जिस दिन तुम उसे देखोगे, हाल ये होगा कि हर दूध पिलानेवाली अपने दूध पीते बच्चे से ग़ाफ़िल हो जाएगी, हर हामिला (गर्भवती) का हमल (गर्भ) गिर जाएगा, और लोग तुमको मदहोश नज़र आएँगे; हालाँकि वो नशे में न होंगे, बल्कि अल्लाह का अज़ाब ही कुछ ऐसा सख़्त होगा।
ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो, न मर्द दुसरे मर्दों का मज़ाक़ उड़ाएँ, हो सकता है कि वो उनसे बेहतर हों, और न औरतें दूसरी औरतों का मज़ाक़ उड़ाएँ, हो सकता है कि वो उनसे बेहतर हों। आपस में एक-दूसरे पर तअन न करो और न एक-दूसरे को बुरे……½
अलक़ाब से याद करो। ईमान लाने के बाद फ़िस्क़ में नाम पैदा करना बहुत बुरी बात है। जो लोग इस रविश से बाज़ न आएँ वही ज़ालिम हैं।
[ सूरह : हुजरात, आयत : 11 ] ……²/²
ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो, अगर तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वो तुम्हारी मदद करेगा रहे वो लोग जिन्होंने कुफ़्र किया है, तो उनके लिये हलाकत है,और अल्लाह ने उनके आमाल को भटका दिया है।और तुम्हारे क़दम जमा देगा। क्योंकि उन्होंने उस चीज़…½
अल्लाह के कानून के मुताबिक फैसले करें।
तुम्हारे बीच जिस मामले में भी इख़्तिलाफ़ (मतभेद) हो, उसका फ़ैसला करना अल्लाह का काम है। वही अल्लाह मेरा रब है, उसी पर मैंने भरोसा किया और उसी की तरफ़ मैं रुजू करता (पलटता) हूँ।
📓(कुरआन 42:10)
”इब्न-ए-आदम कहता है कि मेरा माल, मेरा माल, हालाँकि तुम्हारा माल सिर्फ़ वो है जो तुमने सदक़ा कर दिया और उसे आगे चला दिया, और खाया और उसे ख़त्म कर दिया या पहना और उसे पुराना कर दिया।"
जामि अत तिरमिज़ी: 2342
याद रखें
दीन में सुन्नत सारी दुनिया में एक है लेकिन बिद्दत हर इलाके हर मुल्क में अलग अलग है।
सुन्नत हमारी कौम को मुत्तहिद करती है और बिद्दत हमें फिरको में तकसीम करती है।
हमारा रब एक है, किताब एक, किबला एक और मकसद एक!
फिर हम हम एक ना होंगे तो ज़ालिम हम पर जुल्म करेंगे ही।
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दूसरों को नुकसान पहुंचाना
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:
"जो दूसरे को नुकसान पहुंचाए, अल्लाह उसे नुकसान पहुंचाएगा और जो दूसरे को तकलीफ देगा अल्लाह उसे तकलीफ देगा।
📕(सुन्न तिर्मिजी़:1940)
@_DailyHadith__ @Muhammad4peace_
अल्लाह तआला फरमाता है:
और अगर तुम लोग (किसी के ज़ुल्म का) बदला लो तो उतना बदला लो जितनी ज़्यादती तुम्हारे साथ की गयी थी। और अगर सब्र ही कर लो तो यक़ीनन यह सब्र करने वालों के हक़ में बहुत बेहतर है।
(सूरह अल नहल आयत न. 126)
@Muhammad4peace_
#Quran
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-
“मोमिन मर्द और मोमिन औरत की जान, औलाद और माल में आज़माइशें आती रहतीं है यंहा तक के जब वह मरने के बाद अल्लाह से मुलाक़ात करते है तो इन पर कोई गुनाह नहीं होता”
(तिर्मिज़ी 2399)
#HadithOfTheDay
ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ
और इन्सानों ही में से कोई ऐसा भी है जो दिल लुभानेवाली बातें ख़रीदकर लाता है, ताकि लोगों को अल्लाह के रास्ते से इल्म के बिना भटका दे और इस रास्ते की दावत को मज़ाक़ में उड़ा दे। ऐसे लोगों के लिये सख़्त रुसवा करनेवाला अज़ाब है। …½
ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ
(ऐ नबी) तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, न उन बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हो, जो पीठ फेरे चले जा रहे हों।
सूरह : रूम, आयत : 52