लो भाई अब एक और नया प्रकरण..@UPPCLLKO
यहां तो.. "करंट विभाग" के.. @Mvvnlcisgomti2 में कृपा प्राप्त तानाशाह अफसर का राज हैं..🤔..ये हम नहीं..उत्तर प्रदेश मजदूर संघ के.."महामंत्री" द्वारा सार्वजनिक किया गया..@EMofficeUP
चीफ साहब स्वयं को विभाग का मालिक और बाकी कर्मचारियों को..समझते हैं अपना.. नौकर!
क्योंकि चीफ साहब बात-बात में अध्यक्ष पावर कारपोरेशन @mduppcl को अपना करीबी बताकर कर्मचारियों को करते हैं..प्रताड़ित।
महिला हो या पुरुष..कर्मचारियों से अभद्रता व असंसदीय शब्दों का लगातार प्रयोग करके प्रताड़ित किए जाना प्रमुख है।
सार्वजनिक रूप से कार्मिकों को अपमानित किया करते है।
दिनांक 31 अक्टूबर-2025 को भी सर्किल 8 में तैनात कार्यालय सहायक श्री शौर्य द्विवेदी को दूरभाष पर इतना हड़का दिया गया कि यो कार्यालय में ही बेहोश होकर गिर पड़ा।
साथी कर्मियों द्वारा उसे चरक अस्तपताल लखनऊ में भर्ती कराया गया जहाँ आई०सी०यू० में ऑक्सीजन व दवा कर किसी तरह उसके प्राण बचायें गये।
साथ ही कहा कि... आपका यह कार्य कार्मिकों की स्वतंत्रता व मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है..
यदि आपकी मनमानी और तानाशाही इसी तरह जारी रही तो शीर्घ ही कर्मचारियों के साथ कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी आपकी की ही होगी--सुहैल आबिद।
आखिर ऐसे जिम्मेदार अफसरों से क्या ऐसी उम्मीद की जा सकती है..
कृपया सरकार और विभाग हित में प्रकरण की संपूर्ण निष्पक्ष जांच कर..दोषी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही जाना ही हितकारी होगा..श्रीमान..@myogiadityanath@aksharmaBharat@EMofficeUP
बिना संसाधन व व्यवस्था के किस नियम/अधिनियम से @UPPCLLKO मे बायोमेट्रिक लागु की जा रही है, जबकि कर्मचारियों एवं श्रम संघो से वार्ता/चर्चा तक भी नहीं की गई:-
❌ मोबाइल नहीं
❌ सिम नहीं
❌ डाटा नहीं
❌ ट्रेनिंग नहीं
✅ लेकिन वेतन रोका गया।
@CMOfficeUP@EMofficeUP@UPGovt@VKSSSUP
बिना संसाधन व व्यवस्था के किस नियम/अधिनियम से @UPPCLLKO मे बायोमेट्रिक लागु की जा रही है, जबकि कर्मचारियों एवं श्रम संघो से वार्ता/चर्चा तक भी नहीं की गई:-
❌ मोबाइल नहीं
❌ सिम नहीं
❌ डाटा नहीं
❌ ट्रेनिंग नहीं
✅ लेकिन वेतन रोका गया।
@CMOfficeUP@EMofficeUP@UPGovt@VKSSSUP
सप्ताहांत में संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री और प्रबंधन से पूछे पांच नये सवाल: 22 जून की बिजली महा पंचायत में बिजली कर्मियों के परिवार भी सम्मिलित होंगे: अवकाश के दिन आवासीय कालोनियों में सभाओं का दौर:
निजीकरण के विरोध में चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत संघर्ष समिति ने सप्ताहांत में निजीकरण को लेकर ऊर्जा मंत्री और पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पांच नए सवाल पूछे हैं। 22 जून को लखनऊ में हो रही बिजली महापंचायत में बिजली कर्मियों के साथ उनके परिवार माता, पिता, पत्नी और बच्चे भी सम्मिलित होंगे।
घाटे के नाम पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है। पहला प्रश्न है - क्या यह सच है कि वर्ष 2024 - 25 में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने कई निजी घरानों के उत्पादन घरों से एक भी यूनिट बिजली नहीं खरीदी और इन निजी घरानों को फिक्स कॉस्ट के एवज में 6761 करोड रुपए का भुगतान किया है ? यदि यह सच है तो इतने बड़े घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
सरकारी क्षेत्र में विद्युत उत्पादन निगम से 04 रुपए 26 पैसे प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलती है और जल विद्युत की बिजली मात्र 01रुपए प्रति यूनिट की दर पर मिलती है। सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए उत्पादन निगम और जल विद्युत निगम में नए बिजली घरों की स्थापना नहीं की ।इस कारण बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर निजी घरानों से काफी महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है । दूसरा प्रश्न है- क्या यह सच है कि के एस के महानंदी से 11 रुपए 58 पैसे प्रति यूनिट, बजाज के छोटे बिजली घरों से 10 रुपए प्रति यूनिट, ललितपुर से 06.50 रुपए प्रति यूनिट,रोजा से 06.05 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है ? यदि यह सच है तो इससे होने वाले हजारों करोड़ रुपए के घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
ऊर्जा मंत्री कह रहे हैं कि सरकार ने पाया है कि निजी कंपनियों के पास समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर तकनीक और प्रबंध कौशल है। दिल्ली में रिलायंस बीएसईएस की दो कंपनियां बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर पिछले 23 वर्ष से काम कर रही है। 23 वर्ष काम करने के बाद रिलायंस की इन दोनों कंपनियों का बेहतर प्रबंधन कौशल यह है कि इन कंपनियों पर दिल्ली जैसे छोटे राज्य में 25000 करोड रुपए से ज्यादा का दिल्ली की पावर यूटिलिटीज का बकाया हो गया है। दिल्ली ट्रांस्को का 10000 करोड रुपए का बकाया है, प्रगति पावर जनरेशन लिमिटेड का 5600 करोड रुपए का बकाया है और इंद्रप्रस्थ पावर जेनरेशन कंपनी का 5000 करोड रुपए का बकाया है। तीसरा प्रश्न है - क्या यह सच है कि दिल्ली की भाजपा सरकार निजी क्षेत्र की विफलता को देखते हुए बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करने जा रही है ? यदि यह सच है तो भारत की राजधानी में निजी क्षेत्र की इतनी बड़ी विफलता को देखते हुए भी उत्तर प्रदेश के बेहद गरीब 42 जनपदों पर निजीकरण क्यों थोपा जा रहा है ?
ग्रेटर नोएडा का निजीकरण 1993 में किया गया था। ग्रेटर नोएडा एक औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र है। ग्रेटर नोएडा में बिजली का लगभग 84% भार औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का है जिनसे मुनाफा मिलता है। ग्रेटर नोएडा में कार्य कर रही नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का घाटे वाले क्षेत्र मसलन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के प्रति बिजली आपूर्ति का व्यवहार अच्छा नहीं है। चौथा प्रश्न है - क्या यह सच है कि उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोएडा में नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कराने का मुकदमा लड़ रही है ? यदि यह सच है तो जो निजीकरण औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र में विफल हो गया है उसे पूर्वांचल और बुंदेलखंड की बेहद गरीब जनता पर क्यों थोपा जा रहा है ?
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड कई निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीद रहा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लेने के बाद यह पता चला है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को सबसे सस्ते बिजली क्रय करार आवंटित किए गए हैं । पांचवा प्रश्न है - यदि यह सच है तो निजीकरण के ठीक पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की सबसे सस्ते पावर परचेज एग्रीमेंट आवंटित करना क्या प्रस्तावित निजीकरण के बाद निजी घरानों की परोक्ष रूप से मदद करना नहीं है ?
@narendramodi@myogiadityanath@aksharmaBharat
@ChiefSecy_UP
@UPPCLLKO@yadavakhilesh
अवकाश के दिनों में इस तरह का आदेश निकालना किस हिसाब से वैधानिक है? हमेशा ही छुट्टी के दिनों में इस तरह के आदेश जारी हो जाते हैं! क्या इंसान के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं हो रहा.