पीके को सीएम बना चुकी गैंग अब नरोत्तम मिश्रा को मजबूत नेता बता रही,
मजबूत नेता लैंडस्लाइड विक्ट्री में भी हारे थे, उसके पहले मात्र 2000 वोट से जीते थे !
मजे की बात देखिए मिश्रा जी जगह टिकट पाया प्रत्याशी भी ब्राह्मण ही है
आयरनी देखिए यही गैंग भाजपा को जातिवादी पार्टी बताती है !
This lie will never end.
Phoolan Devi was raped by Lalaram, Shriram and other members of the gang. Acting on a tip-off from an informer, she went to Behmai village in search of the accused, but they were not there. She then killed 20 people, accusing them of helping the perpetrators.
Of those killed, 17 were innocent Thakur residents of Behmai village. The others included a Mallah, a Dhanuk, and a Muslim man from nearby villages. Nazir Khan, a mason, was working on a house in Behmai village at the time.
प्रधानमंत्री जी विश्व भर के तमाम सम्मान जीत चुके हैं ... बस अब सोनपुर मेले में जाके रिंग फेंककर वो 5 रुपए वाली साबुन की टिकिया भी जीत लेते तो हम भक्तों को को थोड़ी राहत मिल जाती।
रोहिणी जी, वह आपके पिता हैं इसलिए यूनिवर्स के ग्रेटेस्ट डैडी होंगे। परंतु, बिहार के संदर्भ में आपके पिता, आपकी माता और आपके भाई-बहन चोर हैं, चोर थे, चोर रहेंगे। ऐसे चोरों का कोई स्मारक नहीं होना चाहिए।
मेरे बाबा 87 वर्ष जिए।
न जिम, न कैलोरी काउंट, न "लॉन्गेविटी" का कोई सिद्धांत।
दिन में दो बार भोजन, खेतों तक रोज़ 12–15 किमी पैदल चलना, एकादशी का अलोना, रात को दूध में मींजी हुई दो रोटियाँ, और 85+ की उम्र में भी *लोपामुद्रा* पढ़ने की जिज्ञासा।
चालीस साल बाद मैंने उनके जीवन को याद करते हुए एक संस्मरण लिखा है। लिखते-लिखते मुझे लगा कि मैं अपने बाबा से ज़्यादा अपने समय का हिसाब दे रहा हूँ।
**"मेरे बाबा का समय"** — शायद यह दीर्घजीविता पर नहीं, विरासत पर लिखा गया लेख है।
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रजिया समेत समस्त दिल्ली सल्तनत के तथाकथित सुल्तान डकैत थे ।
दिल्ली सल्तनत नाम की कोई चिड़िया कभी भारत में थी ही नहीं । स्वयं जेम्स टॉड इस का उल्लेख अपनी पुस्तक में करते हैं।
भारतीय इतिहासकारों का घटियापन है कि ‘दिल्ली सल्तनत’ नाम के इस झूठ को किसी ने प्रतिकार नहीं किया ।
दो चार हज़ार की सेना की टुकड़ियों के साथ हिंदुओं के गाँवों, घरों को लूटना और हिंदू बच्चियों का बलात्कार इन सुल्तानों का व्यवसाय था ।
जाट, यादव, गुज्जर, वाल्मीकि, व खटीक समाज निरंतर इन सुल्तानों को ठोकते रहते थे ।
अलाउद्दीन खिलजी के अतिरिक्त इनमें से प्रत्येक तथाकथित सुल्तान को मेवाड़ के महाराणाओं ने पराजित करके कुछ को बन्दी भी बनाया था ।
ना इन सुल्तानों ने कुछ बनाया, ना कोई जनहित का काम किया । हाँ, हिंदुओं के सरों की मीनारें बनाना, हिंदुओं को ग़ुलाम बनाकर बग़दाद में बेचना, हिंदू सभ्यता का नाश इनका काम अवश्य था।
आपसे में भी एक दूसरे की हत्या व अपदस्त करना नियम था।
इन डकैतों को सुल्तान कह कर सम्बोधित करना अपने पूर्वजों के हत्यारों की स्मृति पर थूकने जैसा है ।