@hindisopan
स्वप्न थे जिनके संग स्वप्न ही रह गये!
कि ग़ैर बांहों में भर,कर मुस्कुराते रहे !
मैं यूं सिसक सिसक कर, रोता रहा रात-भर !
वो गाते रहे रात-भर दिल जलाते रहे !
द्वारा __ अभिमन्यु प्रजापति "लक्खीसराय" बिहार
स्वप्न थे जिनके संग,स्वप्न ही रह गये!
कि गैर बांहों में भर,कर मुस्कुराते रहे!
मैं यूं सिसक स���सक कर रोता रहा रात-भर!
वो गाते रहे रात-भर, दिल जलाते रहे !
द्वारा__ अभिमन्यु प्रजापति "लक्खीसराय" बिहार