DAY 8
Still Alive, though not kicking….
Some 7,000 people gathered at Jantar Mantar today from morning to evening. Leaders of various social and political movements spoke in support. A clear indication of how effective this movement is can be judged from the number of trolls in the comments below. Over the years I’ve seen that this number is directly proportional to the impact. I’ll be so sad & dejected the day they go missing. Thank you, my success-o-meter, for your hard work.
#SonamWangchuk #CJP #JantarMantar #Education
Please stop this, @SuvenduWB, before the situation gets out of control. We have all seen what happened in Manipur, where the BJP was also in power. Learn from the experience of N. Biren Singh and take timely action to prevent things from worsening.
@harcoresanatani@TitanX987 This is very very sad
Quite similar to the lynching by gaurakshaks
Police and courts need to decide the punishment not mob /gaurakshaks
The silence surrounding the brutal five-day gang-rape of an innocent 13-year-old girl by 30 men in Ganganagar is absolutely deafening.
There are no protests, no mainstream news broadcasts and no trending topics on X for an act so monstrous.
It raises a disturbing question: is the public and media look the other way purely because this happened under a BJP administration?
Everything is allowed under BJP watch?
@kakoligdastidar Bangla ye likhun
Ki bolte chaichen bojha jacche na
Akta educated assistant rakhun
Sorry apnar right wing dol a to abar rapist aar unpadh lok bhora
@kakoligdastidar Feluda o fail hoye jabe
Central govt CBI has already failed according to you
Kakoli madam seems to have become a goenda
Gaddar r por goenda
मुझे कार की बहुत ज़रूरत नहीं पड़ती है। महीने में दो तीन दिन ही घर से निकलता हूँ। आज कई दिनों बाद कार चलाने गया तो पता चला कि मेरी कार का माइलेज 14km/lसे घट कर 9.6km/lit हो गया है। मेरी कार 2024 की है। 5.4 किलोमीटर प्रति लीटर कम हो गया है। परिवार के लोग इस्तेमाल करते हैं। तेल का ख़र्चा काफ़ी बढ़ गया है।
मुझे लगता है कि E20 भी नोटबंदी है। इसके ज़रिये कार और बाइक चालकों पर निष्ठा प्रयोग हो रहा है कि वे किस हद तक मोदी सरकार को सपोर्ट कर सकते हैं। ज़्यादा पैसे ख़र्च कर घटिया ईंधन ख़रीदने और कार डैमेज होने पर चुप रह सकते हैं। मोदी सरकार का प्रयोग सौ फीसद सफल हो गया है। जिस स्केल पर माइलेज गिरा है, मनमोहन सिंह की सरकार होती तो सारे गोदी संपादक पेट्रोल पंप से लाइव रिपोर्ट कर रहे होते।
नोट चोरी, वोट चोरी, चंदा चोरी, पेपर चोरी के बाद तेल चोरी को भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह काम केवल मोदी सरकार कर सकती है। उसके समर्थकों का जवाब नहीं। जो लोग 500 रुपया लीटर पेट्रोल ख़रीदने का सपना देख रहे थे, E20 से पूरा करने का मौका मिल गया है। पेट्रोल और कार की मरम्मत का ख़र्चा जोड़ कर इतना हो जाता होगा।
सरकार चाहे तो एक और प्रयोग कर सकती है। पेट्रोल पंप पर मोदी समर्थक 38 प्रतिशत वोटर के लिए E20 का विकल्प दे और मोदी विरोधी 62 प्रतिशत को E10 का विकल्प दे। मुझे लगता है कि डिफ़ेंडर वाली मोहतरमा भी निष्ठा नहीं बदलेंगी और E20 ही भराएँगी। अगर ये हो जाए तो मोदी समर्थकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। 😎
Merely because a citizen is opposing certain decisions of the Union Government and raising slogans against it cannot be a ground to extern a citizen from any area, held the Bombay High Court.
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यह पिछले 12 वर्षों के इतिहास में किसी भी न्यायालय द्वारा दिया गया अकेला न्याय है जिसमें संविधान, देश और आम आदमी के मौलिक अधिकारों की विजय हुई है। यह बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार हैं। इस विद्वान न्यायाधीश ने अपने एक फैसले में जो कहा है वो नजीर है, नजीर रहेगीं। इनका फैसला बीजेपी और मोदी एवं शाह की आँखों के किरचों की तरह चुभेगी।
दरअसल सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी के खिलाफ एक साल के लिए जिला बदर आदेश पारित किया था। सईद केंद्र सरकार के विभिन्न फैसलों जैसे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे
जस्टिस जामदार इस आदेश पर आगबबूला हो गए। उन्होंने कहा "यह क्या है? सभी नागरिकों को भारतीय सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते ।यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो रहे हैं। अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे। यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।
याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद', 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए.।नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
जस्टिस जामदार ने आगे मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पुलिस नागरिकों को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं कर सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है।"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है, वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।"
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "हॉर्स ट्रेडिंग" पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा "कल परसों एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में क्या चर्चा हो रही थी कि प्रेसिडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे शिफ्ट हो गया।यह क्या है? वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। आपके पास कुछ FIRs हैं।केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।" और सईद अहमद का जिला बदर रद्द कर दिया गया।
सैल्यूट जस्टिस माधव, सैल्यूट बॉम्बे हाईकोर्ट