चरित्र के समस्त आयाम
केवल स्त्री के लिए ही परिभाषित हैं...
मैं सिंदूर लगाना नहीं भूलती...
और हर जगह स्टेटस में मैरिड लगा रखा है...
जैसे ये कोई सुरक्षा चक्र हो....
मैं डरती हूँ
जब कोई पुरुष मेरा एक क़रीबी दोस्त बनता है...
मुझे बहुत सोच समझ कर करना पड़ता है
शब्दों का चयन
मक़ाम तक भी हम अपने पहुँच ही जाएँगे
ख़ुदा तो दोस्त है दुश्मन हज़ार राह में है...
थकें जो पाँव तो चल सर के बल न ठहर 'आतिश'
गुल-ए-मुराद है मंज़िल में ख़ार राह में है...
#हैदर_अली_आतिश@BazmEShoara@BasantSatoniya
تجھ کو آواز دوں اور دور تلک تو نہ ملے
ایسے سناٹوں سے اکثر مجھے ڈر لگتا ہے
علینا عترت
तुझ को आवाज़ दूं और दूर तलक तू न मिले
ऐसे सन्नाटों से अक्सर मुझे डर लगता है...
#अलीना_इतरत
Suspected Poem
पासपोर्ट कमिश्नर ने दरख्वास्त कार से
सर उठाकर पूछा
कोई तिल, कोई मसा,
तेरे बदन पर जन्म की निशानी
कोई निशान है जो मिट न सके
चन्द मिनट कुछ सोच
फिर सरदार ने एक दम शर्ट उतारी
ये आग का निशान है सन 84 का
ये मिट नहीं सकता
#गुलज़ार#copy
राम जी 500 वर्षों बाद आ रहे हैं और वो मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहलाते हैं
अपने अंदर भी उन संस्कारों को जगाओ
रहन सहन , भाषा , संयम , बड़ों के प्रति आदर , छोटों को प्यार
यही सब गुण तुम सबमें भी होने चाहिएँ तभी मंदिर का पूजन सफल होगा
मैं तो अपने जीवनकाल में पहली बार मंदिर की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा पूजन देख रही हूँ
यह एक मूर्ति का पूजन नहीं बल्कि एक महान चेतना का पूजन होता है
ब्रह्माण्ड जिससे हम बने हैं उसे एकत्र करके पूजा जाता है 😊