उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों कि छंटनी कर दिए जाने के कारण कर्मचारियों पर कार्य का अधिक भार पड़ने से 107 दिनों में 82 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों कि बड़ी दुर्घटनाएं, 44 की मौत, 38 गंभीर रूप से घायल।
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दो कांवड़ियों की 11000 लाइन की चपेट में आने से मौत हुई है और इस मौत का जिम्मेदार महमूदाबाद डिवीजन एक्सियन सतीश वर्मा है इनके कार्यकाल में पूर्व कई मौतें हो चुकी लेकिन पता नहीं शासन में इनको किसने गोद ले रखा है कोई कार्यवाही नहीं होती है।
माननीय मुख्यमंत्री जी न्याय करें 🙏
बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों का दर्द समझे अन्यथा यह मौतें रुकने वाली नहीं है उत्तर प्रदेश की सरकार की बहुत ज्यादा फजीहत हो रही है माननीय जी आप संज्ञान लेने की कृपा करें।
पीड़ित - बिजली आउटसोर्स कर्मचारी।
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कार्य घातक,जान जोख़िम में लेकिन अनुबंध लेबर का, मानकों के अनुरूप सुरक्षा उपकरणों का पता नहीं, कर्मियों के अभाव में कार्य का अत्याधिक दबाव में अकुशल कर्मियों से भी लाइनों पर कार्य, परिणाम दुर्घटनाएं और जीवन का अन्त जिम्मेदार कौन?
माननीय मंत्री जी आउटसोर्स कर्मियों की हो रही मौतों पर अंकुश लगाने तथा मौत के सौदागर बने अधिकारियों पर कार्यवाही का निर्णय आपको लेना है किंतु 49 दिनों में 30 मौतों के बाद भी संज्ञान न लेना दुखद और निराशाजनक है @aksharmaBharat@myogiadityanath@UPGovt
उत्तर प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
पावर कॉरपोरेशन के हालत बयां करता ये AI वीडियो।
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उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर कुछ ज्यादा ही स्मार्ट लग रहे हैं अभी देखते जाइए क्या-क्या खुलासा होना बाकी है देश के उपभोक्ताओं के साथ पूरी तरह उपभोक्ता परिषद खड़ी है देश में आर्थिक व ऊर्जा संकट को देखते हुए स्मार्ट मीटर परियोजना रद्द की जाए।
माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि हम लोग भी आउटसोर्स बिजली कर्मचारी हैं और अल्प वेतन में 24 घंटे कार्य करते हैं हम लोगों को आउटसोर्स निगम से क्यों बाहर किया जा रहा है इसमें अधिकारियों की बहुत बड़ी साजिश है आपको व भाजपा को बदनाम करने की कृपया संज्ञान में लेने की कृपा करें।
2 मार्च 2026 को झांसी के BHEL विद्युत उपकेन्द्र पर तैनात श्री पहलवान अकुशल संविदा कर्मचारी कि 11 वोल्ट की चपेट में आने से मृत्यु हो गई।
अकुशल कर्मचारियों पर दबाव बनाकर नियमविरुद्ध कार्य कराया जा रहा है जिससे दुर्घटनाएं हो रही है। ऊं शान्ति।
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उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के प्रबंधन की गलत नीतियों और आउट सोर्स कर्मचारियों की छटनी करने के कारण कार्य का बोझ अधिक पड़ने से दुर्घटनाओं अपार वृद्धि हुई जिसका संज्ञान प्रबंधन द्वारा नहीं लिया जा रहा है ये जानबूझ कर प्रबंधन द्वारा गरीब कर्मचारियों के सुनियोजित हत्या की साजिश है
माननीय मुख्यमंत्री जी आपसे निवेदन कि बिजली विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों को बनने वाले निगम में शामिल किया जाए क्योंकि उच्च अधिकारी नहीं चाहते हैं कि इस विभाग के कर्मचारियों को निगम में शामिल किया जाए क्योंकि इस विभाग में भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है।
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