सम्भवतः कोई बूढ़ा आदमी कहेगा कि वह दूर के जंगल तक टहला करता था। उसके चेहरे पर घृणा से भरी मुस्कान होती थी।जो विचार अचानक उसके मन में आ जाते थे, उन्हे वह फुसफुसाने लगता था। वह निराश, गम्भीर और अकेला लगता था । जैसे चिंताओं ने उसे पागल कर दिया है। या फिर वह प्रेम में असफल हो गया है
एक सपना है जो धुँधला-सा दिख रहा है..एक हकीक़त है जिसे मानने को तैयार नहीं हूँ...
एक चाँद जो बिछड़ता जा रहा है..एक सूरज जिसका पता नहीं है...
कितना कुछ है जो बिखर-सा गया है..
पर दुनिया चल रही है...
दुनिया चलती रहती है......
लोकडाउन में खाली तो थे ही खामखां की उठा पटक में लगै थे , तो एक दिन कुछ खोलने को और तो कुछ मिला नहीं अम्मा की नकचुंटी(चिमटी) मिल गई जिससे वो खरबुजे की गिरी निकालती थी , जरा जोर आजमाइश पर वो गई टुट और अम्मा आग बबुला खैर आश्वासन दिया कि लोकडाउन खुलने पर नयी लाकर दुंगा .....