पाएगी।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि इस घटना को संज्ञान में लेते हुए तत्काल हमलावारो को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जो एक नजीर बने और बिजली कर्मचारियों पर हमला करने से पहले कोई भी अराजक तत्व 10 बार सोचें।
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माननीय मुख्यमंत्री जी पावर कारपोरेशन के अभियंता, कर्मचारी, संविदा कर्मचारी अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं, बिजली कर्मी बिना रेस्ट के दिन रात कार्य कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने का काम कर रहे हैं, वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है।
पावर कारपोरेशन का प्रबंध 3 साल से बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न पर उत्पीड़न कर रहा है और उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, किसी भी स्तर पर पिछले 3 साल से कर्मचारियों से ना तो माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा वार्ता की गई है और ना ही पावर कारपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन द्वारा वार्ता की जा रही है, पावर कारपोरेशन में शीर्ष स्तर पर तानाशाही चरम पर है।
राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए।
पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकल गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 नोटिस देकर निर्दोष अभियंताओं व कर्मचारियों के वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी आपसे अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वर्टिकल व्यवस्था को समाप्त किया जाए ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
मा. @myogiadityanath जी, उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था आज बढ़ते कार्यभार और घटते फील्ड स्टाफ के संकट से जूझ रही है। 22 मई 2024 को मांग ~27,795 MW थी, जो 22 मई 2026 तक ~9.65% बढ़कर ~30,476 MW हो गई। लेकिन फील्ड स्टाफ में 15%-20% की कमी आई है। @UPPCLLKO@UPGovt@CMOfficeUP#UPPCL
निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में वाराणसी में बिजली कर्मियों की जनजागरण रैली:बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर निर्बाध विद्युत आपूर्ति की कार्ययोजना बनाने की मांग:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों बिजली कर्मियों ने वाराणसी के भिखारीपुर स्थित पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर विशाल विरोध सभा एवं जनजागरण रैली आयोजित की।
सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि प्रबंधन की मनमानी नीतियों, निजीकरण की जल्दबाजी तथा लगातार बढ़ते उत्पीड़न के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था गंभीर संकट की ओर बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उपभोक्ताओं के हितों की वास्तविक चिंता है, तो बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेकर कर्मचारियों को विश्वास में लेते हुए भीषण गर्मी में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की ठोस कार्ययोजना तत्काल बनाई जाए।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा तापीय परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने, तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग (TBCB) के जरिए किए जा रहे निजीकरण के प्रयास न तो बिजली व्यवस्था के हित में हैं और न ही उपभोक्ताओं के।
उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा एवं आगरा में निजी कंपनियों के कार्यों को लेकर उपभोक्ताओं की लगातार मिल रही शिकायतें यह साबित करती हैं कि निजीकरण से उपभोक्ताओं की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ी हैं। संघर्ष समिति ने संबंधित निजी कंपनियों की जवाबदेही तय करने तथा करार उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
सभा में यह भी कहा गया कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहियां , उन पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानों पर किए गए स्थानांतरण तथा अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए। संघर्ष समिति ने 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने की मांग दोहराई।
संघर्ष समिति ने कहा कि डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को कार्यमुक्त किया गया है, जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है। संघर्ष समिति ने सभी संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, दूरस्थ स्थानांतरणों की वापसी तथा बहाली के बाद भी जारी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने की मांग की। साथ ही आंदोलन से जुड़े सभी एफआईआर वापस लेने, स्टेट विजिलेंस जांच समाप्त करने तथा पदाधिकारियों को लक्षित कर की जा रही कार्रवाई रोकने की भी मांग उठाई गई।
संघर्ष समिति ने मई 2025 में किए गए सेवा नियमों के संशोधन को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना सफाई का अवसर दिए सेवा से बर्खास्त करने का प्रावधान पूरी तरह अलोकतांत्रिक एवं कर्मचारी विरोधी है। संघर्ष समिति ने फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर बड़े पैमाने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्रवाइयों को तत्काल बंद करने की मांग की। इसके अतिरिक्त ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने पर अभियंताओं एवं जूनियर इंजीनियरों से वसूली के अवैधानिक आदेश को भी तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों एवं उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था को बचाने का आंदोलन है। निजीकरण से जहां उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, वहीं सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही भी प्रभावित होगी। इसलिए सभी नागरिकों से इस जन-जागरण अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की गई।
संघर्ष समिति ने संकल्प व्यक्त किया कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलन के दौरान भी उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है तथा निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष निरंतर जारी रखेंगे।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India
@UPPCLLKO शीर्ष प्रबंधन की मनमानी, वर्टिकल व्यवस्था से प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है। 20,000 संविदा कर्मियों की छंटनी और 43,000+ रिक्त पदों के कारण बचे हुए कर्मचारी 5 गुना दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। मा. @myogiadityanath जी संज्ञान लोजिये।
वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है।
पावर कारपोरेशन के प्रबंधन के मनमानी तरीके से राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए।
पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
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वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त — जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, बिजली कर्मी सड़कों पर उतरने को मजबूर:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन में लागू की गई तथाकथित वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था एवं अनुभवी संविदा कर्मियों की छटनी ने राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। बिजली व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता के नाम पर लागू की गई यह व्यवस्था आज उपभोक्ताओं, बिजली कर्मियों और स्वयं विभागीय कार्यप्रणाली के लिए गंभीर संकट का कारण बन चुकी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहले किसी क्षेत्र की बिजली समस्या के लिए संबंधित जेई अथवा एसडीओ सीधे जिम्मेदार होते थे, जिससे उपभोक्ताओं को त्वरित समाधान मिलता था। लेकिन अब कार्यों को अलग-अलग विंगों में बाँट देने से जवाबदेही समाप्त हो गई है। उपभोक्ता यह तक नहीं समझ पा रहा कि उसकी समस्या का वास्तविक जिम्मेदार अधिकारी कौन है।
नई व्यवस्था में शिकायत निस्तारण को पूरी तरह 1912 एवं ऑनलाइन पोर्टल पर निर्भर बना दिया गया है। शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं, लेकिन उनका समाधान समय पर नहीं हो रहा। आम जनता घंटों बिजली कटौती, गलत बिलिंग और तकनीकी समस्याओं से परेशान है जबकि जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी फाइलों और पोर्टलों के पीछे छिपे हुए हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि ग्राउंड लेवल पर समन्वय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। बिलिंग टीम अलग, मीटर टीम अलग और लाइन स्टाफ अलग होने के कारण एक छोटे से कार्य के लिए उपभोक्ताओं को कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। “Faceless System” के नाम पर ऐसी व्यवस्था बना दी गई है जिसमें जनता को पता ही नहीं चल रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी कौन है।इससे उपभोक्ताओं और विभाग के बीच संवादहीनता तेजी से बढ़ी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में नए विद्युत संयोजन समय से नहीं मिल रहे हैं, मीटर रीडिंग में भारी देरी हो रही है तथा हजारों उपभोक्ताओं के बिल समय से जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में तकनीकी खामियों, पूरी विफलता, बैलेन्स मिसमैच तथा गलत बिलिंग जैसी समस्याओं ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि शीर्ष प्रबंधन पूरी तरह जमीनी सच्चाइयों से कटा हुआ है और तुगलकी निर्णय थोपकर बिजली व्यवस्था को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। प्रदेश की जनता बिजली संकट से त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं बिजली कर्मचारी अत्यधिक कार्यभार, संसाधनों की कमी और उत्पीड़नात्मक नीतियों के कारण मानसिक दबाव में कार्य करने को विवश हैं।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की विफल व्यवस्था को तत्काल वापस नहीं लिया गया तथा बिजली कर्मियों और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कर अभियंताओं को विश्वास में लेकर व्यावहारिक व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बिजली कर्मी अब सड़कों पर उतरकर प्रबंधन की मनमानी नीतियों का लोकतांत्रिक विरोध करेंगे।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि बिजली व्यवस्था को बचाने, उपभोक्ताओं को राहत देने तथा ऊर्जा निगमों में जवाबदेही और समन्वय बहाल करने हेतु तत्काल हस्तक्षेप किया जाए, अन्यथा स्थिति और विस्फोटक होगी जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।
उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जन जागरण अभियान के अंतर्गत आज विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर और प्रयागराज में सभा हुई। सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम,जवाहर लाल विश्वकर्मा, प्रेम नाथ राय ने संबोधित किया।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
एक वर्ष से वार्ता नहीं, उत्पीड़न जारी — प्रबंधन की उदासीनता से बिगड़ रही बिजली व्यवस्था : संघर्ष समिति के सुझावों पर अमल होता तो उपभोक्ताओं को न झेलनी पड़ती आज की परेशानियां:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले एक वर्ष से संघर्ष समिति के साथ कोई वार्ता नहीं की गई है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों का सिलसिला लगातार जारी है। इससे कार्यस्थल का वातावरण खराब हो रहा है और बिजली व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा निरंतर कर्मचारी संगठनों से संवाद पर बल दिया जाता रहा है तथा मुख्य सचिव स्तर से भी नियमित वार्ता के निर्देश हैं। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन का यह रवैया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और विरोधाभासी है।
संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि ठीक एक वर्ष पूर्व, 05 मई 2025 को क्रमिक अनशन के दौरान संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। इसके बाद प्रबंधन को वार्ता के लिए बाध्य होना पड़ा और 12 मई 2025 को विस्तृत बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में संघर्ष समिति ने बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु एक व्यापक और ठोस प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया था। उस समय अध्यक्ष द्वारा इस पर अध्ययन कर आगे वार्ता करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक उस पर कोई प्रगति नहीं हुई।
संघर्ष समिति का कहना है कि यदि उस समय प्रस्तुत सुझावों पर गंभीरता से विचार कर ठोस निर्णय लिए गए होते, तो आज उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति से संबंधित जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वे काफी हद तक टाली जा सकती थीं।
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि संवाद के बजाय दमनात्मक नीति अपनाकर भय का वातावरण बनाकर बिजली व्यवस्था चलाने का प्रयास किया जा रहा है, जो न तो व्यावहारिक है और न ही टिकाऊ।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि भीषण गर्मी को देखते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रबंधन तत्काल सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस ले तथा संघर्ष समिति के साथ सम्मानजनक और सार्थक वार्ता शुरू करे। साथ ही, पूर्व में दिए गए सुझावों के आधार पर बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
उत्पीड़न के विरोध में 16 अप्रैल से चल रहे जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज चित्रकूट एवं बांदा में सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों श्री जितेन्द्र सिंह गुर्जर एवं श्री महेन्द्र राय ने संबोधित किया और कर्मचारियों से एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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श्रीमान जी @ChairmanUppcl jan 24 के आदेश में 100 केवीए से 250 केवीए तक का मुख्य उत्तरदायित्व जेई का था ।आज के आदेश में 10 केवीए से 1000 केवीए तक का मुख्य उत्तरदायित्व जेई का है। अगले साल 27 में 10 केवीए से 10000 केवीए तक जेई ही जिम्मेदार होगा बाकी सब क्या बारात में आये हैं।