सामाजिक न्याय के लिये संसद से लेकर सड़क तक लड़ने वाले वाले चंद बुलंद आवाज में शामिल सांसद @SanjayAzadSln जी से जब भी मिलने का मौका मिलता है कुछ नया सीखने को मिलता है।
आज उनसे हमें भगत सिंह पर चमन लाल जी की लिखी किताब और समाजवादी राजनीति के पुरोधा रघु ठाकुर जी की लिखी किताबें मिली।
मेरे लिए खुशी की बात है कि हमने मराठी में लिखी मशहूर किताब "भुरा" का हिंदी अनुवाद उनको भेंट किया. इसके लेखक Dr. @baviskar_sharad है। 5 सालों में "भुरा" के सिर्फ़ मराठी में ही 20 संस्करण आ चुके है।
भुरा सिर्फ़ एक वंचित का सफ़र नहीं है, इसमें वो सभी वंचित अपने को इस सफ़र से जोड़ता है, सीखता है जिसे इस दर्शन में भरोसा है कि “झिजीन मराणं, पण थिजीन नाही मराण!”, जड़ होकर मरने से अच्छा है लड़कर मरना!
देखिए ये रिपोर्ट - कनॉट प्लेस में लाठियों वाली कार से लेकर प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों से भिड़ते ‘स्वघोषित राष्ट्रवादियों’ तक, न्यूज़लॉन्ड्री ने पुलिस की मौजूदगी में हुए घटनाक्रम को कैमरे में दर्ज किया।
सवाल है - पुलिस की मौजूदगी में यह सब कैसे हुआ?
देखिए @ImAvdheshkumar की रिपोर्ट।
भाजपाइयों का लक्ष्य ऊपरवाला झूठा पोस्टर लगाना नहीं था बल्कि नीचे वाले प्रभु राम के पोस्टर को छिपाना था क्योंकि अब जब भी कोई भगवान राम का चित्र देखता है तो उसे भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों द्वारा अयोध्या के रामलला के मंदिर में की गई चोरी की याद आती है, जिससे भाजपाई गिरोह के ख़िलाफ़ जनाक्रोश और भी अधिक बढ़ जाता है।
याद रहे इसी ‘भाजपाई गिरोह’ ने लखनऊ में रामचरितमानस पर भी लाठी चलवाई थी।
भाजपा को डर है कि कहीं इस बार रावण के साथ-साथ, ‘राम मंदिर चोरी’ से आहत कहीं कोई आस्थावान श्रद्धालु ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी के त्रिदानवों का पुतला न फूंक दे।
@HansrajMeena@rashtrapatibhvn उन्हें जब किसी विशेष संगठन के अधीन होकर कार्य करना है तो कॉन्स्टिट्यूशन को उठाकर उन्होंने ताड़ पर रख दिया है उनसे अपेक्षा करना भी सबसे बड़ी मूर्खता है अब जन आंदोलन नहीं बल्कि जन का विद्रोह देखेगा देश तभी बदलाव कर पाएगा।
महामहिम राष्ट्रपति जी,
अगर आपको मंदिरों में जाने से फुर्सत मिल गई हो तो आपके गृह राज्य ओड़िसा के इन आंदोलनकारी आदिवासियों से भी मिल लीजिए !
@rashtrapatibhvn
बाबा साहब डॉ आंबेडकर की तस्वीर फाड़ दी गई, लड़कियों को बुरी तरह से घसीटा गया। थाने में आंबेडकवादियों के साथ बदसलूकी हुई।
IIT बॉम्बे में सांस्थानिक हत्या का शिकार हुए साहिल वकोड़े के लिए इंसाफ मांग रहे लोगों पर आंबेडकरवादियों पर @MumbaiPolice का कहर टूटा है। देखिए कैसे दलित-बहुजन समाज के लोगों को बुरी तरह घसीटा गया।
मुंबई से आई ये तस्वीरें दिखाती हैं कि कैसे @Dev_Fadnavis की पेशवाई में मुंबई पुलिस दलितों के साथ बेरहमी कर रही है।
साहिल वकोड़े के लिए संघर्ष कर रहे साथी @Sonpimplerahul, @deepali_writes, @ashu_vidrohi, @AIISCA1957 समेत सभी संघर्षशील साथियों को हमारा क्रांतिकारी जय भीम। आप सबके जज्बे को हम सलाम करते हैं। #DalitlivesMatters #JusticeForSahilWakode
Tiger Shroff पर तीन बाइक सवारों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं! आखिर देश के गृह मंत्री Amit Shah कर क्या रहे हैं?
दिल्ली में जंगलराज है और अब मुंबई जैसे शहर में भी गैंगस्टरों का खौफ बढ़ रहा है, जिस शहर को देश के सबसे सुरक्षित शहरों में गिना जाता है।
न बॉर्डर से नशे की तस्करी रुक रही है, न देश के अंदर गैंगस्टरों का आतंक थम रहा है। Lawrence Bishnoi जैसे गैंगस्टर को साबरमती जैसी जेलों में दामाद जैसी आवभगत देने वाले Amit Shah से देश नहीं संभल रहा है।
HM Amit Shah तुरंत इस्तीफ़ा दें!
उत्तर प्रदेश में 'रामराज्य' का ढोल पीटने वाली सरकार में जब पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या?
आटा फ्लोर मिल में विज्ञापन मांगने गए पत्रकार नसीम अहमद की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई!
कानून का खौफ खत्म हो चुका है और जंगलराज चरम पर है।
@myogiadityanath जी, जवाब दीजिए—पत्रकारों की सुरक्षा कब तय होगी या सिर्फ विज्ञापनों में ही प्रदेश सुरक्षित रहेगा?
उत्तराखंड में निवेश के नाम पर धामी सरकार का फ़र्ज़ीवाड़ा - और यह BJP ‘डबल इंजन' मॉडल का एक और नमूना है।
Global Investors Summit का ढिंढोरा पीटा गया: 1,779 MoU, ₹3.56 लाख करोड़। रोडशो पर जनता के लगभग ₹100 करोड़ ख़र्च हुए | फिर सरकार ने ₹1 लाख करोड़ को "ज़मीन पर उतरा निवेश" बताया।
Newslaundry ने जाँचा कि यह निवेश किसका है:
* आटा चक्कियाँ, खाद-बीज की दुकानें और छोटे क्लीनिक "निवेशक" गिन लिए गए। कुछ को पता तक नहीं था।
* ₹35,279 करोड़ - यानी 35% - सरकारी बिजली कंपनियों के हैं।
* CSR और दान से चलने वाले एक स्कूल को ₹24.49 करोड़ का "निवेशक" बताया गया।
* ₹1,200 करोड़ के "निवेशक" की कमाई चार साल से शून्य है, और रिकॉर्ड में उसका एक भी कर्मचारी नहीं।
* दुबई-लंदन के रोडशो से ₹27,975 करोड़ का दावा हुआ, पर "ज़मीन पर उतरे" निवेशकों की सूची में इन दोनों शहरों की एक भी कंपनी नहीं।
और समिट से सिर्फ़ सात दिन पहले, 1 दिसंबर 2023 को, "निवेश" की परिभाषा ही ढीली कर दी गई। इसे कहते हैं: पहले नियम बदलो, फिर आँकड़े बताओ।
मुख्यमंत्री 3,300 "निवेशकों" की पूरी सूची सार्वजनिक करें।
निवेश कागज़ पर। रोज़गार नारों में। और उत्तराखंड के युवाओं के हिस्से - पेपर लीक।
@newslaundry@Basantrajsonu
https://t.co/Iz2ZtQWycQ
नमस्कार अश्विनी वैष्णव @AshwiniVaishnaw जी. आज मैं कोई पॉलिटिकल सटायर करने नहीं आई हूँ. मैं स्पष्ट और सीधी बात करूँगी.
आप इस देश के सूचना और प्रसारण मंत्री हैं और मैं इस देश की एक साधारण लड़की हूँ. हमारी विचारधारा निश्चित रूप से अलग है, लेकिन क्या इस वजह से किसी @ABPNews को ये अधिकार मिल जाता है कि वो फ़र्ज़ी ख़बर चलाकर मुझे वेश्या कह दे?
जी हाँ अश्विनी जी…@ABPNews ने अपनी एक झूठी रिपोर्ट में मुझे कॉल गर्ल और प्रॉस्टिट्यूट कहा. उन्होंने मेरे ख़िलाफ़ फ़ेक न्यूज़ चलाई और मेरा मान-मर्दन किया.
अश्विनी वैष्णव जी! आपके घर में भी बेटियाँ होंगी! आपके परिवार में भी बहनें होंगी! क्या आपको उनके लिए डर नहीं लगता? क्या ये देश महिलाओं के लिए और ज़्यादा असुरक्षित नहीं हो गया है? क्या न्यूज़ चैनलों पर मंत्रालय की कोई लगाम नहीं बची है? आप लोगों की चुप्पी खलती है.
@MIB_India
माफ़ी माँगने से क्या होगा दलाल @ABPNews ? जो अफ़वाह उड़ा दिए हो वो ख़त्म हो जाएगी क्या? मैंने विरोध किया तो माफ़ी माँग रहे हो! जो बेटियाँ विरोध नहीं कर सकतीं उनको तो तुम आत्महत्या करने पर मजबूर कर दोगे? तुम्हारी बदमाशी से मेरी गरिमा को जो ठेस पहुँची है उसकी कोई माफ़ी नहीं है. कोर्ट में मिलते हैं.
@narendramodi@NCWIndia
@DFS_India
बारह साल, बारह सवाल
1. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बेचे क्यों जा रहे हैं?
2. बैंक मजबूत हुए हैं तो ग़रीब जनता के खाते से पैसे क्यों काटे जा रहे हैं?
3. बैंक मजबूत हुए हैं तो बार-बार केवाईसी के नाम पर जनता के पैसे देने से इंकार क्यों किया जा रहा है?
4. बैंक मजबूत हुए हैं तो उन लोगों को पकड़कर देश में लाकर सज़ा क्यों नहीं दी जा रही है, जो बैंको से खरबों का लोन लेकर भाग गये हैं?
5. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर ग्रामीण इलाकों में ब्रांच और ATM बंद करके जनता को कैश के लिए क्यों भटकाया जा रहा है?
6. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को बिना बिचौलिये और बिना गारंटर के लोन क्यों नहीं मिल रहा है?
7. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर साइबर ठगी का शिकार हुए गरीब आदमी का पैसा तुरंत वापस क्यों नहीं होता, उसे थाने और बैंक के चक्कर क्यों कटवाए जाते हैं?
8. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर होम लोन और शिक्षा लोन पर ब्याज इतना ज़्यादा क्यों है कि आम आदमी की कमर टूट रही है?
9. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होने पर जनता का पैसा कई-कई दिन तक होल्ड पर क्यों रखा जा रहा है?
10. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर CIBIL स्कोर में छोटी सी चूक पर नौजवानों को डिफॉल्टर बताकर उनका भविष्य क्यों खराब किया जा रहा है?
11. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बुजुर्गों और अनपढ़ लोगों को UPI और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए हर ब्रांच में सहायता काउंटर क्यों नहीं है?
12. बैंक मजबूत हुए हैं तो बैंक कर्मियों की जायज़ माँगे क्यों नहीं मानी जा रही हैं और बैंकों में नई भर्ती क्यों नहीं हो रही और मौजूदा कर्मचारियों पर इतना दबाव क्यों है कि ग्राहक सेवा ही चौपट हो रही है?