मेजर जनरल जी डी बख्शी होना आसान नहीं है। कभी मोदी के प्रबल समर्थक रहे बख्शी हमेशा से जानते रहे हैं कि देश सबसे पहले। अब उन्हें समझ में आया है कि देश मतलब बीजेपी नहीं है, मोदी नहीं है। यह लोग देश के सम्मान को चोटिल कर रहे।
जब मेजर जनरल बोलते हैं कि भाड़ में जाए तो कुछ ऐसे बोलते हैं कि अब नहीं तो फिर कभी नहीं। इसे सरकार को पूर्व सैन्य अफसर के अल्टीमेटम की तरह लेना चाहिए।