मैं अपने पूरे जीवन में बस एक बार ये चाहता रहा कि मुझसे कोई वैसे ही प्रेम करे कैसे मैं चाहता हूं या करता हूं सामने वाले से, मैं जानता हूँ प्रेम का कोई प्रकार नहीं होता पर जीवन में बस एक बार मुझे अनुभव करना है मेरा प्रेम...!!!
पुरुष को विवाह उसी स्त्री से करना उचित है जो उसके विचारों और निर्णयों पर बिना प्रश्न किए साथ खड़ा हो सदा, हर परिस्थिति में बिना किसी अपेक्षा के बस आपके साथ को प्राथमिकता दे...!!!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते थे कि 2017 में देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री मनोज सिन्हा बनें कई और भी दावेदार थे जैसे केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा और योगी आदित्यनाथ.!
सूत्र कहते हैं उस समय बैंगलोर में संघ की बैठक में कृष्ण गोपाल ने नरेंद्र मोदी की पसंद माने जाने वाले मनोज सिन्हा का पत्ता काट दिया..?
गृह मंत्री अमित शाह का फोन मनोज सिन्हा के पास जाता है जब वो बनारस एयरपोर्ट पर उतर रहे थे. एयरपोर्ट पर भारी सुरक्षाकर्मियों और पुलिस जाब्ते के काफिले ने मनोज सिन्हा को घेर लिया मानों सीएम के नाम की औपचारिकता शेष रह गईं हों..!
फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि मनोज सिन्हा की जगह योगी आदित्यनाथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाते हैं?
स्त्री कभी संतुष्ट नहीं होती ..... स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं
ये स्त्री के मूल में ही नहीं है अगर आप बहुत ज्यादा केयर करते है तो उससे भी ऊब जाएगी
अगर आप बहुत उग्र हैं तो वो उससे भी बिदक जाएगी
अगर आप बहुत ज्यादा विनम्र हैं तो वो उससे भी चिढ जाएगी
अगर आप उससे बहुत ज्यादा बात करते हैं तो वो आपको टेक इट फौर ग्रांटड लेने लगेगी
अगर आप उससे बहुत कम बात करते हैं तो वो मान लेगी कि आपका चक्कर कहीं और चल रहा है
यानी आप कुछ भी कर लीजिए वो संतुष्ट नहीं हो सकती
ये उसका स्वभाव है वो एक ऐसा डेडली काॅम्बीनेशन खोजती है जो बना ही न हो बन ही न सकता हो
ठीक वैसे ही जैसे कपड़ा खरीदने जाती है तो कहती कि इसी कलर में कोई दूसरा डिजाइन दिखाओ,
इसी डिजाइन में कोई दूसरा कलर दिखाओ
कपड़े का गट्ठर लगा देती है...
बहुत परिश्रम के बाद एक पसंद आ भी गया, तो भी संतुष्ट नहीं हो सकती...
आखिरी तक सोचती है कि इसमे ये डिजाइन ऐसे होता तो परफैक्ट होता...
इन सबके बावजूद एक बहुत बड़ी खूबी भी है स्त्री के अंदर ...
एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे आखिरी दम तक सजो के रखती है वो चाहे रिश्ते हो या चूड़ी
रंग उतर जाएगा चमक खत्म हो जाएगी पर खुद से जुदा नहीं करेगी
बस यही खूबी स्त्री को विशिष्ट बनाती है
स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं...
ये स्त्री के मूल में ही नहीं है...
मेरी प्रेयसी जोया का पत्र
पसंदीदा स्त्री के लिऐ पुरुषों ने... दाँव लगा दिया सब कुछ ! पसंदीदा स्त्री के लिऐ पुरुषों ने... लङाई लङी वर्चस्व की ! पसंदीदा स्त्री की आँख के आँसू... पुरुषों के कलेजे को विचलित कर देते हैं। पसंदीदा स्त्री के चेहरे की मायूसी... पुरुषों की नींद हराम कर देती है।
कौन कहता है कि पुरुष दिखाते नहीं... एक झुमकी के कारण महादेव ने पृथ्वी को श्मशान बनाने का प्रण ले लिया था !!
पसंदीदा स्त्री पसंदीदा होती है...!!❤️💚
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गाय व भैंस के दूध में अंतर जो बहुत कम लोग जानते हैं !
भैंस अपने बच्चे से पीठ फेर कर बैठती है चाहे उसके बच्चे को कुत्ते खा जायें वह नहीं बचायेगी,
जबकि गाय के बच्चे के पास अनजान आदमी तो क्या शेर भी आ जाये तो जान दे देगी, परन्तु जीते जी बच्चे पर आँच नही आने देगी।
इसीलिए उसके दूध में स्नेह का गुण भरपूर होता है।
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भैंस को गन्दगी पसन्द है, कीचड़ में लथपथ रहेगी,,
पर गाय अपने गोबर पर भी नहीं बैठेगी उसे स्वच्छता प्रिय है।
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भैंस को घर से 2 किमी दूर तालाब में छोड़कर आ जाओ वह घर नहीं आ सकती उसकी याददास्त जीरो है।
गाय को घर से 5 किमी दूर छोड़ दो।
वह घर का रास्ता जानती है,आ जायेगी।
गाय के दूध में स्मृति तेज है।
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दस भैंसों को बाँधकर 20 फुट दूर से उनके बच्चों को छोड़ दो, एक भी बच्चा अपनी माँ को नहीं पहचान सकता,
जबकि गौशालाओं में दिन भर गाय व बछड़े अलग-अलग शैड में रखते हैं, सायंकाल जब सबका माता से मिलन होता है तो सभी बच्चे (हजारों की स॔ख्या में) अपनी अपनी माँ को पहचान कर दूध पीते हैं, ये है गाय दूध की याददास्त।
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जब भैंस का दूध निकालते हैं तो भैंस सारा दूध दे देती है,
परन्तु गाय थोड़ा-सा दूध ऊपर चढ़ा लेती है, और जब उसके बच्चे को छोड़ेंगे तो उस चढ़ाये दूध को उतार देती है।
ये गुण माँ के हैं जो भैंस मे नहीं हैं।
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गली में बच्चे खेल रहे हों और भैंस भागती आ जाये तो बच्चों पर पैर अवश्य रखेगी…
लेकिन गाय आ जाये तो कभी भी बच्चों पर पैर नही रखेगी।
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भैंस धूप और गर्मी सहन नहीं कर सकती…
जबकि गाय मई जून में भी धूप में बैठ सकती है।
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भैंस का दूध तामसिक होता है….
जबकि गाय का सात्विक।
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भैंस का दूध आलस्य भरा होता है, उसका बच्चा दिन भर ऐसे पड़ा रहेगा जैसेे भाँग खाकर पड़ा हो।
जब दूध निकालने का समय होगा तो मालिक उसे उठायेगा…
परन्तु गाय का बछड़ा इतना उछलेगा कि आप रस्सा खोल नहीं पायेंगे।
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फिर भी लोग भैंस खरीदने में लाखों रुपए खर्च करते हैं….
जबकि गौमाता का दूध अमृत समान होता है !
जय सिया राम !
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#औ_का
कभी भी मानसिक तौर पर अशांत हों, तो राग केदार हरि प्रसाद चौरसिया की बांसुरी में सुनिए । यू ट्यूब पर मिल जाएगा । किसी भी मानसिक उद्वेलन को बांसुरी सबसे जल्दी हील करती है ।
घर का माहौल खुशनुमा करना हो, तो कोई एक ऐसा म्यूजिक सिस्टम लेकर आएं जिसमें बहुत हल्की आवाज़ में आपके ड्रांइगरूम में बांसुरी बजती रहे ।
मेरे पास एक पिल्लो स्पीकर है । तकिए पर जब दबाव पड़ता है तभी वो बजता है । और जिसने तकिए पर सिर रखा है सिर्फ वही सुन पाता है । ऐसा कुछ लाएं, बांसुरी सुनते हुए सोएं, तनाव दूर होगा ।
*सुंदरकांड में एक प्रसंग अवश्य पढ़ें !*
छोटा सा निवेदन
*“मैं न होता, तो क्या होता?”*
“अशोक वाटिका" में
*जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा*
तब हनुमान जी को लगा कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सिर काट लेना चाहिये!
किन्तु, अगले ही क्षण, उन्होंने देखा
*"मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया !*
यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बढ़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि
*यदि मैं न होता, तो सीता जी को कौन बचाता?*
बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है,
*मैं न होता तो क्या होता* ?
परन्तु ये क्या हुआ?
सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया! तब हनुमान जी समझ गये,
*कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं!*
आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि *"लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा!"*
*तो*
*हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है*
और
*त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है,एक वानर ने लंका जलाई है! अब उन्हें क्या करना चाहिए? जो प्रभु इच्छा!*
*जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े,तो हनुमान ने अपने को बचाने के लिए तनिक भी चेष्टा नहीं की और जब "विभीषण" ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है।*
*तो*
*हनुमान जी समझ गये कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया है!*
आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि
*बंदर को मारा नहीं जायेगा, पर पूंछ में कपड़ा लपेट कर, घी डालकर, आग लगाई जाये*
तो हनुमान जी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी,
*वरना लंका को जलाने के लिए मैं कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता, और कहां आग ढूंढता?*
पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया! जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं, तो
*मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !*
इसलिये
*सदैव याद रखें,*
कि
*संसार में जो हो रहा है, वह सब ईश्वरीय विधान है!*
हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं!
इसीलिये
*कभी भी ये भ्रम न पालें*
कि...
*मैं न होता, तो क्या होता ?*
*ना मैं श्रेष्ठ हूँ, ना ही मैं ख़ास हूँ।*
*🙏🙏 राम राम 🙏🙏*
*🪷🪷जय श्रीराम🪷🪷*
क्या प्याज-लहसुन खाना पाप है? 🤔
पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार—प्याज और लहसुन कोई मांस नहीं है कि इसे खाने से पाप लगे, यह भी आलू-गाजर की तरह ज़मीन से ही उपजता है।
लेकिन यह शरीर और मन में तमोगुण (क्रोध, आलस्य, प्रमाद) बढ़ाता है। इसलिए जो साधक सतोगुण और भजन-मार्ग में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए इसका निषेध है।
*मनोविज्ञान में “लिपोफ्रेनिया” क्या है?*
लिपोफ्रेनिया शब्द का इस्तेमाल ऐसी गहरी और अस्पष्ट उदासी के लिए किया जाता है, जिसका कोई साफ कारण दिखाई नहीं देता।
कभी-कभी बिना किसी घटना के मन भारी हो जाता है।
न कोई शिकायत, न कोई खास वजह—फिर भी भीतर एक अनजाना खालीपन रहता है।
शायद लंबे समय से जमा थकान,
दबी हुई यादें, अधूरी इच्छाएँ
या अनकही भावनाएँ अपना रास्ता खोज रही होती हैं।
हर उदासी का कोई स्पष्ट कारण होना जरूरी नहीं।
इसलिए जब मन उदास हो,
तो खुद को कमजोर मत समझिए।
कभी-कभी उदासी भी मन का संदेश होती है—
“मुझे थोड़ा समझो… थोड़ा ठहरो।”
क्योंकि हम मशीन नहीं हैं,
हम महसूस करने वाले इंसान हैं।
डॉ धीर सिंह धाभाई
#psychology
40 साल की महिला पर पड़ोस के नाबालिग बच्चे के यौन शोषण का आरोप!
बताया जा रहा है कि महिला घर में अकेली थी। इसी दौरान उसने पड़ोस में रहने वाले एक छोटे बच्चे को अपने घर बुलाया। आरोप है कि महिला ने बच्चे के साथ जबरन गलत हरकत की, जबकि बच्चा खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था।
मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। नाबालिग बच्चे के साथ किसी भी तरह का यौन शोषण घोर अपराध है।