बचपन की कुर्बानियां देनी पड़ती है तभी मुफ्ती मौलाना आलिम की डिग्री मिलती है।
अम्बिया ए इकराम का वारिस कहलाना इतना भी आसान नहीं है।
इन्हीं लोगों की बदौलत हमारे पास मूल इस्लामिक शिक्षाएँ मौजूद है।
वरना कोई तथाकथित बुद्धिजीवी अपने हिसाब से किताबें छापकर ज्ञान दे रहा होता।
'इस बार तेरा इस्तीफ़ा'
शाह को दीपके का चैलेंज
'इस बार लाठी चली तो तेरा इस्तीफ़ा' गृहमंत्री Amit Shah को CJP संस्थापक Abhijeet Dipke का चैलेंज, क्या बोले?
आज की सबसे ज्यादा वायरल फोटो. नेहा बोरा के इस एक्सप्रेशन ने सोशल मीडिया पर भूचाल मचा दिया है.
सोशल मीडिया पर आज हर अकाउंट नेहा बोरा के बारे में कुछ न कुछ जरूर लिखा.
नेहा बोरा की आलोचना या प्रशंसा की जा सकती है लेकिन कोई नजरअंदाज नही कर सकता.
ज्ञानेश कुमार मोदी का चपरासी बन जाए या फिर मोदी के दफ्तर में पोंछा लगाएं. लेकिन अपने पद से इस्तीफ़ा दे दें.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में खुलकर बोले अभिजीत दीपके
🚨 BREAKING:🚨
Italian Prime Minister Giorgia Meloni: “I am a woman and also a mother. I cannot stand with someone who kills innocent children.”
The brave woman continued to walk around wearing a Palestinian flag around her neck in front of Netanyahu.
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर ने किसी भी तरह की परवाह किए बिना खुलेआम इस्लाम और अज़ान के प्रति अपने प्रेम का इज़हार करके सबको हैरान कर दिया है।
भारतीय मीडिया के अनुसार, अपने नाती के जन्म पर नाना पाटेकर ने पारंपरिक हिंदू नामकरण की रस्मों के बजाय महाराष्ट्र के एक मदरसे के शिक्षक को बुलाकर बच्चे के कान में अज़ान दिलवाई।
इतना ही नहीं, उन्होंने मदरसे के 120 से अधिक बच्चों के लिए नए कपड़ों का तोहफ़ा भी भेजा, उनके लिए बेहतरीन खाने का इंतज़ाम किया और खुद उन बच्चों के साथ बैठकर खाना भी खाया।
नाना पाटेकर का कहना था कि जब उन्होंने अज़ान का अनुवाद समझा, तो उनके दिल को एक अजीब-सा सुकून मिला। इसी वजह से उन्होंने अपने नाती को भी जीवन की शुरुआत में इस पवित्र कलाम का तोहफ़ा दिया।
इस काम को लेकर हिंदू कट्टरपंथी हलकों की ओर से आलोचना की गई, तो नाना पाटेकर ने बिना किसी डर के बेबाक अंदाज़ में जवाब देते हुए कहा, “मैं अपने दम पर कमाता और जीता हूँ, मुझे किसी की परवाह नहीं।”
सच्ची बात तो यह है कि जब कोई इंसान पूर्वाग्रह की पट्टी उतारकर सत्य और सुकून की तलाश में निकलता है, तो दुनिया की कोई भी आलोचना उसकी सोच को प्रभावित नहीं कर सकती।
इटैलियन जज ने फाँसी की सज़ा सुनाने से पहले उमर मुख़्तार से पूछा।
क्या तुमने इतालवी हुकूमत के ख़िलाफ़ जंग लड़ी?
उमर मुख़्तार: हाँ
क्या तुमने लोगों को इतालवी हुकूमत के ख़िलाफ़ जंग के लिए उकसाया?
उमर मुख़्तार: हाँ
तुमने इटली के ख़िलाफ़ कितने साल जंग लड़ी?
उमर मुख़्तार: क़रीबन 20 साल
क्या तुम्हें अपने अफ़आल (कामों) पर कोई शर्मिंदगी या अफ़सोस है?
उमर मुख़्तार: नहीं
क्या तुम जानते हो कि तुम्हें फाँसी दी जाएगी?
उमर मुख़्तार: हाँ
काज़ी ने हैरतज़दा होकर कहा: तुम्हारे जैसे शख़्स के लिए ऐसा अंजाम बेहद अफ़सोसनाक है।
यह सुनकर उमर मुख़्तार ने जवाब दिया।
इसके बिल्कुल उलट, यह मेरी ज़िंदगी के खात्मे का सबसे ख़ूबसूरत तरीक़ा है।
काज़ी ने शर्त रखी कि अगर वह मुजाहिदीन के नाम एक बयान जारी करके जिहाद रोकने का हुक्म दें।
तो उन्हें बरी करके जिला वतन कर दिया जाएगा।
इस पर उमर मुख़्तार ने वह तारीखी अल्फ़ाज़ कहे।
"जो उँगलियाँ हर नमाज़ में इस बात की शहादत देती हैं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं।
और मुहम्मद (स.अ.व.) उसके रसूल हैं।
वे उँगलियाँ कभी कोई ग़लत बात नहीं लिख सकतीं!
हम सरेंडर नहीं करते, हम या तो फ़तह हासिल करते हैं या शहीद हो जाते हैं।
हम मर कर भी जीत जाते हैं और तुम हार जाते हो।
लेकिन अफ़सोसनाक बात यह है कि तुम्हें यह हक़ीक़त सिर्फ़ अपनी मौत के बाद समझ आएगी।
और उस वक़्त इसका तुम्हें कोई फ़ायदा नहीं होगा!"
आप किसी भी धर्म से हों।
एक बार उमर मुख़्तार के बारे में ज़रूर पढ़ना चाहिए।
मंदिर के सामने जुलूस निकल रहा है कोई हुड़दंग नहीं कोई मुजरा नहीं किसी भी तरह की नारेबाजी नहीं!
बस एक दादी है जो माहौल देखकर खुशी से झूम रही है ये मोहब्बत का हिंदुस्तान है!
इसी तरह की मोहब्बत पूरे हिंदुस्तान में कायम हो जाए तो नफरती गैंग की दुकानें बंद हो जाएंगी!