प्रिय युवाओं
ज्ञानेश चोर हो सकते हैं. पेपर लीक हो सकता है. बेरोजगारी और महंगाई बढ़ सकती है. देश अंबानी-अदानी चला सकते हैं. लेकिन अगर तुमको लगता है कि इन आंदोलन से कल कोई दूसरा नेता आकर देश में सब कुछ ठीक कर देगा, तो ये तुम्हारी बुद्धि की बलिहारी है.
दरअसल तुम अभी नहीं जान सके हो कि इस देश में आंदोलन एक बौद्धिक व्यापार है. हर आंदोलन से राजनीति के बाजार में कुछ नई दुकाने खुल जाती हैं. कुछ चल पड़ती हैं और कुछ बंद हो जाती हैं.
फिर इस लोकतंत्र के क्षितिज पर कुछ देर के लिए एक धुआँ उठता है और इस देश के राजनीतिक कवि-लेखक-पत्रकार नारे लगाते हैं, “देखो-देखो हम ज़िंदा हैं.” और तब तक चिल्लाते हैं जब तक कि उनकी पसंद का नेता कुर्सी पर बैठ नहीं जाता.
इसलिए कहना चाहूँगा, अगर तुम किसी पार्टी के कार्यकर्ता हो तो आंदोलन जरूर करो. कार्यकर्ता का तो फ़र्ज़ है. लेकिन अगर नहीं हो तो फिलहाल पढ़ाई-लिखाई और कैरियर पर ध्यान दो.
अगर एसआईआर में ज्ञानेश ने तुम्हारा नाम काट दिया है तो फ़ार्म 6 भरने का आप्शन अभी भी तुम्हारे पास है. अपना नाम ऑनलाइन जोड़ लो और जब चुनाव आए तब वोट देकर अपना गुस्सा दर्ज कर लेना.
लेकिन ये वक़्त पढ़ने-लिखने और ख़ुद की दुनिया गढ़ने का है. ये बीत जाएगा तो फिर न आएगा. इस देश में तमाम अवसर और नए आसमान आज भी मौजूद हैं. तुम्हारी मेहनत और योग्यता को राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी मिलकर भी नहीं रोक सकते..
मेहनत करके ऐसा सामर्थ्यवान बनो कि कुछ लोगों का जीवन बदल सको. यही सच्ची देश सेवा होगी.
बाक़ी इस आंदोलित भेड़ियाधसान में कुछ नहीं रखा. जिस भैया-दीदी का भाषण सुनकर आज मज़ा आ रहा, वो दस साल बाद पार्टी बदलकर राजनीतिक भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाएँगे. और तुम हाथ मलते रह जावोगे.
कम से कम इतिहास तो यही कहता है.
बिश्वास नहीं तो जेपी के सम्पूर्ण क्रांति से लेकर आज तक हुए आंदोलन का इतिहास उठाकर देख लो, आंदोलन, क्रांति और परिवर्तन के नाम पर भारत की जनता आज तक बेवक़ूफ़ ही बनती आई है. और आगे भी बनती रहेगी. कम से कम तुम तो न बनो.
जेपी के पास तो नैतिक जमीन भी थी, चरित्र भी था. उनके पीछे चलना भी गर्व का विषय था. तुम जिनके पीछे हो उनके पास कुछ नहीं है..बस सत्ता मिलने की देर है..ये भी उतने ही भ्रष्ट, अलोकतांत्रिक और ग़ैरजिम्मेदार हैं…
बुरा लगे तो माफ़ करना… आजकल ऐसी बातें कहने का जमाना नहीं रहा 😌
Atul
@old_cricketer रितेश देशमुख बढिया एक्टर है।हर्ष छाया ने स्वाभिमान में ही इंटेंसिटी दिखा दी थी।स्वाभिमान ने जितने कलाकार दिए उतने कई सीरियल मिलकर न दे पाए।
@MukeshPathakji मेरे कॉलोनी के सवर्ण वोटर नाराज़ है।मैं भी हूँ लेकिन मेरा वोट बीजेपी को ही जायेगा।सवर्णों को सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट की थ्योरी पर अभी और चलना पड़ेगा।
My salute to the Indian pilot Captain Smit Machchhar for his extraordinary bravery.
Despite being stabbed and seriously injured, he fought back, resisted, opened the cockpit door, and enabled passengers and crew to overpower the attacker — preventing a catastrophic mid-air disaster.
He saved the lives of 174 people, including Israeli citizens and other nationals.
I wish Captain Machchhar a speedy and full recovery.
He is a true hero.
Captain Smit Machchhar, the Indian Captain of flydubai Flight 1073, displayed extraordinary courage and presence of mind in the face of a terrifying emergency.
After being stabbed in the cockpit and sustaining serious injuries, Captain Machchhar continued to fight back and, despite his condition, managed to unlock the cockpit door. This allowed fellow crew members and passengers to intervene, helping bring the situation under control and ensuring the safety of everyone on board.
In a moment of extreme danger, he put the lives of his passengers ahead of his own. His courage, quick thinking and determination helped prevent what could have been a devastating tragedy.
India salutes Captain Smit Machchhar for his extraordinary bravery and selfless commitment to duty.
Praying for his speedy recovery, renewed strength and good health.
@MukeshPathakji एक कम्पनी है दक्षिण कोरिया की एटमी बड़े उत्कृष्ट उत्पाद होते है उसके मैं यूजर हूँ।वो पहले अलग तरह के बबल रैप यूज़ करते थे लेकिन अब पेपर यूज़ करते है जिससे प्रोडक्ट टूटते या खराब नहीं होते।
मैं बैंक कर्मचारियों के हफ्ते में 5 डे वर्किंग का पुरजोर समर्थन करता हूं। बल्कि बैंकिंग ही नहीं, भारत की सभी सरकारी और प्राइवेट कंपनियों में 5 डे वर्किंग ही होना चाहिए। इस मामले में सख़्त कानून भी बने तो मैं उसका स्वागत करूंगा।
लेकिन हमारे देश में आज भी नारायण मूर्ति अंकल जैसे लोग हैं, जो हफ्ते में 70-70 घंटे काम करवाने के हिमायती हैं, मगर तिजोरी से सही अनुपात में सैलरी नहीं निकलती। ऐसी परिस्थितियों में इंसान काम तो करता है, लेकिन वो एफिशिएंट नहीं होगा और काम के प्रति समर्पण (dedication) भी नहीं होगा। वो सिर्फ़ 9 से 6 की ड्यूटी करेगा, ओनरशिप नहीं लेगा। ऑफिस के माहौल में ये चीज़ें सबसे ज़रूरी हैं और यहीं से सबसे ज्यादा conflict पैदा होता है।
दुनिया के सारे विकसित देश वर्क-लाइफ बैलेंस को महत्व देते हैं, जिससे मेंटल हेल्थ अच्छा रहता है और आदमी ज्यादा प्रोडक्टिव बनता है। लेकिन हमारे यहां कम पैसे में ज्यादा काम और देर तक काम करवाने की आदत है। टाइम से आना तो आपका संवैधानिक कर्तव्य जैसा है, मगर टाइम से जाना अपराध है।
टाइम पर सैलरी नहीं देना, रोक कर रखना, ब्लैकमेल करना और इसके अलावा भारतीय कंपनियों की एक और खासियत है। वो ज्यादातर 1-30 तारीख की सैलरी महीने के आखिर में या अगले महीने की एक तारीख पर देने की बजाय 7-8 तक या कहीं-कहीं उससे भी लेट देते हैं। ये इसलिए कि स्टाफ छोड़कर जाए तो उसकी सैलरी होल्ड करके उसे ब्लैकमेल किया जाए।
देश में लेबर लॉ भी एक मज़ाक है। कंपनियां सरकार के माध्यम से अपने हिसाब से, खुद के फायदे के लिए नीतियां बनवाती हैं। मालिक की मर्ज़ी होगी, "कल से मत आओ", तो "मत आओ"।
ये तो हो गई ऑफिस की बात और आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा की बात।
इसके अलावा आम आदमी की जिंदगी आसान कैसे बने और उसे कौन से फैक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं, ये बहुत बेसिक चीज़ है, लेकिन इस पर कोई बात ही नहीं होती।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं - शिक्षा, स्वास्थ्य और सोशल सिक्योरिटी।
मिडल क्लास का एक आदमी पूरी जिंदगी इन्हीं में उलझा रहता है। बच्चे के जन्म से लेकर उसे पढ़ाने-लिखाने तक का खर्चा क्या है, वो आप सब जानते हैं, जो बढ़ता ही जा रहा है - क्या गांव और क्या शहर?
स्वास्थ्य का भी वही हाल है। मेडिकल चीज़ों और इलाज़ पर बेइंतहा खर्चा है। सरल शब्दों में, ₹1.5 करोड़ में डॉक्टर बनेंगे तो पैसा तो मरीजों से ही वसूला जाएगा। कोई गंभीर बीमारी हो गई तो आप बर्बाद हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य सरकार अपने नियंत्रण में उत्कृष्ट तरीके से चलाए तो देश की आधी से ज्यादा समस्या ख़त्म हो जाएगी।
लेकिन सरकार क्या कर रही है? स्कूल-कॉलेज बंद हो रहे हैं। जो हैं, उनकी गुणवत्ता भी ख़त्म की जा रही है। इनकी कीमत पर एक पूरी महंगी प्राइवेट लॉबी पनपने दी जा रही है। मध्यम वर्ग बेहाल है।
हॉस्पिटल के नाम पर AIIMS इत्यादि बना तो दिए गए हैं, मगर आपको जरूरत पड़ने पर गोरखपुर, पटना आदि जगहों पर स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही नहीं मिलेंगे, क्योंकि उनकी पोस्टिंग ही नहीं हुई है। मजबूरन सामान्य लोगों को प्राइवेट का ही मुंह देखना पड़ता है।
मेडिकल इंश्योरेंस लो तो क्लेम देने में आनाकानी होती है। आयुष्मान कार्ड का कॉन्सेप्ट बढ़िया है, पर ये सबके लिए नहीं है। जिनके लिए है, उनका कैसा चल रहा है, इसका मुझे ज्यादा अनुभव नहीं है।
तो कुल मिलाकर बात ये है कि उपरोक्त चीज़ें बेसिक वाली हैं, जो हम-आप सबके आम जीवन से जुड़ी हुई हैं। इनको एड्रेस किए बगैर लोगों की जिंदगी आसान कभी नहीं हो सकती।
आम आदमी को सिर्फ़ नौकरी और सैलरी नहीं चाहिए। उसे ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें काम करने के बाद जिंदगी जीने का भी समय हो, बच्चों की अच्छी शिक्षा हो, इलाज़ के लिए घर-जमीन न बेचनी पड़े और भविष्य को लेकर थोड़ी सामाजिक सुरक्षा हो।
यही असली सवाल हैं, जिन पर बात होनी चाहिए।
आज सरोजनीनगर जिसको लखनऊ का एक बाहरी विधानसभा क्षेत्र कहा जाता था, आदरणीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी के आशीर्वाद से सबसे तेज गति से बढ़ते हुई विधानसभा क्षेत्रों में शामिल हो चुका है।
आज सरोजनीनगर की पावन धरती पर पधारकर लखनऊ की ₹12,000 करोड़ की महत्वपूर्ण आवासीय एवं शहरी विकास परियोजनाओं का शुभारंभ एवं शिलान्यास करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी का हृदय से आभार।
माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। सरोजनीनगर को अपने स्नेह और विकास की इस सौगात से जोड़ने के लिए मैं उनका विशेष रूप से धन्यवाद करता हूँ। उनका सरोजनीनगर आगमन हम सभी के लिए गर्व और उत्साह का विषय है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर कठिन मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में उपस्थित सरोजनीनगर की देवतुल्य जनता, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं सभी सहयोगियों का भी मैं और पूरा सरोजनीनगर परिवार हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। आपका यह स्नेह और विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
आप सभी का कोटि-कोटि धन्यवाद। 🙏
जब-जब इस धरती ने पुकारा,
एक सिंह हुंकार उठा।
गोरख की पावन धूनी से
जन-जन का विश्वास जगा।
अंधकार को चीरकर जिन्होंने
न्याय का सूरज चमकाया है,
उस कर्मयोगी ‘योगी’ ने
उत्तर प्रदेश का गौरव लौटाया है।
LDA की वरुण विहार योजना व नैमिष नगर योजना के भूमिपूजन और भूखंड पंजीकरण के शुभारंभ कार्यक्रम में यशस्वी मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी का स्वागत एवं अभिनंदन!