"भारत का संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि यह जीवन जीने का एक माध्यम है"।
- डॉ भीमराव अंबेडकर जी
जयभीम 💙 🙏🏻
नमो बुद्धाय 💐🙏🏻
@BairwaDeepak93@AnujKumarMM1@asar_1986 @AmbedakarSona33
साथियों,
आगामी 25 अगस्त 2026 को किसान आदर्श इंटर कॉलेज, दनकौर में आयोजित जनसभा में आप सभी क्षेत्रवासियों से सादर निवेदन है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज कराएँ।
यह अवसर क्षेत्र की बात, जनता की समस्याओं और आने वाले समय की दिशा पर संवाद का है।
आपकी उपस्थिति हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
आइए, मिलकर अपने क्षेत्र की आवाज़ को और मजबूत करें।
📍 स्थान: खेल मैदान, किसान आदर्श इंटर कॉलेज, दनकौर, गौतम बुद्ध नगर
📅 दिनांक: 25 अगस्त 2026
⏰ समय: प्रातः 10 बजे से
आपका अपना,
सतवीर नागर
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी
बहुजन समाज पार्टी
@AnandAkash_BSP@SatveerNagar_@satveernagarbsp
अपनी दुर्दशा के लिए दूसरों क़ो उत्तरदायी ठहराने से यह पता चलता है कि व्यक्ति में सुधार की आवश्यकता है, स्वयं क़ो दोषी ठहराने से यह पता चलता है कि सुधार आरम्भ हो गया है,
और किसी क़ो भी दोषी नहीं ठहराने का अर्थ यह है कि सुधार पूर्ण हो चुका है।
सादर नमो बुद्धाय।
जय भीम।
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भगवान बुद्ध के अनमोल विचार हमें शांति, करुणा, और संयम का मार्ग दिखाते हैं। उनके मुख्य और प्रेरणादायक विचार जीवन को बदलने की शक्ति रखते हैं।
शक्ति चाहिए तो ज्ञान अर्जित करो,
और सम्मान चाहिए तो चरित्र अच्छा करो।
सादर नमो बुद्धाय।
जय भीम।
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The state of lower judiciary exams in the country is a cruel joke on every lawyer who prepares for 2 years for these exams. These exams don't get as much attention as the UPSC, NEET etc. To add to that the SC mandated a 3 year wait time to be able to even attempt these exams.
#students#JNU#NehaBora#UmarKhalid
सवर्ण समाज के सबसे खतरनाक राजनैतिक संगठनों में #AISA All India Students’ Association और #AISF All India Students’ Federation, जिन चमन चिंटूओ को नहीं पता ये कौनसे संगठन है, तो आपकी यादाश्त थोड़ी हरी ताजा करता हूं,
AISF ने छात्र राजनीति के नाम पर भेलपुरी कामरेड कन्हैया कुमार पांडे ढपली वाले दिए, जो JNUSU जवाहर लाल यूनिवर्सिटी छात्र संघ का अध्यक्ष भी रहा आंगनबाड़ी मां का गरीब भूमिहार बेटा जो दो बार सांसदी चुनाव हारा और हारने के बावजूद गरीब आंगनबाड़ी माता का लाल आज 20 लाख की गाड़ियों में चलता है और खस्ताहाल झोपड़ी से 5 टिल्ला मंजिली इमारत का मकान बना लिया, समझ से बिल्कुल परे कन्हैया की कोई कमाई नहीं फिर भी आगनबाड़ी मां की पेंशन करोड़ो में सरकार ने कर दी जो बेरोजगार बेटा इतनी तरक्की कर गया, कोई दलित चैंपियन बता सकता हो बताने का कष्ट करे ?
अब आते है AISA पर आजकल आपको एक आठ हड्डी की क्रांतिकारी महिला कॉमरेड नेहा बोरा हर जगह दिखाई दे रही होगी राजनीति क्रांति की अग्रदूत मुद्दा कोई भी हो इसके बिना अधूरा है, नेहा ने इंटरव्यू में बताया उसके माता पिता 15 साल से उसे बात नहीं करते पिता फौज में और माता गृहणी दोनों ही बीजेपी की कट्टर वोटर और सपोर्टर है, ( ये सबसे अपीलिंग डायलॉग लगा इस डॉयलॉग को सुनते ही दलित/मुस्लिम गिले हो जाएंगे )
चूंकि अभी JNUSU चुनाव आने वाला है तो वामपंथी लेफ्ट ABVP अकेले से लड़ने के आपसी गठबंधन करता है, आठ दस लेफ्ट संघठन और उमर खालिद वाले SIMI Students Islamic Movement of India ise 2001 में खुद कांग्रेस ने प्रतिबंधित किया था और उमर खालिद के अब्बू इसी संगठन के बादशाह रहे है, इसी का विकृत रूप जिसे उमर खालिद ने नाम दिया यूनाइटेड अगेंस्ट हेट संगठन उसी का मालिक बना,
इनको कोई गरीब गुरबा ना समझ लेना में इन सभी के साथ अन्य संगठन में काम किया हूं शहला राशिद जो पैदल चल गरीब जमुना बन कर दिखाती किंतु गाड़ी उसकी गाड़ी पीछे चलती थी, भीड़ गायब तो मैडम असली रूप में आती सेठानी बन घूमती ,
नेहा बोरा भी बिल्कुल इन्हीं का गंगा रूप है, पिता आर्मी ऑफिसर माता गृहणी दोनों ही अपनी बेटी से नफरत करते है दस साल बात तक नहीं करी ऐसा 25 वर्षीय नेहा बोरा ने इंटरव्यू में बोला यानि नाबालिक नेता बनी आप ने देखे कभी 15 वर्षीय बालक राजनीति रूप से घर में विरोध करते हुए ? इतनी ही नहीं जैसी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया नेहा बोरा की मम्मी खुद चल के दिल्ली आई नेहा से मिली अब लड़की यकायक नेता बन जाए कैरियर सेट बीजेपी को छोड़ कर कही से भी टिकट ले लेगी,
इन सभी में जो चालाकी लेफ्ट संघठन करते है, अब JNUSU संगठन में अध्यक्ष पद का उम्मीदवार तय होगा सीधी बात नेहा बोरा का विरोध कोई दलित पिछड़ा आदिवासी नहीं कर पाएगा इनका दावेदारी रखने का मोरल ग्राउंड ही खत्म कर दिया,
दलित पिछड़े आदिवासियों को बता दूं ये लोग आपको समझाएंगे RSS में आजतक कोई दलित अध्यक्ष क्यों नहीं बना पर मेरा इनसे एक सवाल पूछो !
आपके संगठन में भी भी कोई दलित आदिवासी अध्यक्ष क्यों नहीं बना आप अपने संगठन की जानकारी पहले रखनी चाहिए, सभी के सभी छात्रों के नाम पर जीतने भी ये सामाजिक न्याय के नाम पर ठग बने घूम रहे है, बगलें झांकते मिलेंगे ,
आपको हर वर्ष सवर्ण समाज का एक वामपंथी ठग ऐसे ही नहीं मिल रहा सब प्लानिंग का हिस्सा है ! नमस्ते
#Baba_Manish
✍️ बहुजन समाज के सम्मानित साथियों आरक्षित सीटें केवल विधानसभा में संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि उन वर्गों की आवाज़ को सत्ता, नीति और कानून बनाने की प्रक्रिया तक पहुँचाने के लिए हैं, जिनकी आवाज़ सदियों तक दबाई गई।
जब एससी/एसटी समाज के आरक्षण, शिक्षा, रोजगार, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय जैसे बुनियादी सवालों पर ही उनके नाम पर चुने गए जनप्रतिनिधि मौन रहें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या केवल विधानसभा में मौजूद होना ही प्रतिनिधित्व है, या अपने समाज के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना भी उसकी जिम्मेदारी है?
इतिहास हमें बताता है कि सत्ता कभी स्वयं अधिकार नहीं देती, उसके लिए संगठित संघर्ष और मजबूत राजनीतिक दबाव जरूरी होता है। जब प्रतिनिधि अपने समाज के सवालों को मजबूती से उठाते हैं, तब सत्ता को निर्णय बदलने तक मजबूर होना पड़ता है।
आधुनिक भारत के निर्माता बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर का संघर्ष हमें यही सिखाता है कि सत्ता के गलियारों में भागीदारी तभी सार्थक है, जब वह वंचित समाज के अधिकारों की रक्षा और विस्तार के लिए इस्तेमाल हो।
इसलिए आज आवश्यकता किसी व्यक्ति या नेतृत्व को कमजोर करने की नहीं, बल्कि बहुजन समाज की राजनीतिक चेतना, एकजुटता और संघर्ष की ताकत को मजबूत करने की है।
क्योंकि याद रखिए—
आज की खामोशी सिर्फ आज का नुकसान नहीं है; यह आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों को कमजोर करने का कारण बन सकती है।
#आरक्षित_सीटें_हमारी_संख्या_नहीं_हमारी_आवाज़_हैं।
और आवाज़ तभी मायने रखती है, जब वह सत्ता के सामने सच बोलने का साहस रखती हो।
जय भीम। जय भारत जय संविधान |
@Mayawati@AnandAkash_BSP@AnandKumar_BSP@MedhankarJi@alok4bsp@vkjatav84@grtbabamanish@amita_ambedkar@Adv_Akriti
✍️ बहुजन समाज के सम्मानित साथियों हाथी ने रफ्तार क्या पकड़ी, कुत्तों का पूरा झुंड बिलबिला उठा!
याद रखो—कुत्तों का झुंड मिलकर भी हाथी का शिकार नहीं कर सकता।
हाथी अपनी चाल चलता है और झुंड सिर्फ शोर मचाता रह जाता है।
जैसे ही पूँछ पर हाथ पड़ा, सबकी असलियत सामने आ गई।
जो अब तक बहुत उछल रहे थे, वही आज बेचैनी में बिलबिला रहे हैं।
जियो मेरे आकाश भाई! 🔥
जियो शेर! 🦁
रफ्तार ऐसी ही बनाए रखो—क्योंकि शेर की दहाड़ से जंगल के कई नकली शेरों की नींद उड़ जाती है।
जय भीम 💙 | जय बहुजन ✊
@AnandAkash_BSP@AnandKumar_BSP@vkjatav84@grtbabamanish@MedhankarJi@PalVishwnathbsp@Adv_Akriti@amita_ambedkar@jitu_rajoriya
'कॉलेजियम सिस्टम' पर सवाल उठाना न्यायपालिका का अपमान नहीं है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ जवाबदेही से मुक्ति होना नहीं है।
मी लॉर्ड्स लोग बताएं कि जजों के चयन का मापदंड क्या है और इसके लिए वे सवर्णों को ही प्राथमिकता क्यों देते हैं?
एक तरफ़ पार्टी, परिवार और क्षेत्र की जनता विधायक उमाशंकर सिंह जी के जाने के बाद शोक में डूबे हैं और दूसरी तरफ़ ये लोग व्यक्ति के जाने पर उपहास उड़ाने का काम कर रहे हैं।
आप कल्पना कीजिए इनके अंदर इंसानियत नाम की कोई चीज़ बची है जो इनके लहूँ में बह रही हो?
काफी एससी चाहते है कि हम जंतर मंतर पर कपड़ा फाड़ प्रदर्शन करे। जबकिं;
1.अनुसुचित जाति का 80% गाँवो में रहता है। उनके पास जमीन नही है, रोजगार के लिए व्यापार नही है।।
2.अधिकतर दुसरो के खेतों में मजदूर है।।असली किसान यह ही वर्ग है क्योंकि खेतो में मजदूरी करके फसल यह ही उगाता है।
3.इनके पास इतना पैसा तक नही होता कि इंटर तक कि पढाई भी सही सही कर सके। काफी ऐसे मिलते है जिनके पास किराए तक के पैसे नही होते है। किसी तरह इंटर कर भी ली तो उसके बाद क्या करे। यह उनके सामने समस्या आती है।
4.कल एक एससी अधिकारी ने मुझे कहा कि;
तुम प्रदर्शन क्यो नह करते हो?"
मेरा जवाब था कि;
"हम लगातार प्रदर्शन करते है। लेकिन हमारे प्रदर्शन सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए है। हमारे प्रदर्शन में जो कुछ प्रयास हम करते है उसमे इस हाशिये के समाज के इवो को Pay back to Society के माध्यम से;
कौन सा कोर्स करना चाहिए।
मार्किट में किस कोर्स की डिमांड है।
एजुकेशन लोन कैसे मिल सकता है।।
कुछ फीस वग़ैरह भरने में सहायता करवा देते है।।
5.अब हम ऐसे समाज से आते है जिसका 90% उस लेवल तक नही पहुचा की उन्हें जंतर मंतर पर कपड़ा फाड़ प्रदर्शन ही करने चाहिए। उनकी जड़ कमजोर है। हम उनकी कमजोर जड़ को थोड़ा प्रयास से ही सही लेकिन मजबूत करने की कोशिस कर रहे है।
इंहा मैने इस अधिकारी को कहा कि;
"चलो कभी हमारे साथ इस प्रदर्शन में। इस प्रदर्शन में हमारी तरह जेब ढीली करनी पड़ेगी। कर दोगे?"
उसका अभी तक जवाब नही आया है । 90% लोगो का इसी प्रकार जवाब आता भी नही। Pay back to Society करने वाले एससी सरकारी कर्मचारी इतने कम प्रतिशत में है जिन्हें उँगलियी पर आप आसपास देखकर गिन सकते है।
6.सबसे मुख्य बात की;
"इस सबसे अंतिम पायदान पर खड़े लोगो के लिए कब देश मे आंदोलन हुआ? किसने किया? कब किया?"
7.मेने कभी गैर एससी ही नही बल्कि एससी तक को इस समाज के लिए प्रदर्शन करते हुए नही देखा है।।एससी easy सभी के लिए उपलब्ध है। लेकिन कोई भी उंसके लिए उपलब्ध नही है। इसका कारण भी आसानी से सभी के लिए उपलब्ध होना है क्योंकि जो हमेशा उपलब्ध रहता है उसका कभी महत्व नही समझा जाता है।।
खैर;
"उन सभी एससी सरकारी कर्मचारियों का धन्यवाद जो अपने स्तर से, या अन्य के माध्यम से इस सबसे अंतिम पायदान पर खड़े समाज की मदद करके बाबा साहब व मान्यवर के सपने को पूरा कर रहे है"
विकास कुमार जाटव
Young lawyers & law students should remember that Judicial Services & APP/ADA exams bhi ekdum maha ghatiya tareeke se conduct hote hain.
No timely evaluation, rules changed after the notification, incorrect questions & answers, and mains answer sheets change during evaluation.
मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है बड़ा ट्रेंड देखकर " गुनाहो का देवता"पढ़ी लेकिन पढ़कर समझ आया कि इसमें सुधा और चंदर के प्रेम के अलावा मुझे खास कुछ नहीं मिला। 😅
वैसे भी मुझे प्रेम वाली किताबों और शायरी में ज़रा भी रुचि नहीं है। 🤣📚