बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने का अधिकार भी मिलना चाहिए। 7th Pay लागू करें।
@BiharEducation @EduMinisterBihar
#BiharTeachersNeed7thPay
हम विशेष सुविधा नहीं, न्यायपूर्ण वेतनमान चाहते हैं। बिहार के शिक्षकों की एक ही मांग—7th Pay के अनुरूप सम्मानजनक वेतनमान।
@BiharEducation @EduMinisterBihar
#BiharTeachersNeed7thPay
बिहार के शिक्षकों की मेहनत का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, उचित वेतनमान और आर्थिक सुरक्षा से भी होना चाहिए।
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#BiharTeachersNeed7thPay
बिहार के शिक्षकों की मेहनत का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, उचित वेतनमान और आर्थिक सुरक्षा से भी होना चाहिए।
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बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने का अधिकार भी मिलना चाहिए। 7th Pay लागू करें।
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#BiharTeachersNeed7thPay
हम विशेष सुविधा नहीं, न्यायपूर्ण वेतनमान चाहते हैं। बिहार के शिक्षकों की एक ही मांग—7th Pay के अनुरूप सम्मानजनक वेतनमान।
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#BiharTeachersNeed7thPay
नौकरी के बाद बदलने वाली लाइफ पर कुछ पक्तियां -
ट्रेनिंग के वो 18 दिन
कट गया घर के बिन
अब लौट आए घर पर
निगाहे पड़ी सब पर
मां के चेहरे पर एक चमक
पिता का सीना गर्व से दमक
बहन का फरमाइस
हो रही है अपनी अजमाइस
मां के हाथो का खाना
खुल कर गाना
कितना बदल जाता है सब
एक नौकरी मिल जाने से
मिल जाता है छुटकारा पुराने ताने से।
याद करेंगी वो टेबल और कुर्शिया
जहा हमने ली है कभी सिसकियां
किताबो के वो पन्ने
कितनी यादें सने
दीवाल पर लगा भारत का नक्शा
बोले मुझे क्यों अब बक्शा
घर में अब होने लगी गिनती
पहले करनी पड़ती थी विनती
लोग पसंद करने लगे
अपने सभी बनने लगे
नया जीवन मिलता है यहां कुछ कर दिखाने से
कितना कुछ बदल जाता है एक नौकरी मिल जाने से।
टेबल लैंप की वो उजली चमक
कलम की स्याही का वो गमक
पन्ने पलटने की वो आवाज
आज महसूस हुआ इसका नाज
पढ़ने में रहा घर से दूर
नौकरी से भी मजबूर
मेहमान बन गए है अब घर के
जिम्मेदारी बढ़ गई है अब सर के
फिर से तो जाना ही है
नई दुनिया बसाना ही है
सबका दिल बहलाना ही है
कुछ बोल कर
कुछ गा कर सुनाना ही है
आना जाना तो लगा रहेगा किसी न किसी बहाने से
कितना कुछ बदल जाता है एक नौकरी मिल जाने से।
रचनाकार - अंकित कुमार (BPSC TRE 2 शिक्षक)
रमेश बिधूड़ी ने कोई अनोखी बात नही की है, बस जो चीज़े ढकी छुपी थी वो अब खुलकर होने लगी है
पता है कुदरत ने लड़कियों को एक ख़ूबी बख़्शी है, किसी लड़की को जब कोई टच करता है तो उसे पता चल जाता है टच करने वाले की नीयत क्या है।
ये ख़ूबी उसमें बचपन से आस पास महसूस करने की वजह से डेवलप हो जाती है।
एक तीसरा इंसान इस चीज़ को नही समझ सकता, कि महज़ हाथ छू जाने पर कैसे कोई लड़की इतना ऐतराज़ जता जाती है और कभी कुछ नही कहती।
यही हाल हिंदुस्तान में मुस्लिम लड़को का है, वो अगर पहनावे से मुस्लिम ज़ाहिर है और बस पर चढ़ रहे हैं तो एकबार में सबकी निगाह पढ़ लेते हैं।
स्कूल में टीचर सिर्फ नाम लेकर पुकारते हैं और टोन से समझ जाते हैं, ऑफिस में जब अचानक बात करते हुए लोग चुप हो जाते हैं तो समझ जाते हैं।
एक महीन हँसी भी, एक हल्की मुस्कान, एक नाम लेने का अंदाज़ भी।
आपको लगता है क्लास में बैठा बच्चा आपकी बात समझ नही पाया, ये आपकी भूल है, हम लोग जब बारह तेरह साल के होते है उसी वक़्त मुल्ला और कटुवा लफ्ज़ सुनकर बड़े होते है,
हम इग्नोर करना सीख जाते है, और आप समझते है कि ये सब कॉमन है, क्या आप मैथ्स पढ़ाने वाले टीचर को टोक सकते है, आप मेरे नाम मे मियां क्यों लगा रहे हैं, "हसीब मियाँ खाला का घर नही है" "पढ़ो लिखो दुबई बुबई जाओ" "कितने भाई हो"
सोचो ये सब लाइन कितनी नॉर्मल है पर ये नॉर्मल नही है, बिल्कुल भी नही जैसे किसी स्याह नस्ल वाले को महज़ स्याह कह देना।
हमसे बेहतर वो लोग है जिन्हें आप अफ्रीका अमेरिका मे "काला" कह दें तो ज़मानत नही होगी, औऱ आप पार्लियामेंट में कितनी आसानी से कटुवा और आतंकवादी बोल देते है।
After the medical examination, Zubair is being taken to an undisclosed location. Neither Zubair’s lawyers or I are being told where. We are in the police van with him. No police person is wearing any name tag.
Delhi police did not arrest BJP’s spokesperson who hurt the sentiments of Indian Muslims and Muslims of over 15 other countries but took absolute no time to arrest @zoo_bear. Law should be equal for all.
#IStandWithZubair
https://t.co/2rNhPMemNQ
भारत में प्यार,मोहब्बत,विकास,तरक़्क़ी जैसे शब्द ग़ायब हो चुके हैं
चारों ओर अगर कुछ दिख रहा है तो हिंसा, नफ़रत,ज़हर,अराजकता,अधर्म,सब कुछ तहस नहस कर दिया गया है।
70 साल में जो बना था सब बर्बाद कर दिया गया है। अब तो ख़ुश हो नफरतियों! चील कौओं की तरह देश को नोच दिया तुम लोगों ने।