आज चुनाव आयोग पर जो हुआ, पूरी कहानी 👇
पहले घंटों तक कांग्रेस के सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व उप मुख्यमंत्री चुनाव आयोग के गेट पर खड़े रहे.
गेट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों से कहा कि उन्हें अंदर जाने दिया जाए, उन्हें जरूरी एप्लिकेशन देनी है. इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई.
आखिरकार कांग्रेस का डेलिगेशन चुनाव आयोग के गेट पर ही धरने पर बैठ गया. इसके बाद चुनाव आयोग के अधिकारी नींद से जागे.
फिर चुनाव आयोग ने कांग्रेस की एप्लिकेशन रिसीव की, जो मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को रद्द करने से जुड़ी थी.
सोचने वाली बात है - क्या BJP का कोई सांसद या मंत्री चुनाव आयोग से मिलने आता तो उसके साथ यही बर्ताव होता?
मुझे लगता है ज्ञानू दौड़ता हुआ गेट तक आता और कंधे पर बैठाकर अंदर ले जाता.
भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया है।
भाजपा सरकार ने पहले उप्र में, विलय के नाम पर 27000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की साज़िश की थी और अब राज्यसभा में शिक्षा-विरोधी भाजपा सरकार ने ये स्वीकार किया है कि पिछले 5 सालों के भाजपा शासनकाल में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। ये हमारे देश के भविष्य के विरुध्द एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। क्या भाजपाई और उनके संगी-साथी ये चाहते है कि अमीरों के बच्चे तो पढ़ें लेकिन पीडीए समाज के शोषित-वंचित बच्चे नहीं और पीडीए समाज के बच्चे श्रमिक-मज़दूर बनकर ही रह जाएं।
भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच ही किताब नहीं बँटवा रही है, सरकारी स्कूलों को बंद करवा रही है। भाजपाई जानते हैं कि शिक्षा से लोगों में जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना आती है जो भाजपा की दक़ियानूसी, रूढ़िवादी, संकीर्ण सोच और तंग नज़रिये को उखाड़ फेंकने का काम करेगी। इसीलिए भाजपाई शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान के ख़िलाफ़ रहते हैं तथा उनके संगी-साथी अपनी अति-संकीर्ण मानसिकता व एकरंगी नकारात्मक विचारधारा के तहत ही बच्चों को ढालना चाहते हैं।
बच्चों से शिक्षा-तालीम का अधिकार छीनना, भाजपाइयों का सामाजिक अपराध है। सरकारी शिक्षा के छिनने से सबसे ज़्यादा नुक़सान पीडीए समाज के लोगों को ही होगा क्योंकि शिक्षा के साथ-साथ पोषण के लिए मिलनेवाला मिड-डे मील भी बच्चों को नहीं मिलेगा, जिसका बुरा असर बच्चों के मानसिक-शारीरिक विकास पर होगा।
हमारा मानना है कि अगला चुनाव ऐतिहासिक होगा जब शिक्षा का विषय, भाजपा को हराने-हटाने के लिए एक निर्णायक मुद्दा बनेगा क्योंकि ग़रीब से ग़रीब परिवार और ख़ासतौर से हर माँ अपने बच्चे को पढ़ाना चाहती है। इस बार महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी। भाजपा खातों में कुछ पैसे डालने का दिखावा करेगी लेकिन गाँव-गली-मोहल्ले तक ये बात फैल चुकी है कि अगर सरकारी स्कूल बंद हो गये तो प्राइवेट स्कूलों की लूट शुरू हो जाएगी और खाते में जितना आएगा नहीं उससे ज़्यादा बच्चों की पढ़ाई में ही चला जाएगा। अब लोग समझ गये हैं कि भाजपा जितना देती नहीं है उससे कहीं ज़्यादा सामानों के दाम बढ़ाकर और बिजली-पानी के बिल, गैस-डीज़ल-पेट्रोल-सिलेंडर, मोबाइल रिचार्ज, रेल-बस किराये, टोल-पार्किंग को महंगा करके व अन्य टैक्सों को बढ़ाकर वसूल लेती है।
अगर सरकारी शिक्षा ख़त्म हो गयी तो महंगाई और बेकारी-बेरोज़गारी के मारे लोग बच्चों को पढ़ा ही नहीं पायेंगे और जो किसी भी तरह पढ़ाना भी चाहेंगे तो उनकी सारी कमाई, प्राइवेट स्कूलों की भारी भरकम फ़ीस, यूनिफ़ॉर्म-ड्रेस; किताब-कॉपी-स्टेशनरी; बस्ता-बोटल-टिफ़िन; रिक्शा-बस, प्रोजेक्ट-एसाइनमेंट;, स्कूल फ़ंक्शन-पिकनिक के खर्चों में ही निकल जाएगी।
इसके अतिरिक्त जो स्कूल चल भी रहे हैं वहाँ भी भाजपा शिक्षा का काम चलने ही नहीं देना चाहती है और शिक्षकों को पढ़ाई की जगह अन्य कामों में लगा देती है। इससे सच्चे शिक्षकों का मनोबल गिरता है क्योंकि उन्हें लगता है कि वो पढ़ाने का अपना कर्तव्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण शिक्षक-शिक्षार्थी और अभिभावक का संबंध भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भाजपा सरकार की शिक्षा-विरोधी नीतियों की वजह से समाज में शिक्षा-शिक्षक के मान-सम्मान को चोट पहुँची है। इसीलिए शिक्षक समाज में भाजपा के ख़िलाफ़ गहरी नाराज़गी और असंतोष है। अगले चुनाव में भाजपा की हार के मुख्य कारणों में एक कारण शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विद्यालयों के कर्मचारियों व शिक्षा से वंचित होते बच्चों के माता-पिता और उनके परिवार के अन्य लोगों का भाजपा के विरुध्द आक्रोश भी होगा।
लगता है ‘पीडीए पाठशाला’ के सांकेतिक आंदोलन को एक वास्तविक आंदोलन के रूप में बदलना होगा, तभी शोषित-वंचित समाज की पीढ़ियाँ आगे पढ़ और बढ़ पाएंगी।
आइए हम सब मिलकर शिक्षा को बचाएं, अपने बच्चों का भविष्य बनाएं!
पहले खेल के नियम तय किए जाते हैं और उसके अनुसार खेल खेला जाता है पर हमारे यहां उल्टे बांस बरेली को।
खेल खत्म होने पर मालूम पड़ता है की बीच में नियम बदल गया।
2011 से पूर्व नियुक्त अध्यापको पर टेट की अनिवार्यता लागू करना सरासर गलत है।
#JusticeForTeachers
#JusticeForTeachers
आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।