Most important you need to clear an all Indian entrance exam to get admission in JNU, very stringent in all categories. You cannot become a JNU-ite just by wearing khadi kurta, jhola and glasses, padhna bhi padta hai.
मैंने तीन दिन लगातार कांशीराम स्मारक स्थल से रमाबाई मैदान तक रिपोर्टिंग की है...सुबह से रात तक। पिछले कई साल से बसपा की बीट को देख रहा हूं..तो एक क्यूरियोसिटी भी थी। पार्टी में नेशनल कोर्डिनेटर से लेकर सेक्टर प्रभारी तक के संपर्क में रहता हूं। कई बामसेफ के लोग हैं, जिनसे अच्छी बातचीत है।
प्रो. रविकांत जैसा एक भी राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार मुझे फील्ड पर नहीं भेंटाया और बता रहे हैं जैसे सबकुछ जानते हैं। दरअसल इनको कुछ नहीं पता। ना रैली के बारे में..न बसपा के बारे में...। रविकांत दावा कर रहे हैं कि ज्यादातर बसें सवर्ण और ओबीसी लाए थे। मैं कह रहा हूं कि ये सिर्फ इतना बता दें कि मायावती का मंच किस तरफ बना था...मैं मान जाऊंगा। एक पत्रकार के तौर पर मैंने जो देखा..जो समझा उससे इतना कह सकता हूं। कि रैली में भीड़ मोदी की दो रैलियों के बराबर थी। अगर ये मोमेंटम बसपा जारी रखती है तो यकीन मानिये बड़ा नुकसान न सिर्फ सपा-कांग्रेस को बल्कि भाजपा को भी होगा। समझना चाहते हैं तो कुछ कुछ वीडियो मेरी टाइम लाइन पर देख आइये। रही बात भीड़ की तो जो मैंने देखा उससे ये कह सकता हूं कि जितनी भीड़ मैदान में थी लगभग उतनी ही मैदान के बाहर थी। बहुत से लोग समय से रैली स्थल पर ही पहुंच नहीं पाए।
बाकी आप रविकांत जैसे फर्जी विश्लेषकों को तो देख सुन ही रहे हैं।