मा. @myogiadityanath जी, क्या लाइनमैन, टेक्नीशियन, SSO, TG-2 या JE पहले ऑफिस जाकर हाजिरी लगाए या सीधे दुर्घटना स्थल पर दौड़े?
मा. @aksharmaBharat जी, क्या उपभोक्ता अंधेरे में इंतजार करेगा क्योंकि कर्मचारी ऐप पर उलझा है?
@UPPCLLKO क्या जनसुरक्षा से बड़ा कोई "ऐप" हो सकता है?
तेल में भी धांधली? संदीप चौधरी ने खोल दिया एथेनॉल के खेल का पूरा सच!
कोई परिवार रात में कहीं जा रहा हो महिलाओं समेत और गाड़ी बंद हो जाए सुनसान रास्ते पर तो सोचो क्या दिक्कतें आएंगी उनको कौन ज़िम्मेदार होगा?
गडकरी के काम को लोग सबसे बढ़िया मानते थे, इन्होंने ने भी अपना असली चेहरा दिखा दिया इतने महंगे टोल रोड पहली ही बारिश में दम तोड़ दे रहे है गन्ना के रस को बेचकर बेटों को की कंपनियों ये फायदा करा रहे है
किसी भी पत्रकार में इतनी हिम्मत नहीं वह नितिन गडकरी के बेटों को नाम ले
आपके बेबाक पत्रकारिकता के लिए आप को अभिनंदन संदीप जी🙏
उत्तर प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
पावर कॉरपोरेशन के हालत बयां करता ये AI वीडियो।
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ऊर्जा मंत्री के निर्देश के अनुसार मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने की मांग : संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन: ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का तीन वर्ष बाद भी पालन न होना चिंताजनक : उत्पीड़न समाप्त कर ऊर्जा निगमों में स्वस्थ कार्य वातावरण बनाया जाए
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को ज्ञापन सौंपकर मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल वापस लेने की मांग की। संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में सकारात्मक एवं सहयोगात्मक कार्य वातावरण स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी लंबित दंडात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए।
संघर्ष समिति ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित मामलों को समाप्त करने के बजाय उत्पादन निगम के कर्मचारी श्री दिनेश सिंह को वृहद दंड दिया गया है, जिससे प्रदेश भर के बिजली कर्मियों में भारी असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त है।
केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को अवगत कराया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर एवं मुकदमे वापस लिए जाएं।
संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन के साथ माननीय ऊर्जा मंत्री एवं संघर्ष समिति की संयुक्त प्रेस वार्ता की प्रतिलिपि तथा उत्तर प्रदेश सूचना विभाग द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य की प्रति भी अध्यक्ष को उपलब्ध कराई। संघर्ष समिति ने कहा कि उक्त वक्तव्य में ऊर्जा मंत्री ने आंदोलन समाप्त करने के लिए संघर्ष समिति का आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन से संबंधित सभी दंडात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त की जाएं।
संघर्ष समिति ने आश्चर्य एवं अफसोस व्यक्त किया कि ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उनका पूर्ण पालन नहीं हुआ है। इससे सरकार एवं प्रबंधन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान में भीषण गर्मी के दौरान बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को कार्य से पृथक किए जाने के कारण विद्युत व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा उपभोक्ताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर संविदा कर्मियों की बहाली की जानी चाहिए, ताकि बिजली कर्मी पूर्ण मनोयोग एवं समर्पण के साथ विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अपना योगदान दे सकें।
संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से आग्रह किया कि वह संवाद, सहयोग एवं विश्वास का वातावरण स्थापित करते हुए सभी लंबित मामलों का न्यायोचित समाधान करे, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े और प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल में जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, श्री चंद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी,के एस रावत, आर सी पाल सम्मिलित थे।
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मा. @myogiadityanath जी, एक संतुष्ट कर्मचारी ही बेहतर सेवा दे सकता है। परिवार से 500-700 किमी दूर तैनाती के कारण कर्मचारियों को मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
@UPPCLLKO से मांग है कि मानवीय आधार पर अंतर-डिस्कॉम स्थानांतरण एवं आमेलन नीति को पुनः लागू किया जाए। @UPGovt
राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम में आज शाम 6 बजे जूनियर इंजीनियर अशोक कुमार पर उपभोक्ता और उसके सहयोगियों ने जानलेवा हमला किया। इस घटना में उपभोक्ता ने जूनियर इंजीनियर को कुत्ते से कटवाए भी। इस हमले में जूनियर इंजीनियर जख्मी हो गया।
बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, राजधानी लखनऊ में कानून का राज समाप्त हो गया है, कानून का किसी को डर नहीं है, अपराधी बेखौफ खुलेआम घूम रहे हैं, एक लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार की हिंसा कतई बर्दाश्त करने योग्य नहीं है, अगर प्रदेश में सरकारी कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता का क्या हाल होगा।
अगर सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर ही इस प्रकार से हिंसा का शिकार हो और उस पर जानलेवा हमला हो तो सोचिए कैसे इस प्रदेश की बिजली व्यवस्था चल पाएगी।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि इस घटना को संज्ञान में लेते हुए तत्काल हमलावारो को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जो एक नजीर बने और बिजली कर्मचारियों पर हमला करने से पहले कोई भी अराजक तत्व 10 बार सोचें।
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वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त — जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, बिजली कर्मी सड़कों पर उतरने को मजबूर:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन में लागू की गई तथाकथित वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था एवं अनुभवी संविदा कर्मियों की छटनी ने राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। बिजली व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता के नाम पर लागू की गई यह व्यवस्था आज उपभोक्ताओं, बिजली कर्मियों और स्वयं विभागीय कार्यप्रणाली के लिए गंभीर संकट का कारण बन चुकी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहले किसी क्षेत्र की बिजली समस्या के लिए संबंधित जेई अथवा एसडीओ सीधे जिम्मेदार होते थे, जिससे उपभोक्ताओं को त्वरित समाधान मिलता था। लेकिन अब कार्यों को अलग-अलग विंगों में बाँट देने से जवाबदेही समाप्त हो गई है। उपभोक्ता यह तक नहीं समझ पा रहा कि उसकी समस्या का वास्तविक जिम्मेदार अधिकारी कौन है।
नई व्यवस्था में शिकायत निस्तारण को पूरी तरह 1912 एवं ऑनलाइन पोर्टल पर निर्भर बना दिया गया है। शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं, लेकिन उनका समाधान समय पर नहीं हो रहा। आम जनता घंटों बिजली कटौती, गलत बिलिंग और तकनीकी समस्याओं से परेशान है जबकि जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी फाइलों और पोर्टलों के पीछे छिपे हुए हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि ग्राउंड लेवल पर समन्वय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। बिलिंग टीम अलग, मीटर टीम अलग और लाइन स्टाफ अलग होने के कारण एक छोटे से कार्य के लिए उपभोक्ताओं को कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। “Faceless System” के नाम पर ऐसी व्यवस्था बना दी गई है जिसमें जनता को पता ही नहीं चल रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी कौन है।इससे उपभोक्ताओं और विभाग के बीच संवादहीनता तेजी से बढ़ी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में नए विद्युत संयोजन समय से नहीं मिल रहे हैं, मीटर रीडिंग में भारी देरी हो रही है तथा हजारों उपभोक्ताओं के बिल समय से जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में तकनीकी खामियों, पूरी विफलता, बैलेन्स मिसमैच तथा गलत बिलिंग जैसी समस्याओं ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि शीर्ष प्रबंधन पूरी तरह जमीनी सच्चाइयों से कटा हुआ है और तुगलकी निर्णय थोपकर बिजली व्यवस्था को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। प्रदेश की जनता बिजली संकट से त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं बिजली कर्मचारी अत्यधिक कार्यभार, संसाधनों की कमी और उत्पीड़नात्मक नीतियों के कारण मानसिक दबाव में कार्य करने को विवश हैं।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की विफल व्यवस्था को तत्काल वापस नहीं लिया गया तथा बिजली कर्मियों और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कर अभियंताओं को विश्वास में लेकर व्यावहारिक व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बिजली कर्मी अब सड़कों पर उतरकर प्रबंधन की मनमानी नीतियों का लोकतांत्रिक विरोध करेंगे।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि बिजली व्यवस्था को बचाने, उपभोक्ताओं को राहत देने तथा ऊर्जा निगमों में जवाबदेही और समन्वय बहाल करने हेतु तत्काल हस्तक्षेप किया जाए, अन्यथा स्थिति और विस्फोटक होगी जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।
उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जन जागरण अभियान के अंतर्गत आज विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर और प्रयागराज में सभा हुई। सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम,जवाहर लाल विश्वकर्मा, प्रेम नाथ राय ने संबोधित किया।
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वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है।
पावर कारपोरेशन के प्रबंधन के मनमानी तरीके से राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए।
पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
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एक वर्ष से वार्ता नहीं, उत्पीड़न जारी — प्रबंधन की उदासीनता से बिगड़ रही बिजली व्यवस्था : संघर्ष समिति के सुझावों पर अमल होता तो उपभोक्ताओं को न झेलनी पड़ती आज की परेशानियां:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले एक वर्ष से संघर्ष समिति के साथ कोई वार्ता नहीं की गई है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों का सिलसिला लगातार जारी है। इससे कार्यस्थल का वातावरण खराब हो रहा है और बिजली व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा निरंतर कर्मचारी संगठनों से संवाद पर बल दिया जाता रहा है तथा मुख्य सचिव स्तर से भी नियमित वार्ता के निर्देश हैं। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन का यह रवैया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और विरोधाभासी है।
संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि ठीक एक वर्ष पूर्व, 05 मई 2025 को क्रमिक अनशन के दौरान संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। इसके बाद प्रबंधन को वार्ता के लिए बाध्य होना पड़ा और 12 मई 2025 को विस्तृत बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में संघर्ष समिति ने बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु एक व्यापक और ठोस प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया था। उस समय अध्यक्ष द्वारा इस पर अध्ययन कर आगे वार्ता करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक उस पर कोई प्रगति नहीं हुई।
संघर्ष समिति का कहना है कि यदि उस समय प्रस्तुत सुझावों पर गंभीरता से विचार कर ठोस निर्णय लिए गए होते, तो आज उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति से संबंधित जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वे काफी हद तक टाली जा सकती थीं।
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि संवाद के बजाय दमनात्मक नीति अपनाकर भय का वातावरण बनाकर बिजली व्यवस्था चलाने का प्रयास किया जा रहा है, जो न तो व्यावहारिक है और न ही टिकाऊ।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि भीषण गर्मी को देखते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रबंधन तत्काल सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस ले तथा संघर्ष समिति के साथ सम्मानजनक और सार्थक वार्ता शुरू करे। साथ ही, पूर्व में दिए गए सुझावों के आधार पर बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
उत्पीड़न के विरोध में 16 अप्रैल से चल रहे जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज चित्रकूट एवं बांदा में सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों श्री जितेन्द्र सिंह गुर्जर एवं श्री महेन्द्र राय ने संबोधित किया और कर्मचारियों से एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस न होने पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन की:15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशव्यापी “जन-जागरण अभियान” का ऐलान : सभी डिस्कॉम मुख्यालय पर प्रदर्शन:उत्पीड़न होने पर सीधी कार्रवाई की चेतावानी
@ChairmanUppcl@UPPCLLKO
@rvppks_puvvnl_@UPPCLLKO@myogioffice@aksharmaBharat@ANI@RVPPKSUP हर टेंडर में दलाली करने वाले,प्राइवेटाइजेशन कर के दलाली करने वाले जो दिन रात दलाली कर के अपनी संपत्ति में इजाफा कर रहे है यह किसी से छुपा नहीं है दूसरे के बेटे को दलाल और अपने बेटे को साहबजादा कहने वाले दलाल की नजर में मेहनती कर्मचारी दलाल लग रहे है हम सब इसकी कड़ी निन्दा करते है