इंसान : या अल्लाह तेरी मदद कैसे मिलेगी ?
अल्लाहः- सब्र और नमाज़ से मदद लिया करो । [ 2:45 ]
इंसान : मैं बहुत गुनाहगार हूं?
अल्लाहः- अल्लाह की रहमत से मायूस न हो अल्लाह सब गुनाह बख़्श देगा । [ 39:53 ]
इंसान : मैं बहुत अकेला हूं , तू कहां मिलेगा ?
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*🇮🇳۔|[وطن سے محبت]|۔🇮🇳*
حضرت عبداللہ بن عباس رضی الله عنہما کہتے ہیں کہ رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے مکہ کو خطاب کرتے ہوئے فرمایا: *”کتنا پاکیزہ شہر ہے تو اور تو کتنا مجھے محبوب ہے، میری قوم نے مجھے تجھ سے نہ نکالا ہوتا تو میں تیرے علاوہ کہیں اور نہ رہتا“۔*
*سنن ترمذی:3926*
वजाहत:
आदमी इस माल को अपना माल समझता है जो उसके पास है हालांकि हकीकी माल वो है जो सवाब की ख़ातिर उसने सदक़ा कर दिया, और यौम जज़ा के लिए जिसे उसने बाकि रख छोड़ा है, बाकि माल खा पी कर उसे ख़त्म कर दिया या पहन कर उसे बोसीधा और पुराना कर दिया, सदक़ा किए हुए माल के इलावा कोई माल ++
”इब्न-ए-आदम कहता है कि मेरा माल, मेरा माल, हालाँकि तुम्हारा माल सिर्फ़ वो है जो तुमने सदक़ा कर दिया और उसे आगे चला दिया, और खाया और उसे ख़त्म कर दिया या पहना और उसे पुराना कर दिया।"
जामि अत तिरमिज़ी: 2342
अबदुल्लाह बिन शिख़ैर रज़ि अल्लाह अन्हु से रिवायत है कि वो नबी अकरम ﷺ की ख़िदमत में पहुंचे और आप _"अल हा कुमुत तकासुर"_ की तिलावत कर रहे थे तो आपने फ़रमाया :
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