महोदय जी को सादर अवगत कराना है,UPPCL ऊर्जा जनशक्ति अप (URJA JANSHAKTI APP) का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, स्टाफ चेहरे से मिलान करके एक दूसरे की हाजिरी लगा रहे हैं, ऊर्जा जनशक्ति ऐप चेहरा मिलान करने में फेल हो गया है।
@UPPCLLKO@PuVVNLHQ@MD_PuVVNL
चेयरमैन द्वारा 𝚃𝙶2 के संबंध में दिए कथित आपत्तिजनक बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते है। 𝚃𝙶2 जैसे जिम्मेदार और समर्पित कर्मचारियों को “दलाल” कहना न केवल अशोभनीय है,बल्कि पूरे कर्मचारी वर्ग का अपमान है।अपने इस अमर्यादित और असंवेदनशील बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगे.
माफी मांगनी चाहिए इतने बड़े जिम्मेदार पद पर बैठ कर अशोभनीय टिप्पणी बिना सोचे समझे सार्वजनिक रूप से समीक्षा बैठक में कैसे कर सकते हैं हम आम उपभोक्ताओं को सर्वाधिक सेवा भरोसा सुविधा निविदा स्टाफ और तकनीकी भाई ही देते बाकी कोई समस्या सुनने को तैयार नहीं, #वाह_जो_सही_दलाल_वहीं👏
तकनीशियन संवर्ग को ऊर्जा मंत्री जी और चेयरमैन यूपीपीसीएल द्वारा दलाल शब्द से संबोधित करना घोर निंदनीय है। जबकि तकनीशियन संवर्ग अपने उच्चाधिकारियों के द्वारा दिए गए कार्यों का निष्पादन ईमानदारी से करता है।इसके लिए इनलोगों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।@myogiadityanath
@UPPCLLKO की बैठक में चेयरमैन द्वारा टीजी–2 कर्मचारियों के संबंध में“दलाल”जैसी टिप्पणी आपत्तिजनक एवं निंदनीय है । टीजी 2 कर्मचारियों के सम्मान व मनोबल पर यह सीधा आघात है
संघ तत्काल सार्वजनिक खेद एवं सम्मानजनक स्पष्टीकरण की मांग करता है
@myogioffice@aksharmaBharat@ANI@RVPPKSUP
18 फरवरी 2026 को राजधानी लखनऊ के थाना क्षेत्र विकास नगर के अंतर्गत विद्युत उपकेंद्र विकास नगर के कंट्रोल रूम में जबरदस्ती घुसकर हमलावरों द्वारा बिजली कर्मचारियों के साथ गाली गलौज, मारपीट, तोड़फोड़ करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई थी, उपरोक्त घटना से प्रदेश के बिजली कर्मियों में रोष व्याप्त है, अगर राजधानी में भी बिजली कर्मचारी विद्युत उपकेंद्र के कंट्रोल रूम में भी सुरक्षित नहीं है तो फिर आम नागरिक कैसे सुरक्षित होगा।
बिजली कर्मचारियों के साथ आए दिन लगातार इस प्रकार की मारपीट की घटनाएं घट रही है जिससे बिजली कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है और इस प्रकार की घटनाएं प्रदेश की कानून व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
@Uppolice, @dgpup, @lkopolice से अनुरोध है कि प्रदेश में अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करते हुए उपरोक्त हमलावरों को तत्काल गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई कराये जाने की कृपा करें।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath से अनुरोध है कि बिजली कर्मचारियों पर लगातार हो रही मारपीट की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए बिजली कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए जिससे बिजली कर्मी प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहे।
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वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ के लेसा में हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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प्रदेश की बिजली कंपनियों में 3 करोड़ 61 लाख विद्युत उपभोक्ताओं के सापेक्ष मानक पर उपभोक्ता सेवा में सुधार के लिए सहायक अभियंता अवर अभियंता व टेक्निकल ग्रेड 2(TG-2) की अभिलंब भर्ती शुरू करना चाहिए उपभोक्ता परिषद जल्द इस मुद्दे पर प्रबंधन व सरकार से बात करेगा।
@uprvup पूरी तरह सहमत सर 💯 प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए AE JE और TG-2 की भर्ती अब ज़रूरी हो गई है।
3 करोड़ 61 लाख उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा तभी मिलेगी जब फील्ड में पर्याप्त टेक्निकल स्टाफ होगा।
सरकार से अनुरोध है कि इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए.🙏
रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है।
आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है।
संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
#stop_privatization_of_uppcl
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन: लेसा में निजीकरण हेतु वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर 8000 पद कम किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण के हर प्रारूप और हर कोशिश का किया जायेगा पुरजोर विरोध।
राजधानी लखनऊ में लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में आज बिजली कर्मियों ने दफ्तरों के बाहर आकर जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के लगभग 8000 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे राजधानी की बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने की पूरी संभावना है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि वर्टिकल प्रणाली केवल निजीकरण के लिए लागू की जा रही है और निजी कंपनियों का मार्ग प्रशस्त करने के लिए बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं जिससे कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि टीजी 2 के लगभग 1350 पद, जूनियर इंजीनियर्स के 287 पद और अभियंताओं के 45 पद समाप्त किए जाने से लेसा में अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो गया है और त्यौहार के समय हर स्तर के कर्मचारी में लखनऊ से हटाए जाने का भय व्याप्त हो गया है जिसका कार्यप्रणाली पर भारी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर पश्चिमांचल और मध्यांचल विद्युत वितरण निगमों के अंतर्गत आने वाले सभी बड़े शहरों में वर्टिकल प्रणाली लागू कर इन शहरों की बिजली व्यवस्था अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के अन्तर्गत देने की तैयारी है। संघर्ष समिति ने कहा कि देश के जिन शहरों में निजी कंपनियां अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत काम कर रही हैं उन शहरों में इसी प्रकार की प्रणाली लागू है जिससे कम कर्मचारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली के नाम पर अत्यधिक अल्प वेतन भोगी लगभग 6000 संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है जिससे बिजली व्यवस्था तो चरमरा जाएगी ही साथ ही इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाना अमानवीय कृत्य भी है।
दीपावाली के पर्व के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने आज विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में सामूहिक जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा तथा निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में आज रेजिडेंसी पर विरोध प्रदर्शन किया गया।
आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
राजधानी लखनऊ सहित समस्त जनपदों में सभा के अन्त में वरिष्ठ बिजली मजदूर नेता गिरीश पांडे जी की धर्मपत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और दो मिनट मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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प्रबंधन एक प्रबंधक के रूप में तो असफल रहा और अब एक मुखिया की भूमिका में भी असफल रहा।अपने परिवार के सदस्यों का पांच महीने से वेतन रोक कर "बिन वेतन दीपावली" हेतू बाध्य करना निंदनीय है ।
"धनतेरस की हार्दिक बधाई व शुभ कामनाएं ।"
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राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करें अन्यथा केन्द्र सरकार ग्रांट देना बंद कर देगी : ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश : निजीकरण थोपने की हर कोशिश का होगा राष्ट्रव्यापी विरोध
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यह विदित हुआ है कि 16 सितम्बर को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ऑफ पॉवर की मीटिंग में यह सहमति बनी है कि विद्युत वितरण निगमों के संचालन हेतु राज्य सरकारों को तीन विकल्प दिए जाए और जो राज्य सरकार इन तीनों विकल्पों को न माने उनको केन्द्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट बन्द कर दी जाय।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण की प्रक्रिया व्यापक रूप से चलाई जा रही है जिसका बिजली कर्मी विगत 11 महीनों से जोरदार विरोध कर रहे हैं। अब इन घटनाक्रमों से उद्वेलित सारे देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एकजुट होकर सामने आ गए हैं और वे निजीकरण का व्यापक विरोध करेंगे और राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जायेगा जिसका निर्णय आगामी 03 नवम्बर को मुम्बई में होने वाली नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की मीटिंग में लिया जायेगा।
संघर्ष समिति ने बताया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की इसी मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के मसौदे को अन्तिम रूप दिया गया था जिसे 09 अक्टूबर को विद्युत मंत्रालय ने जारी कर दिया है। संघर्ष समिति निजीकरण हेतु लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का प्रबल विरोध करती है और मांग करती है कि इसे तत्काल वापस लिया जाय।
उन्होंने बताया कि मुम्बई में 04 एवं 05 नवम्बर को हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा "विद्युत वितरण निगमों के सस्टेनेबिलिटी के लिए पी पी पी मॉडल" है जिसका अर्थ निजीकरण ही है।
संघर्ष समिति ने बताया कि सात राज्यों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की बैठक में हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार बिजली के निजीकरण पर राज्यों को तीन विकल्प देने जा रही है, अन्यथा की स्थिति में केंद्र सरकार की ग्रांट बंद कर दी जाएगी।
पहला विकल्प है - राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों की 51% हिस्सेदारी बेंच दे और पीपीपी मॉडल पर विद्युत वितरण कंपनियां चलाई जाए।
दूसरा विकल्प है - विद्युत वितरण कंपनियों की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी जाए और प्रबंधन बिजी कंपनी को सौंप दिया जाए।
तीसरा विकल्प है - जो राज्य निजीकरण नहीं करना चाहते तो वह अपनी विद्युत वितरण कंपनियों को सेबी और स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर कर लिस्टिंग कर दें।
यह पता चला है कि ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में यह सहमति हुई है कि जो राज्य यह तीनों विकल्प न दें उनका केंद्र से मिलने वाली ग्रांट बंद कर दी जाए और आगे कोई आर्थिक मदद न की जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली संविधान की आठवीं अनुसूची में कॉन्करेंट लिस्ट पर है जिसका मतलब होता है कि बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बराबर के अधिकार हैं। ऐसे में चुनिंदा सात प्रांतों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) की राय लेकर निजीकरण का निर्णय राज्य सरकारों के ऊपर कैसे थोपा जा सकता है ?
संघर्ष समिति ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति की कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड है उसे ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में किस हैसियत से और क्यों बुलाया जा रहा है ? उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिया की भूमिका में आ गई है।
उन्होंने बताया कि मुंबई में चार और पांच नवंबर को होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का एकमात्र एजेंडा भी यही है। अब स्पष्ट हो गया है कि इस डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी में 2025 में यही निष्कर्ष निकाला जाएगा जो ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग की राय है। ऐसा लगता है कि सारे देश में निजीकरण की मुहिम बहुत तेज गति से चलाई जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह शर्तें निजीकरण हेतु राज्य सरकारों पर बेजा दबाव डालना है और एक प्रकार से ब्लैक मेल है जिसके विरोध में देशव्यापी आन्दोलन चलाया जाएगा।
उप्र में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 324 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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