उत्तर प्रदेश के अधिकतर जनपदों में पिछले 24 घंटो से लगातार अतिवृष्टि हो रही है,लखनऊ में भी लगातार बारिश हो रही है। विद्यालय प्रागण में पानी का जलभराव और परिषदीय नौनिहालों की स्थित को देखते हुए कल का अवकाश करने का कष्ट करें।
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#बेसिक_शिक्षा_का_भ्रष्टाचार
बीएसए बदायूं के भ्रष्टाचार और तानाशाही के विरुद्ध संगठन लगातार आवाज उठा रहा है ।लेकिन विभाग के कुछ अधिकारी लगातार बी एस ए बदायूं के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने पर लगे हैं उसका ख़ामियाज़ा आज गरीब लोगों को भुगतना पड़ा है।भ्रष्टाचार के कारण गरीब परिवारों के 5 सदस्यों की जान चली गई जिसके लिए बीएसए बदायूं सीधी जिम्मेदार हैं. ग़ैर मान्यता प्राप्त कोई भी विद्यालय संचालित न होने का प्रमाण पत्र देने के बाद भी मिली भगत से बदायूं में गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय चल रहा था जिसके कल 4छात्र व एक वाहन चालक काल के गाल में समा गए।अभी भी समय है कि सरकार को ऐसे भ्रष्ट बीएसए के खिलाफ कार्रवाई करके भविष्य में होने वाली जनहानि को रोका जाए।
#शिक्षक_सम्मान_बचाओ
प्रदेश के हज़ारों शिक्षकों ने लखनऊ पहुँचकर स्पष्ट कर दिया कि शिक्षक सरकार से नहीं ,महानिदेशक महोदय की कार्यप्रणाली से त्रस्त हो चुका है।वार्ता में महासंघ के अध्यक्ष जी ने स्पष्ट कहा कि अकारण शिक्षकों के निलंबन व वेतन अवरुद्ध किये जा रहे हैं ।निलंबन से सेवा में बहाली का न्यूनतम रिश्वत एक लाख है ।उन्होंने कहा कि आप चाहें तो सोशल मीडिया या समाचार पत्र के माध्यम से सीधे सर्वे करा सकते हैं कि निलंबन या वेतन बहाली पर रिश्वत की दर क्या है ।शिक्षक बता देंगे कि भ्रष्टाचार का हाल क्या है।मुख्यमंत्री जी के आदेश पर प्रत्येक विभाग में बंपर प्रमोशन हुआ है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग में गत 6 वर्षों से एक भी प्रमोशन नहीं हुआ क्योंकि बीएसए के काम भी लखनऊ से संचालित हैं।मगर महोदय हैं कि शिक्षक हित की एक भी बात नहीं सुनना चाहते ।
सरकार भी निर्णय ले कि 5 लाख बेसिक शिक्षक व 65 हज़ार माध्यमिक शिक्षक व उनके परिवारों को अपमानित करने की स्वतंत्रता इन महोदय को न दी जाये।
अपने हितों व सम्मान के रक्षार्थ प्रदेश भर के शिक्षक अपना अवकाश लेकर गये थे लेकिन इनके निर्देश पर कल निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने शिक्षकों से यह कहते हुए अभद्रता की है कि “बहुत धरने पर जाते हो ,तुमको निलंबित करके नेता बना देंगे ,धरने पर जाना भूल जाओगे”।यह निरीक्षण कर्ता भ्रष्ट अधिकारी शिक्षकों को डरा नहीं पायेंगे ,न ही लोकतंत्र में अपने आबाज उठाने से रोक पायेंगे ।यह शिक्षकों और सरकार को आपस में लड़ाने का षड्यंत्र रच रहे हैं जिससे शिक्षक सरकार से लड़ते रहें और यह सुरक्षित रहें।लेकिन शिक्षक इनके षड्यन्त्र को जान चुका है और इनके भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आख़िरी सांस तक संघर्ष करेगा ।
#09अक्टूबर_लखनऊ_चलो
ऐसा लगता है कि प्रतिदिन शिक्षकों को अपमानित करना ,निलम्बित करना एवं वेतन रोकना ही अधिकारियों का गुड वर्क होता जा रहा है
अब सफ़ाई कर्मचारी विद्यालय की गतिविधियों का सत्यापन करेंगे ।
इससे पूर्व में रसोईया को गेंहूँ पिसाने भेजा तो शिक्षक निलम्बित
फ़र्रुख़ाबाद के बीएसए द्वारा मा उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन न करने से तंग आकर शिक्षक ने जान दे दी लेकिन प्रकरण में निलंबित बीएसए के स्थान पर शिक्षक हुआ
शिक्षक विशुद्ध वेतन भोगी है उसका मकान निर्माण ,बच्चों की पढ़ाई ,बच्चों के विवाह सब बैंक लोन से हो रहे हैं जैसे ही उसका वेतन रोका जाता है या निलम्बित किया जाता है उसका पूरा परिवार तिलमिला जाता है ।
शिक्षकों के ऊपर निलंबन या वेतन रोकने की कार्यवाही बेवजह और उच्च अधिकारी को खुश करने के लिए की जाती है ।बेसिक शिक्षा में भ्रष्टाचार इतना गहरा गया है कि निलम्बन या वेतन बहाली में शिक्षक का वेतन लूट लिया जाता है ।
विद्यालय में शिक्षक केवल शिक्षण के लिये उत्तर दायी होना चाहिये
लेकिन शिक्षक को ग़ैर शैक्षणिक कार्यों के लिए ज़िम्मेदार ठहरा कर उसके विरुद्ध कार्यवाही करके शोषण किया जा रहा है और शोषण करने वालों को मीटिंग्स में ताली बजवा कर सम्मानित कराया जाता है
शिक्षक तनाव में जी रहे हैं क्योंकि किसी भी विभाग का कोई भी अधिकारी विद्यालय का निरीक्षण करके किसी भी बात पर शिक्षक को बेइज्जत कर जाता है या कार्यवाही करा देता है
अधिकारियों की दमनात्मक एवं भ्रष्ट कार्यशैली से शिक्षकों में ज़बरदस्त आक्रोश है लेकिन यही शिक्षक जब अधिकारियों के भ्रष्टाचार के विरोध में उतरते हैं तो अधिकारी बड़ी चालाकी से इन शिक्षकों को सरकार विरोधी साबित कर देते हैं
यह ऐसे अधिकारी हैं जो पिछली सरकार में कुछेक के पैर छूकर मलाई मार रहे थे अब यही काम यहाँ पर जारी है
यह तो मलाई मार कर चले जाते है लेकिन इनके कुकृत्यों से नाराज़ शिक्षक या कर्मचारी नुक़सान सरकार का करते हैं
इनकी तानाशाही व भ्रष्टाचार के विरोध में संघ के पदाधिकारी 9 अक्टूबर को शिक्षा निदेशालय पर धरना देंगे ।
वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा लखनऊ के कार्यालय पर आमरण अनशन करते हुए शिक्षक।वित्त एवं लेखाधिकारी के असंवैधानिक कार्यो के कारण शिक्षकों के एरियर भुगतान नहीं किए जा रहे हैं।
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"निरीक्षण कभी भी शिक्षण का स्थान नही ले सकता है"-प्रेमचंद।1912 में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के स्कूलों के इंस्पेक्शन के लिए SDI का पद इसलिए बना कि वे शिक्षा को लागू करने में जो दुश्वारियां हैं उसकी DMको रिपोर्ट देंगे। इंस्पेक्शन रिपोर्ट केवल वेतन कटौती तक रह गयी यह दुर्भाग्यपूर्ण है।