मैं वो सब कर सकता हूँ,जो तुम्हें पाने के लिए करना पड़े मुझे समाज या घर-परिवार से लड़ने की जरूरत नहीं,लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो खुद से जरूर लड़ लूँगा तुम्हारे लिए अपनी उन आदतों में भी बदलाव कर सकता हूँ,जिन्हें मैंने कभी किसी के लिए बदलने की कोशिश तक नहीं की बस तुम्हें पाने के लिए हर वो प्रयास कर सकता हूँ,जो शायद मैंने आज तक अपने लिए भी नहीं किया...!
पत्र, 14 मई 2026
प्रिय मोह,
हर दिन तुम्हारी उपस्थिति मुझे ऊर्जावान बनाती है। मेरे जीवन में तुम्हारा होना मेरी बीमारी को सुकून देता है; जब तुम मुझसे बातें करती हो, तब मैं स्थिर रहता हूँ। तुम्हारे इंतज़ार में मैं ईश्वर को भी विस्मृत कर देता हूँ।
मेरे जीवन में तुम्हारी उपस्थिति मेरे मस्तिष्क में होने वाली किसी सूक्ष्म रासायनिक प्रतिक्रिया की तरह है, जिसे केवल मैं महसूस कर सकता हूँ; इसे शब्दों में प्रदर्शित करना मेरे लिए संभव नहीं है।
मै एक न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्ति की भांति हूँ; कोई मुझे कितनी भी आत्मीयता से सींच दे या मेरी कितनी भी सराहना कर ले, मैं कुछ भी अनुभव नहीं कर पाता। सच तो यह है कि मेरे भीतर की संवेदनशीलता समाप्त हो चुकी है। अब मुझे तुम्हारे दिखाए मार्ग भी प्रिय नहीं लगते। यह कोई शिकायत नहीं, बल्कि एक स्वीकारोक्ति है। मैं उस बिंदु पर हूँ जहाँ न दुख पहुँचता है, न सुख। मैं बस एक दर्शक की तरह खुद को खाली होते देख रहा हूँ और इस सन्नाटे में अब तुम्हारी आवाज़ भी धुंधली होती जा रही है।
कभी-कभी मुझे लगता है कि मैंने महसूस करने की अपनी पूरी क्षमता समय से पहले ही खर्च कर दी है। अब जो बचा है, वह केवल एक अस्तित्व है बिना किसी अर्थ के, बिना किसी उद्देश्य के। मुझे संबल देने की तुम्हारी हर कोशिश मुझे और अधिक अपराधी महसूस कराती है क्योंकि मैं तुम्हें वह वापस नहीं दे सकता जो तुम चाहते हो।
मेरी चेतना अब एक ऐसे मरुस्थल में बदल चुकी है जहाँ संवेदनाओं की वर्षा भी हरियाली नहीं ला सकती। मैं स्वयं को खो चुका हूँ, और अब मुझे ढूँढने की तुम्हारी यह लगन मुझे थका रही है।
तुम पुनः उसी संसार और उसी पीड़ा की ओर लौट जाओ, जहाँ से तुम आई हो। तुम्हारी पवित्रता में मेरी आस्था सदैव अटूट रहेगी। मैं तुम्हें ईश्वर के सर्वाधिक समीप मानता हूँ क्योंकि तुम्हारे जैसा अस्तित्व किसी ईश्वरीय हस्तक्षेप के बिना संभव नहीं है। तुम अपने आप में अद्वितीय हो और तुम्हें अपने जैसे ही असाधारण लोगों की तलाश होनी चाहिए।
यदि मैं कभी अपनी नास्तिकता से उबर पाया, तो ईश्वर से केवल यही प्रार्थना करूँगा कि वे तुम्हें मुझसे बहुत दूर कर दें, ताकि हम अपनी-अपनी दुनिया में केवल स्मृतियों के सहारे जीवित रहें। तुम्हारा होना अमृत है और न होना विष; किंतु बिना इस विष का पान किए मैं यह सिद्ध नहीं कर पाऊँगा कि मेरे जीवन में तुम्हारा क्या महत्व है।
बेख्याली...
लोग कहतेहैं कि दुनियामें कोई किसी जैसा नहीं होता,लेकिन तुमसे मिलकर यह यक़ीन बदल गया.तुम कोई दूसरा इंसान नहीं,बल्कि मेरीही रूह का ख़ूबसूरत अक्स हो.हमारी सोच,पसंद,एहसास और ख़ामोशियों का यह अनोखा मेल किसी इत्तेफ़ाक़ का नहीं,बल्कि कुदरतके सबसे ख़ूबसूरत करिश्मोंमें से एक लगता है…🤍:)
जब लोगों के बीच होता हूँ तो ऐसा लगता है जीवन हँसता हुआ और खुशी से कट रहा है...परन्तु जब अकेले थका बन्द कमरे में होता हूँ तो न जाने दुनिया के कितने गम याद आ जाते हैं....!!!
थोड़े गम को कूटकर बारीक,
हँसी की चीनी मिला दीजिये,
उबलने दीजिये ख़्वाबों को ;
कुछ देर तक ..
यह ज़िंदगी की चाय है, जनाब ;
इसे तसल्ली के कप में छानकर,
घूंट-घूँट कर मज़ा लीजिये
☕☕
अजीब सी मनोस्थिति हो गई है...कुछ लिखना चाह रहा हूं परन्तु लिख नहीं पा रहा... बेखौफ होकर आगे बढ़ना चाहता हूं पर बढ़ नहीं पा रहा। सच कहुँ तो ...मुझे जीवन के उतार-चढ़ाव कुछ समझ नहीं आ रहे.. समय गुजरता जा रहा है और मैं इस प्रवाह में किसी सूक्ष्म कण की भांति अस्थिर एवं दिशाहीन हूँ..!!
पता है कुछ प्रतिक्षाएं जन्मों तक चलती हैं, जैसे मेरी तुम्हारे लिए है.. इस जन्म ना सही पर कहीं किसी और जन्म में मैं मिलूंगा तुम्हें तुम्हारे कुल में जन्म लेकर, तुम्हारे धर्म का होकर, तुम्हारा सदा के लिए हो जाने को...!!!