तुम बनो उपसर्ग मेरे
मैं बनूं प्रत्यय तुम्हारी ।
तुम मेरे दक्षिण विराजो,
मैं तुम्हारे वाम में।
भावना का अर्घ्य हो
आशीष का हो आचमन।
शीश देहरी पर झुके हों,
देवता के धाम में।
जीवन में बिखरें सप्तरंग,
आठवां रंग तुम्हारे नेह का।
सप्तवाचनों से परिपूर्ण हो,ढाई आखर स्नेह का।
@_Vaaridri_
"जीवन बड़ा अजीब होता है। ...कई बार उसकी परतों में से हम जिस रंग को खोजते हैं, वह नहीं निकलता। पर कोई ऐस�� रंग निकल आता है जो उससे भी अधिक ख़ूबसूरत होता है।" 🦋
~ अमृता प्रीतम
आप हो सिद्धांतवादी…माना
तटस्थ हो कर्म-धर्म से अपने
फिर भी
मेरी शैतानियाँ झेल लेते हो
और
जता देते हो
अपनत्व का हमारा स्नेही रिश्ता..!!
_आपकी छुटकी।
@soul_reveals ❤️🥰
मै��� यादो का किस्सा खोलूं तो ,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं।
मैं गुज़रे पल को सोचूं तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद है जाकर मुद्दत से।
मैं देर रात तक जागूँ तो ,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं।
- हरिवंश राय बच्चन🌷