शुभ विश्वासम् 🙏 आदरणीय कुमार विश्वास @DrKumarVishwas के प्रशंसकों का परिवार विश्वाशम् @Vishwaasam की मासिक साहित्य पत्रिका मनहर @ManharMagazine में प्रकाशित UCC पर मेरा आलेख।।
#राजस्थान_सरकार के #शिक्षा_विभाग (शिक्षा निदेशालय बिकानेर) #शिविरा पंचांग (मासिक पत्रिका शिविरा) के अगस्त माह के अंक में प्रकाशित मेरा आलेख।
पूरी पत्रिका (जिसमें अगस्त माह की विभागीय गतिविधियां सहित शिक्षा से संबंधित जानकारी का विवरण है)पढ़ने के लिए मैसेज करें।।
#राजस्थान_सरकार के #शिक्षा_विभाग (शिक्षा निदेशालय बिकानेर) #शिविरा पंचांग (मासिक पत्रिका शिविरा) के अगस्त माह के अंक में प्रकाशित मेरा आलेख।
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@umashankarsingh@DrKumarVishwas काकरोच के इलाज की बात हो रही हैं, जो सत्य है प्रिय है @DrKumarVishwas एक विशेषता बताना भूल गये काकरोच अंधेर में तो रहते हैं पर हीट को स्वयं ढूंढकर, आकर्षित कर अपने अंत का इन्तजाम भी स्वयं,ही करता है,बाकी बिना नुकसान पहुंचाते अंधेरे में पड़ा रहे तो किसे क्या फर्क पड़ता है?
@ssrajputINC@DrKumarVishwas@ShatruganSinha काकरोच के इलाज की बात हो रही हैं, जो सत्य है प्रिय है @DrKumarVishwas एक विशेषता बताना भूल गये काकरोच अंधेर में तो रहते हैं पर हीट को स्वयं ढूंढकर, आकर्षित कर अपने अंत का इन्तजाम भी स्वयं,ही करता है,बाकी बिना नुकसान पहुंचाते अंधेरे में पड़ा रहे तो किसे क्या फर्क पड़ता है?
मोहब्बत नाम दे कर, जो उड़ाते साख अपनी हैं,अभी उनकी निगाहों में बहुत ही बचपना है।
बुजुर्गों की कमाई आबरू नीलाम कर डाली,
गँवाया पीढ़ियों का जो हसीन ख़ज़ाना है।
मनहर जो मुझे आपके मन तक पंहुचने का माध्यम देती है। उसी पत्रिका के वैशाख मास के अंक में मेरे मन के राम को प्रकाशित करते हुए लगातार स्थान देने के लिए डॉ कुमार विश्वास भैया के परिवार यानी मेरे परिवार की पत्रिका कि सम्पादकीय समिति का हार्दिक धन्यवाद।
शून्य से जो उठेगा, वही भविष्य बनाएगा।
कह दो खुद से—"हाँ मैं, ये सिखा सकता हूँ,"
तपकर अभाव की आग में, मैं दिखा सकता हूँ।
आयाम बदल रहे हैं, पर तू अडिग खड़ा है,
तेरा ये स्वावलंबन, दुनिया में सबसे बड़ा है।
आशुतोष शर्मा "गौतम"
कविता: भीतर का भूचाल
अंकों की इस दुनिया में, जो तुमको कम आँकते हैं,
वो शायद तुम्हारी रूह का,भूगोल कम जानते हैं।
नब्बे का पैमाना हो, या सौ की कोई लकीर,
तुम खुद वो जलजला हो, जो बदल दे तकदीर।
न एआई (AI)की ज़रूरत है, न महँगे संस्थानों की,
ये लड़ाई है बस खुद से,और ऊँची उड़ानों की।
गर पढ़कर समझ लेते हो, स्याही के उन अक्षरों को,
तो जगा दो अपने भीतर के, उन सोए हुए गुरुओं को।
तुम कहते हो 'अभाव' है, मैं कहता हूँ 'प्रभाव' है,
ये खालीपन ही तो, सफलता का पड़ाव है।
जिसके पास कुछ नहीं, वही तो सब कुछ पाएगा,