24 साल का young & dynamic Amit Jain कॆ सपने थे,हौसले थे, पूरा जीवन सामने था, लेकिन अस्पताल की लापरवाही ने उसे मौत की नींद सुला दिया। आज न अस्पताल गलती मान रहा है, न सिस्टम जवाब दे रहा है।अगर आज चुप रहे, तो कल कोई और Amit होगा ये लड़ाई बदले की नहीं, इंसाफ और सिस्टम को जगाने की है।