अपराजिता देवी ने महादेवजी से कहा- भगवन्! आप शुम्भ निशुम्भ के पास दूत बनकर जाइये!
और उन गर्वीले दानव शुम्भ एवं निशुम्भ से कहिये- ‘दैत्यो! यदि तुम जीवित रहना चाहते हो तो पाताल को लौट जाओ। इन्द्र को त्रिलोकी का राज्य मिल जाय और देवता यज्ञभाग का उपभोग करें!’
राम नाम गुन चरित सुहाए।
जनम करम अगनित श्रुति गाए॥
जथा अनंत राम भगवाना।
तथा कथा कीरति गुन नाना॥
वेदों ने श्री रामचन्द्रजी के सुंदर नाम, गुण, चरित्र, जन्म और कर्म सभी अनगिनत कहे हैं। जिस प्रकार भगवान श्री रामचन्द्रजी अनन्त हैं, उसी तरह उनकी कथा, कीर्ति और गुण भी अनंत हैं ❣️✨
किसी कला को जब #कलाकार प्रदर्शित करता तो उस #कला के पीछे बहुत सारे कलाकारों की मेहनत छुपी रहती है.... आप उदहारण के तौर पर इन चाचाजी को देख सकते हो...!!
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