@ACRFchandel भाई 2014 से मुझे खुद इन हरामखोर भाजपाई को त्यागने में 10 साल लग गए तो उनके भी भ्रम टूटेंगे
बाकी जो भी जनरल कैटेगरी के नेता हैं उनका इंतजार सर्वण समाज के लोग जूता लेकर कर रहे उत्तर प्रदेश में इनका असल परीक्षा होगा
@ajeetbharti देखो बीजेपी ने दलित राजनीति के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है या ये कहना बेहतर होगा कि अंबेडकरवादी बीजेपी GCs को पसंद नहीं करती तभी इन्हें जब भी पावर मिली इन्होने हमारे अधिकार छीने हैं..ये हालात है बीजेपी के राज में काबिलियत की👇वोट देते समय ध्यान रखना सब..
@ajeetbharti इन सब लेख से कोई मतलब नही है महामानव को और ना ही सवर्णो से। सवर्णो कम से कम दो तीन बार चुनावों में हरा दे, ये खुद ब खुद रास्ते पर आ जायेगें।
भाजपा हो या कोई ओर दल
सामान्य वर्ग के अग्रणियों को नहीं सुनेगा तो आगामी चुनाव UP सहित राजस्थान ओर मध्यप्रदेश में हैं, विधानसभा हो या निकाय, खुलकर विरोध रहेगा
सरकार को महिपाल सिंह मकराना जी को सुनना ही पड़ेगा...
#reservationfreeindia
हमेशा की तरह सरकार वसूली का नया प्लान बना रही है और हम हमेशा की तरह ख़ुश हैं। इसके अलावा दूसरा ऑप्सन है भी नही। हम नोटबंदी मे ख़ुश हुए,gst मे खुश हुए,लॉकडाउन मे ख़ुश हुए। हर बार खूब ख़ुश होते गए।और आज देखिए मोदी जी के कार्यों से उतना ही ख़ुश हैं जितना आप सब जनता ख़ुश हैं
आरक्षण पर खुलकर चर्चा करने से जितना बचा जा रहा है और उसे दबाने की कोशिश हो रही है, उतना ही यह मुद्दा समाज में सुलगता जा रहा है। यदि किसी विषय पर खुले संवाद की जगह उसे दबाया जाए, तो भविष्य में उस पर बड़ा जनआक्रोश भी देखने को मिल सकता है।
वर्तमान स्वरूप का आरक्षण समाज में विभाजन और भेदभाव की भावना को बढ़ाता है कई बार लोगों की उपलब्धियों को उनकी मेहनत के बजाय केवल (कोटे) से जोड़कर देखा जाता है जिससे सामाजिक सम्मान और आपसी विश्वास प्रभावित होते हैं
अवसरों का आधार आर्थिक स्थिति होनी चाहिए न कि जाति शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर हर व्यक्ति को समान सहायता और सुविधाएँ मिलनी चाहिए चाहे वह किसी भी समुदाय से आता हो
याद रहे कुछ भी अनंत नहीं सबका अंत होना तय है