@Anshuma45975144 मुहर्त मत देखो अपने विवेक इस्तेमाल करो, और मैं इस आंदोलन को बदनाम नहीं करना चाहता मगर तुमने पहले तो "आरक्षण हटाओ" के हैंडल के अंतर्गत ये आंदोलन चालू किया फिर @ajeetbharti से लेकर तुम सब लोग कहने लगे कि हम लोग आरक्षण हटाने के नहीं उसकी समीक्षा के पीछे पड़े है, ऐसे होता है क्या भला
अरे घर में भी जब मुखिया मरणासन अवस्था में आ जाते है तो परिवार में तब भी सुगबुगाहट मन में होती है हिस्सेदारी को लेकर,
तुम तो लाउडस्पीकर ले कर घूम रहे हो।
आजादी के बाद 10% आरक्षण की सोच रखने वाला आज गलत हो गया।
तुम कहते हो कोई नया नेता नहीं आ सकता क्या, तो बताओ कैसे आयेगा इन विषयों को लेकर तब जब देश की इस तरह demographic हो,
चलो माना तुम्हारे में दम है कहते हो 2 सांसद थे न BJP के तो बताओ 2 सीट ला भी लोगे लेकिन उन 2 लोग भी जब सवर्ण की बात करेंगे क्या महत्व रह जाएगा और जब ऐसा बोलेगे तो 2 से आगे बढ़ भी नहीं पाओगे, ये तुम भी जानते हो और अगर लगता है तुम्हे SC/ST इस आंदोलन से 20% सहमत है तो उन्हें उतारो मैदान में
जितनी चिंता हमारा हिन्दू समाज शिक्षा, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, GDP और विकाश की करता है उसके आधार पर सोचकर करता है, क्या वो वर्ग इस पर वोट करता है।
आरक्षण वो दंश है जिसकी समीक्षा सिर्फ और सिर्फ आरक्षण का लाभ लेने वर्ग या उसका प्रतिनिधि ही कर सकता है, कोई भी पार्टी इस लोकतांत्रिक चुनावी व्यवस्था में इस पर समीक्षा की बात नहीं करेगा।
मैने पहले भी कहा था मांग और सलाह दोनों सही है मगर वक्त नहीं
पांडे जी, हमको झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारे विरोध में चलने वाली ‘विदेशी साजिशों’ से। मेरे नाक से दूध नहीं बहता। माँग सही है, बात खत्म। देश में हर वर्ष पाँच चुनाव होते हैं, तो वक्त तो कभी सही होगा नहीं।
तुम ही लोग तो चूतिए थे न साले कि हर्ष दूबे को स्टूडियो-स्टूडियो घुमा रहे थे?
तुमने सोचा कि राम मंदिर की डकैती के बवासीर को CJP बिठा कर डायवर्ट कर देंगे। वो बवासीर बना तो दूबे को ले आए NEET पर बोलने के लिए कि वो डायवर्ट हो जाए। फिर वो दबा तो तुमने उस विषय पर उससे बुलवाना चालू किया जिसे अचानक से तुम आज ‘सेंसिटिव’ मान रहे हो।
फिर मैं आ गया आउट ऑफ सिलेबस। और मैं, दूबे या दीपके तो हूँ नहीं कि तुम प्रधान को हटा दोगे मैं नाचने लगूँगा क्योंकि मेरी माँग न तो मेरी नेतागीरी के लिए है, न ईगो सेटिस्फैक्शन के लिए।
तुमने ऐसा व्यक्ति देखा ही नहीं है, इसलिए पुरानी से ले कर नई आइटी सेल और मोमो की दुकानों की तरह हर नुक्कड़ पर फोन लिए डीप स्टेट, विदेशी साजिश टाइप करने वाले मीशो के अजय सान्यालों को समझ ही में नहीं आ रहा है कि टैकल कैसे करें।
आज भी मेरी माँ के मरने को ले कर बातें लिखी जा रही हैं। पर भाई, मैंने उसे अपने हाथों से मुखाग्नि दे कर उसकी राख को गंगाजी में बहा दिया है। तुम मुझे ‘इसकी माँ और उसकी माँ’ कह कर अपमानित नहीं कर सकते। हाँ क्रोधित कर सकते हो। और वह अच्छा नहीं होगा, इसकी मैं गारंटी दे सकता हूँ।
खैर, तुम्हें इतना समझ में नहीं आएगा क्योंकि आईटी सेल में निम्न स्तरीय बुद्धि होना एक अपेक्षित मानदंड है। तुम वैसे भी राज्य के आइटी सेल के हो। अतः, तीन वाक्यों में यह समझ लो:
पार्टी के भटकाव की आलोचना देशद्रोह नहीं है। पार्टी के नेता द्वारा समाज को एक्टिवली बाँटने का उपक्रम देशद्रोह और गद्दारी है। गांड में दम है तो उस नेता का नाम कमेंट में लिखो।
बालक जब 12 साल का होता है तब वो माता पिता से डिमांड करने लग जाते है और माता पिता भी उसके हर डिमांड को पूरी करते जाते है, फिर 12 साल बाद 24 की उम्र में पिता जी से वह गाड़ी की डिमांड करता है तब पिताजी घर के लोन के कारण हुई उनकी आर्थिक तंगी की बात छुपा कर उसकी बात यूं ही टालने लग जाता है तब फिर एक दिन वही युवक कहता है कि आपने मेरे लिए किया ही क्या है, पिताजी असहाय महसूस करते है।
मेरे शब्दकोश यहां खत्म होते है आप लोगों के लिए, आगे आपकी सोच और विचार के अनुसार आप लोग बढ़ते रहे।
@ajeetbharti तुम्हारा सब मांग सही पर क्या सही वक्त है, इस वक्त में जब सरकार के खिलाफ विदेशी साजिशें चल रही है देश में सरकार को अस्थिर करने तब तुम्हे ये सब समझ आ रहा है, इसे गद्दारी न कहे तो क्या कहें???
हमें मिलकर इस देश का एक AURA बनाना चाहिए, ताकि हर किसी को लगे कि अगर आप इस फील्ड में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो भारत आ जाइए- पीएम मोदी
#PMModi | #AURA | #Space | #AajTakSocial |#ATReel
कुलद्रोही शायद आज लग सकता हूं तुम्हे, लेकिन एक बात बताओ आजादी के बाद 10% आरक्षण आर्थिक आधार पर देने वाला सही या फिर "जिसकी जितनी संख्या भारी उतनी हिस्सेदारी" कहकर आरक्षण की सीमा बढ़ाने की बात करने वाला सही,
मांगे जायज है बड़े दुख के साथ इसका विरोध नहीं हाथ पीछे खींच रहा हूं क्योंकि ये समय नहीं है मित्र
@hrishi0903@ajeetbharti मानता हूँ तुम्हारी बात, पर मित्र 12 सालों के अंदर कभी भी कर लेते, मैं तो बस ये कह रहा हूं कि ये समय उचित नहीं है बस इतना सी बात है।
𝐄𝐭𝐡𝐚𝐧𝐨𝐥 𝐬𝐭𝐨𝐥𝐞 𝐲𝐨𝐮𝐫 𝐬𝐮𝐠𝐚𝐫? 𝐓𝐡𝐚𝐭’𝐬 𝐭𝐡𝐞 𝐎𝐩𝐩𝐨𝐬𝐢𝐭𝐢𝐨𝐧’𝐬 𝐟𝐚𝐢𝐫𝐲 𝐭𝐚𝐥𝐞.
India achieved its 20% ethanol blending target in mid-2025, five years ahead of schedule. Sugar prices were around ₹39,000 per tonne then, fell to ₹36,500 by March, and then surged to ₹54,000 within just five months. That sharp spike doesn’t fit the narrative that ethanol was steadily draining sugar supplies. In fact, mills diverted 𝐥𝐞𝐬𝐬 𝐜𝐚𝐧𝐞 𝐭𝐡𝐚𝐧 𝐩𝐥𝐚𝐧𝐧𝐞𝐝 towards ethanol.
𝐓𝐡𝐞 𝐫𝐞𝐚𝐥 𝐜𝐮𝐥𝐩𝐫𝐢𝐭? 𝐆𝐥𝐨𝐛𝐚𝐥 𝐰𝐞𝐚𝐭𝐡𝐞𝐫. 🌍
Brazil’s sugar output fell 26%, while Thailand’s dropped by over 15%, turning an expected global surplus into a 𝟑.𝟑 𝐦𝐢𝐥𝐥𝐢𝐨𝐧-𝐭𝐨𝐧𝐧𝐞 𝐝𝐞𝐟𝐢𝐜𝐢𝐭.
Watch the debunking of the sugar crisis myth, backed by real facts and numbers. 📊⛽
Met India’s brightest space StartUps.
As always, came away impressed by their energy and ambition.
You would love their insights and optimism.
Do tell me...what excites you most about India’s space journey?
#NationalSpaceDay
ये आदमी नीचता की पराकाष्ठा में जा रहा है और अब सर दर्द बन गया है क्योंकि सबसे पहले इसे अहमियत देकर "पप्पू" ना कहने का फैसला किया था।
अब देखो तुमने नेता प्रतिपक्ष का सम्मान करना चाहा और अब ये तुम्हारे नेताओं के लिए कैसे कैसे शब्द इस्तेमाल कर रहा है, देश भर में बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।