हर साल भारतीय मुसलमानों के हज से हजारों करोड़ रुपये का कारोबार होता है। लेकिन फिर भी बुनियादी सुविधाओं के लिए हमेशा आवाज़ उठती रही है। और अब तो हलाल सर्टिफिकेट के लिए भी मुसलमानों को सोचना पड़ रहा है।
ये हैं मोहम्मद ज़ैद, जो BBA के स्टूडेंट हैं। पढ़ाई के साथ साथ वो पानी की परब और कई जगहों पर जाकर, जहाँ गंदगी होती है, खुद सफाई करते हैं और लोगों के लिए साफ पानी के साथ साफ सुथरी जगह भी उपलब्ध कराते हैं। नाचने गाने वाले ट्रेंड तो चलते हैं, कभी ऐसे ख़िदमत करते हुए भी ट्रेंड चलने चाहिए।
ये मोहम्मद यूनुस हैं....देवास के रहने वाले हैं
इनके अकाउंट में नीलेश नानवानी ने गलती से 4 लाख 43 हज़ार 392 रुपये भेज दिए।
यूनुस ने पैसा लौटाते समय कहा, "मेरे मज़हब में किसी का एक पैसा भी लेना हराम है। ये मेरे नबी की तालीम है"
मुसलमानों के मामले में विपक्षी नेताओं को बहुत कम ऐसे बोलते सुना है। दिग्विजय सिंह कह रहे हैं कि ‘यह सरकार कहती है कि हम हेट स्पीच के खिलाफ हैं लेकिन इन्हीं के मुख्यमंत्री असम में हेट स्पीच देते हैं। क्या सरकार अपने मुख्यमंत्री पर एक्शन लेगा?’
इस संघी महिला को सबने देखा लेकिन आसपास मौजूद हिंदू भाइयों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया जो इस महिला की सारी नफ़रती एजेंडे को नाकाम कर दिए है��। उसे साफ़ कह रहे हैं कि यहाँ से हटो और कहीं और जाकर शिकायत करो। ऐसे नफ़रत फैलाने वालों के ख़िलाफ़ हम सभी को इसी तरह खड़ा होना चाहिए।
आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार आतंकियों के नाम दिलजोत सिंह सैनी, हरमन उर्फ हैरी, अजय उर्फ मेहरा, अर्शदीप सिंह उर्फ अरश कंडोला हैं। लेकिन इस @ABPNews की हरामखोरी देखिए! इस मक्कार ने एआई से ऐसी तस्वीर बनाई है जो ‘दूसरों’ की है। आप इस हरामखोरी के लिए ABP पर लानत तो भेज ही सकते हैं।
ये अपराधी खुद को हिंदू कहते हैं?
प्राणियों में सद्भावना और विश्व के कल्याण की बात करने वाले लोग अलग-अलग त्योहारों को साथ मनाने की जगह नफ़रत कैसे फैला सकते हैं?
हम पाकिस्तान और बांग्लादेश नहीं है और इसलिए हम ख़ूबसूरत हैं।
ये सुंदरता नष्ट मत करिए।
🔥🧠 दो घंटे की लाइव डिबेट ने पूरे देश की सोंच बदल दी मुफ्ती शर्माइल नदवी की मजबूती ने सबको चौंकाया ⚖️✨
मैंने पूरी दो घंटे की डिबेट लाइव देखी।
ईमानदारी से कहूँ तो शुरुआत में मुझे अंदेशा था कि
शायद Mufti Shumail Nadwi साहब
किसी उकसावे, दबाव या माहौल की वजह से
नरम रुख़ अपना सकते हैं।
लेकिन जो कुछ सामने आया,
उसने मेरी यह धारणा पूरी तरह ग़लत साबित कर दी।
💬 आत्मविश्वास, इल्म और बेबाकी का दुर्लभ संगम
डिबेट में
मुफ़्ती साहब न सिर्फ़ मजबूती से खड़े नज़र आए,
बल्कि उन्होंने
👉 पूरे आत्मविश्वास
👉 इल्मी गहराई
👉 और स्पष्ट तर्क
के साथ अपनी बात रखी।
वे न तो किसी दबाव में आए,
न ही किसी सस्ती या भावनात्मक बहस में उलझे 🧠⚖️
📚 हक़ को हक़ और बात को बात कहने का साहस
डिबेट का सबसे असरदार पहलू यह रहा कि —
मुफ़्ती साहब ने
👉 बात को घुमा-फिराकर नहीं रखा
👉 मुद्दों से भटके नहीं
👉 और हर सवाल का जवाब
तर्क, संदर्भ और स्पष्टता के साथ दिया।
उनकी बातों में यह साफ़ झलक रहा था कि
जब इल्म, ईमान और इस्तिक़ामत
एक साथ खड़े हों,
तो सबसे ऊँची आवाज़ भी
कमज़ोर पड़ जाती है ✨
🌍 डिबेट से उभरती एक बड़ी सीख
यह डिबेट सिर्फ़
किसी एक व्यक्ति या विचार तक सीमित नहीं थी।
यह उस सोच की झलक थी
जहाँ —
📌 इल्म डर से ऊपर होता है
📌 सच्चाई दबाव से नहीं झुकती
📌 और संवाद, शोर से ज़्यादा ताक़तवर होता है
मुफ़्ती शुमाइल नदवी साहब
मेरी उम्मीद से ���हीं ज़्यादा
वाज़ेह, संतुलित और असरदार साबित हुए।
🧠 यह पोस्ट क्यों ज़रूरी है?
क्योंकि आज के दौर में —
👉 शोर ज़्यादा है, तर्क कम
👉 राय तेज़ है, अध्ययन कम
👉 और संवाद की जगह टकराव बढ़ रहा है
ऐसे में
यह डिबेट याद दिलाती है कि
शालीनता के साथ रखा गया तर्क
सबसे ज़्यादा असर करता है ���
📣 | आपकी राय मायने रखती है
अगर आपको लगता है कि —
🟢 डिबेट में तर्क और ज्ञान ज़रूरी हैं
🟢 असहमति में भी संयम होना चाहिए
🟢 और समाज को संवाद की संस्कृति चाहिए
तो
❤️ LIKE करें
💬 COMMENT में अपनी राय लिखें
🔁 SHARE करें ताकि यह चर्चा और आगे पहुँचे
शायद यह पोस्ट
किसी को सोचने पर मजबूर कर दे 🧠✨
नाम है शाहरुख पठान दिल्ली दंगो मे ���ुस्लिम लोगो और इनकी इज़्ज़त ओ आबरू को बचाने वाला एक मुजाहिद... ❤️
बदले मे इसको क्या मिला लोगो ने इसको याद करना ही छोड़ दिया
#FreeShahrukhPathan
��ारत के सबसे क़ाबिल वकीलों में शुमार समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल साहब के एक एक अल्फाज़ चीख़ चीख़ कर मुस्लिमों पर हो रहे जुल्म को बयान कर रहे हैं 💔👇
हमें किसी के “वंदे मातरम्” पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और “वंदे मातरम्” का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर “दुर्गा माता” से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही “माँ, मैं तेरी पूजा करता हूँ” यही वंदे मातरम् का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्य��्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।
वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं ��ै। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियाँ इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हैं।
हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं!
#ArshadMadani
भारत के सुप्रीम कोर्ट का बाबरी मस्जिद पर फैसला:
1. बाबरी मस्जिद को गिराना गैर-कानूनी था।
2. हिंदू मंदिर तोड़े जाने का कोई सबूत नहीं मिला।
3. जन्मस्थान का कोई धार्मिक सबूत नहीं मिला।
4. कोर्ट ने माना कि मुसलमानों का सदियों से उस जगह पर कब्ज़ा था।
5. पक्के सबूत न होने के बावजूद आस्था को मान लिया गया।
सच कभी मिटता नहीं। यादें कभी कमज़ोर नहीं होतीं।
6 दिसंबर.. #BlackDay
बाबरी मस्जिद को याद रखें।
अन्याय को याद रखें।
हम भूलेंगे नहीं।
हम आगे नहीं बढ़ेंगे।
हम इस याद को आगे बढ़ाएंगे।
@asadowaisi@warispathan@imtiaz_jaleel@SarwarAlamm
#NeverForgetBabriMasjid #BabriMasjid