बहुजन सामाजिक आंदोलन वर्षों के कठोर त्याग व बलिदान के आधार पर खड़ा हुआ है, यह इतनी आसानी से ख़त्म होने वाला नहीं. आंदोलन की गति धीमी हो सकती है पर रुक नहीं सकती
-देश के छात्रों व युवाओं केे आन्दोलन के चलते आज केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिये जाने का फैसला उचित, जो यह पहले ही ले लिया जाता तो बेहतर होता। साथ ही, हमारी पार्टी केन्द्र सरकार से यह भी अपेक्षा करती है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जन्तर-मन्तर पर शान्तिमय ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्ते लड़के व लड़कियों पर बरबर्तापूर्वक लाठी, डन्डों आदि से चोट पहुँचायी है जिससे ये बड़ी संख्या में गम्भीर रूप से घायल हुए, उनपर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिये।
-और ख़ास तौर से जिन पुरूष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के साथ बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी की और बल प्रयाग किया, उनको चिन्हित करके, उनके खिलाफ अनुशासनिक एवं क्रिमनल केस चला कर सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिये, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घिनौनी हरकत करने की कोई हिम्मत ना कर सके।
- इसके साथ-साथ, सरकार को आन्दोलन कर रहे छात्रों व युवाओं के ख़िलाफ जो भी FIR या complaint दायर की गई है, उन सभी को वापस ले लिया जाये, जिससे इनको आगे चलकर थानों व कोर्ट कचहरी के चक्कर ना काटने पड़े और इस वजह से उनका भविष्य भी ख़राब ना हो, जिससे फिर देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बन सके।
- साथ ही मेरा सभी आन्दोलनकारियों से यह कहना है कि वो इस मामले में किसी भी पार्टी को उनके इस संघर्ष का राजनीतिकरण ना करने दें तथा अपने भविष्य को भी ख़राब ना होने दें।
दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ यूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ख़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन्य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तरह से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्याय एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ अपने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. व बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता यही है कि सर्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा तो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने का खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सकता है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक की अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.एस.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्टियों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछाड़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा सके, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
कांशीराम के सिपाहियों ने बारिश से बचने के लिए कुर्सियों को सिर पर रख लिया लेकिन मैदान में कुर्सी छोड़कर नहीं भागे।
यही जोश, यही जुनून और जज़्बा कांशीराम साहब ने अपने तैयार किए गए सिपाहियों के अंदर भरा है और ऐसे समर्पित भाव के लोग आपको किसी भी दल में नहीं मिलेंगे।
जय भीम जय बसपा जय कांशीराम
परम आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी ज़िंदाबाद
मायावती नाम है स्वाभिमान का
मायावती नाम है सम्मान का
मायावती नाम है दृढ़निश्चय का
मायावती नाम है आत्मविश्वास का
मायावती नाम है बहुजनों के गौरव का
मायावती नाम है समानता का
मायावती नाम है संकल्प का
मायावती नाम है साहसिक शासन का🔥
समाजवादी पार्टी का असली चेहरा!
अखिलेश यादव दलित नेता से ऑफिस में उठक-बैठक लगवा रहे हैं।
क्या यही है 'सपा का पीड़ीए
बहुजन समाज सब देख रहा है।
जातिवाद की राजनीति बंद करो!
#SPExposed#DalitInsult#BahujanAwakening
देश के मुसलमानो अब तो समझ जाइए भाजपा की असली बी टीम कौन है, प्रधानमंत्री जी ने सदन मे कहा अखिलेश यादव जी हमारे मित्र हैं और कभी-कभी हमारी मदद करते रहते हैं यह मदद आपको 2027 में देखने को मिलेगी सपा वाले पूरी कोशिश करेंगे भाजपा को जिताने की
@AnandAkash_BSP@MuslimArmyIN@Bsp4u
विशाल आबादी वाले अपने भारत देश में ’बहुजन समाज’ अर्थात् बहुजनों के मसीहा भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनकी जयंती पर प्रातः मेरे द्वारा शत्-शत् नमन, पुष्पांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ ही बी.एस.पी. के लोगों द्वारा पूरे देश भर में ख़ुद व अपने परिवार सहित उन्हें पूरी मिशनरी भावना के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के लिये सभी लोगों का तहेदिल से आभार, शुक्रिया एवं धन्यवाद।
सर्वविदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का पूरा जीवन देश के ग़रीबों उपेक्षितों, शोषितों तथा जातिवाद एवं सामंतवाद से पीड़ित महिलाओं आदि समेत ’बहुजन समाज’ की सुरक्षा, सम्मान व उत्थान के लिये अत्यन्त ही कड़े संघर्ष में बीता, और अन्ततः जिसकी गारण्टी उन्होंने संविधान में सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक कार्य किया और अमर हो गये और जिसके लिये देश हमेशा उनका कृतज्ञ रहेगा।
किन्तु काश, देश की केन्द्र व यहाँ राज्यों की सत्ता में रहने वाली पार्टियाँ बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अति-मानवतावादी, सर्वजन-हितैषी व बहुजन-कल्याणकारी संविधान के पवित्र उद्देश्यों को प्राप्त करने में सही से सफल हो पातीं तो भारत अभी तक स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर व विकसित देश बनकर यहाँ के करोड़ों बहुजनों की अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, जातिवादी द्वेष, शोषण व जुल्म-ज़्यादती आदि से मुक्त समता एवं न्याय-युक्त जीवन लोगों को ज़रूर दे पाता।
अगर ऐसा नहीं हो पाया है तो क्यों? इसका जवाब ढूंढने पर देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ का कारवाँ चुनावी सफलता भी हासिल करके अपनी मंज़िल की ओर ज़रूर आगे बढ़ेगा। जय भीम, जय भारत
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वेष आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
मुझसे बड़ा धोखा शायद ही इसने किसी को दिया होगा भाई @AjazkhanActor 💔
आपका दर्द समझ सकती हूँ... वो वादे, वो भरोसा, सब झूठा निकला पर अब सच सबके सामने है।
वादे निभाना उनको नहीं आता जिनके इरादे काले हों ख़ून में ग़द्दारी हो !!
मुसलमान समाज भी अब जाग रहा है ये BJP का प्यादा है, जो एकता तोड़ने आया धीरे-धीरे सब जान जाएंगे।
#ExposeChandrashekhar #DalitMuslimEkta
हम भी संघ परिवार से है..अगर पुलिस परेशान करेगी तो परिवार सहित आग लगा लूंगा...जिम्मेदार यूपी पुलिस होगी..!
आगरा में टोल कर्मी को विद्यायक पुत्र ने पीटा था..भद्दी भद्दी गालियां दी थी..वीडियो वायरल हुआ तो यूपी पुलिस हरकत में आई..!
अब खबर है कि पुलिस जांच के नाम पर आधी रात पीड़ित के घर पहुंच रही है..पीड़ित के भाई को फर्जी मुकदमे में फंसाने की बात कर रही है।