अब इसका जवाब क्या देंगे प्रदेश और देश को ?
हो सकता है कल तक इसे भी मानसिक रूप से बीमार या अनुशासनहीनता में नाप दिया जाए ?
आरोप -
उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग में 11 लाख रुपए की बुलेट आई है..जबकि उसकी कीमत कुल 3
लाख रुपए है..!
सोचिए 1 बुलेट में 8 लाख रुपए का घोटाला किया
गया है DG द्वारा..!
लखनऊ में अग्निकांड स्थल पर पहुंचे फायरमैन जितेंद्र राठौर के आरोप सुनिए..!
देश की ,प्रदेश की जनता तय करे ?
इसका फैक्ट चेक जरूरी है !
अतिरिक्त कस्टमाइज्ड वैल्यू क्या है
इसे सार्वजनिक किया जाए ?
मुझे निलंबित कर दिया गया है इन काले अंग्रेजों के द्वारा, पुलिस सिपाही सुनील शुक्ला ने कहा।
अगर गलत के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते हो तो जो उठा रहे हैं उनका साथ दे।
भ्रष्ट तंत्र एक ईमानदार पुलिस वाले पर भारी पास गया।
इस ईमानदार पुलिस वाले को सस्पेंड किया गया है।
ये हम सबकी ईमानदारी है कि इनके साथ मजबूती से खड़े हों।
लखनऊ: सस्पेंशन के बाद कॉन्सटेबल सुनील शुक्ला का बयान
मुझे सस्पेंड का लेटर तक नहीं दिया गया। 6-7 पुलिसकर्मी मेरी मां के पास पहुंचे थे। ‘अब पीछे नहीं हटूंगा,चुप कराना है तो हत्या करा दें।’ जिन पर आरोपी उन्हीं के सहयोगी जांच कर रहे हैं।
#Lucknow#SunilShukla#Police
हजारों पुलिस कर्मियों की आवाज उठाने वाले, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सुनील शुक्ला व्यवस्था का शिकार हो गए।
अब सुनील शुक्ला का कितने लोग सहयोग करेंगे।
'भ्रष्टाचार' करने वाले मस्त, 'भ्रष्टाचार' उजागर करने वाले पस्त!
लखनऊ पुलिस के इस सिपाही ने बड़ी ईमानदारी से विभाग का 'बिज़नेस मॉडल' जनता को समझाया था कि कैसे ड्यूटी के नाम पर हर सिपाही से ₹2000 लेकर, एक सेक्शन से महीने का ₹8 लाख का 'मुनाफा' कमाया जा रहा है।
लेकिन हर वक्त 'एक्शन मोड' पर रहने वाली हमारी सरकार का 'एक्शन' तो देखिए! कार्रवाई तो की... लेकिन वसूली करने वाले साहबों पर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खेल को उजागर करने वाले इस सिपाही पर ही।
और वजह क्या बताई.. यूपी पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी तोड़ने की!
आवाज दबाने से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होता, बल्कि सरकार की नीयत बेनकाब होती है।
शुक्ला जी सस्पेंड हो गए हैँ,
हालांकि शुक्ला जी खुद नौकरी करने के ज्यादा इच्छुक नहीं थे,
इसीलिए उन्होंने मंगल पांडे की तरह क्रांति का बिगुल फूंका,
उन्हें पता था नतीजा क्या होगा
वो इसके लिए पहले से ही मानसिक तौर पर तैयार थे,
ठीक है, इसी तरह कोई व्यक्ति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाता है,
बाक़ी तो घिस घिसकर बाल बच्चे ही पाल रहे हैँ,
IPS अधिकारी का ब्रेन मैपिंग हो
इस साल वह घूस लिया है कि नहीं
IPS का फॉर्म भरना छोड़ देंगे लोग डेढ़ करोड़ का पैकेज छोड़कर
डेढ़ लाख की सैलरी लेने आ रहे हैं लोग
ऐसा कहने वाले आईपीएस अधिकारी के घर में रेट पर गया है इनकी छानबीन चल रही है इसीलिए कोई करप्शन के खिलाफ नहीं बोलता है
मैं ऊंट चरा रहा हूं निहुर के नहीं चरा सकता..मेरे पुलिस परिवार की पीड़ा है....मैं चिल्ला - चिल्ला के गुहार लगाकर कहूंगा...
पुलिस कर्मियों को भी घूस देना पड़ता है.. हर काम के लिए पैसा देना पड़ता है..!
- सुनील शुक्ला (कांस्टेबल)
नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद का यूपी में सरकार बनने पर बड़े स्तर पर पुलिस सुधार करने की घोषणा 🚨
1)- 8 घंटे की ड्यूटी निर्धारित, इसके अतिरिक्त कार्य के लिए ओवरटाइम पाॅलिसी
2)- सप्ताह में एक दिन की छुट्टी दी जाएगी
3)- वेतन विसंगतियों और बाॅर्डर स्कीम की समस्याओं को दूर किया जाएगा
4)- सरकारी कर्मचारियों के लिए एक विशेष शिक्षा बोर्ड जिससे कि ट्रांसफर जैसे समय में उनके बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो
5)- नये व बेहतर आवास की व्यवस्था होगी
ये घोषणाएं अपने आप में ऐतिहासिक हैं। यूपी में इस स्तर के बदलावों की कल्पना भी किसी ने नहीं की अबतक जो घोषणाएं चन्द्रशेखर आजाद कर चुके हैं।।
पुलिस में 20 साल नौकरी पूरी करके स्वेच्छा से रिटायरमेंट लेकर जा रहे हवलदार को बहुत देर समझाने के बाद SP साहब ने पूछा, "सब कुछ तो मिल रहा है नौकरी में, तो फिर नौकरी छोड़कर क्यों जा रहे हो" ?
इस पर हवलदार ने सुंदर सा मार्मिक और दिल को लगने वाला जवाब दिया-
"सर,
जो आपने अपने सामने कुर्सीयां खाली रहते हुए भी, मुझे दो घंटे सावधान मे खड़ा करके समझाया है, बस इसलिए नौकरी छोड़कर जा रहा हूँ" ।
जब शहर में आसमानी गर्मी की सीधी मार पड़ रही है तो @uppolice और विशेष ट्रैफिक के जवानों,कार्यकारी बल दारोगा सिपाहियों के लिए हमारी मांगे जायज हैं !
इस खबर में पुलिस के जवान न हो इसे सुनिश्चित करना दायित्व है जिम्मेदार अधिकारियों का !
43 डिग्री तापमान में सड़क पर खड़े इन कर्मचारियों के जीवन रक्षण के लिए आवश्यक है सरकार उठाई मांगो और सुझावों को क्रियान्वित करे !
@dgpup@uptrafficpolice@Uppolice
कंधे पर सितारों की चमक, दिल में देशभक्ति का जज्बा, लेकिन हाथ में खाली जेब...
यह है यूपी पुलिस के एक सामान्य कर्मचारी की कहानी। 😔
सोचिए, जो जवान अपनी जान हथेली पर रखकर हमारी नींद की रक्षा करता है,क्या उसे अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी संघर्ष करना चाहिए?
जब सरकार में बैठे लोग अपनी तनख्वाह बढ़ा सकते हैं, तो इन जवानों का संवैधानिक हक क्यों मारा जा रहा है?
आज समय है कि हम सब मिलकर इन वीर जवानों की आवाज़ बनें।
उन्हें 4200 ग्रेड पे मिलना ही चाहिए।
@Uppolice के कर्मचारियों को आर्थिक न्याय कब मिलेगा ?
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