@Radhemahwa@Radhemahwa जी, यह समस्या सिर्फ पश्चिमी राजस्थान के जिलों में ही है यह कहना गलत होगा।
कई जिलों में ......... होगी पर स्टूडेंट किसी लफड़े में न पड़ कर, टाइम नहीं होने और कई कारणों से अपने घर चले जाते हैं।
गृह जिले में सेंटर देने के नुकसान भी एक दिन पता जरूर चलेंगे। @alokrajRSSB
@Radhemahwa@Radhemahwa जी,
पूर्व में होम डिस्ट्रिक्ट में सेंटर दिए जाते थे इससे कई जिलों में ये समस्या आने के कारण होम डिस्ट्रिक्ट ना देकर दूसरे जिलों में सेंटर देना शुरू किया था ।
परंतु बोर्ड ने अब फिर से होम डिस्ट्रिक्ट में सेंटर देना शुरू कर दिया जो की बहुत गलत है।
@alokrajRSSB
आज बाड़मेर जिला मुख्यालय पर प्रदेश में सरकारी भर्तियों में आरक्षित वर्गों के साथ हो रहे अन्याय के ख़िलाफ़ बेरोजगार युवाओं के साथ हमारे मजबूत पैरोकार आदरणीय हरीश चौधरी से मुलाक़ात की।
इस समस्या की मूल जड़ रोस्टर रजिस्टर का सही संधारण ना होना है तथा ये बेहद चिंताजनक है कि सालों से रोस्टर को सही मेंटेन नहीं किया जा रहा है।
तंत्र से जुड़े जिम्मेदार इस अन्याय को कर रहे है तथा सरकारें इस पर मौन है। इस मौन के ख़िलाफ़ सड़क, सदन तथा न्यायपालिका से हक़ की लड़ाई लड़ेंगे।
@Barmer_Harish
राज्य सरकार द्वारा बाड़मेर और बालोतरा जिलों में गांवों का किया गया प्रशासनिक बिखराव जनहित नहीं, खुला जनविरोधी निर्णय है। यह सुधार नहीं, अव्यवस्था थोपने की साज़िश है।
आज हालात ये हैं कि ग्रामीणों को तहसील के लिए एक दिशा, उपखंड के लिए दूसरी और पुलिस-न्याय के लिए तीसरी दिशा में भटकना पड़ रहा है। यह प्रशासन नहीं, जनता को परेशान करने की व्यवस्था है।
बिना जमीनी सर्वे, बिना जनप्रतिनिधियों से संवाद और बिना स्थानीय ज़रूरतों को समझे लिए गए ऐसे फैसले जनता की सुविधा नहीं बढ़ाते, बल्कि आमजन पर सीधा बोझ डालते हैं।
सरकार को समझना होगा—जनता को भटकाने वाले फैसले स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
@BhajanlalBjp@RajCMO
#NirmalChoudhary
राज्य सरकार द्वारा जारी हालिया अधिसूचना में धोरिमन्ना उपखंड को बाड़मेर जिले से हटाकर बालोतरा जिले में शामिल करने का निर्णय, तथा गुड़ामालानी उपखंड के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों के गांवों के साथ किया गया प्रशासनिक बदलाव, दोनों ही निर्णय जमीनी हकीकत, भौगोलिक स्थिति और आमजन की मूलभूत सुविधाओं के पूरी तरह विपरीत हैं। ऐसे फैसले कागज़ों में भले ही प्रशासनिक सुधार प्रतीत हों, लेकिन व्यवहार में ये आम नागरिक के जीवन को और अधिक कठिन बनाने वाले हैं।
इस निर्णय के बाद माँगता क्षेत्र के लोगों को तहसील स्तर के कार्यों के लिए नोखड़ा जाना पड़ेगा, जबकि उपखंड स्तर के कार्यों के लिए बाड़मेर जाना अनिवार्य हो जाएगा, जो कई मामलों में अत्यधिक दूरी पर स्थित है। एक ही क्षेत्र के लोगों को राजस्व, प्रशासन, विकास और न्याय से जुड़े अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग दिशाओं में भेजना न तो व्यावहारिक है और न ही जनहित में। इसके अतिरिक्त, नोखड़ा तहसील का उपखंड कार्यालय, जो पहले गुड़ामालानी में स्थित था, उसे बाड़मेर स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे गांवों के ग्रामीणों को हर छोटे-बड़े प्रशासनिक कार्य के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।
धोरिमन्ना से मात्र पाँच किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत आदर्श लुखू सहित अनेक ग्राम पंचायतों को अब उपखंड संबंधी समस्त कार्यों—जैसे राजस्व प्रकरण, जाति-निवास प्रमाण पत्र, भूमि विवाद, विकास योजनाओं की स्वीकृति, पंचायत समन्वय और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं—के लिए बाड़मेर जाना पड़ेगा, जबकि उनका स्वाभाविक, सामाजिक और भौगोलिक जुड़ाव धोरिमन्ना एवं गुड़ामालानी क्षेत्र से रहा है। इसी प्रकार गुड़ामालानी उपखंड के पश्चिमी और दक्षिणी गांवों को भी ऐसे प्रशासनिक ढांचे से जोड़ दिया गया है, जहाँ पहुँचना समय, धन और श्रम—तीनों की अनावश्यक बर्बादी है।
कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से भी यह निर्णय गंभीर चिंता पैदा करता है। नोखड़ा तहसील का क्षेत्राधिकार आरजीटी थाने से हटाकर बाड़मेर थाना क्षेत्र में कर दिया गया है, जबकि बाड़मेर थाना काफी दूर स्थित है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति, अपराध, महिला सुरक्षा, भूमि विवाद या सामाजिक तनाव के समय त्वरित पुलिस सहायता मिलना कठिन हो जाएगा। यही नहीं, न्यायालयों, उपभोक्ता फोरम, राजस्व न्यायालय, एसडीएम एवं एडीएम कार्यालयों तक पहुँच भी आम ग्रामीण के लिए बेहद जटिल हो जाएगी।
धोरिमन्ना और गुड़ामालानी उपखंड का सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक और ऐतिहासिक जुड़ाव हमेशा से बाड़मेर जिले के साथ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, परिवहन, पुलिस, न्यायालय और प्रशासन—हर स्तर पर बाड़मेर ही इन क्षेत्रों का स्वाभाविक केंद्र रहा है। बिना स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायतों और आम नागरिकों से संवाद किए तथा बिना समुचित जमीनी अध्ययन के लिए गए ऐसे फैसले प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि जनसुविधाओं के साथ सीधा अन्याय हैं।
मैं राज्य सरकार से मांग करता हूँ कि वह इस अधिसूचना पर तत्काल पुनर्विचार करे और धोरिमन्ना उपखंड को बाड़मेर जिले में यथावत रखते हुए, गुड़ामालानी उपखंड के पश्चिमी एवं दक्षिणी गांवों के साथ किए गए इस अन्यायपूर्ण प्रशासनिक बदलाव को भी अविलंब सुधारे, ताकि प्रशासन जनता के लिए सुलभ, सुरक्षित और न्यायसंगत बन सके।
@RajGovOfficial
तुम इधर भेजो मुझे , तुम उधर भेजो मुझे,
नक़्शों से खेल कर चाहे जिधर भेजो मुझे।
सीमाएँ बदलने से ना डरूँगा ना झुकूँगा
मैं अपने लोगो के साथ खड़ा हूँ चाहे किधर भेजो मुझे।
#बढ़ता_बायतु