वो ज़ब उस दिन-- शाम को तुमने कहा था की अब रास्तें अलग हँ हमारें .. वो पल वो द्र्श्य आज भी ज़ेहन में थमा है वैसे ... जैसे ख़ून का थक्का जम जाता ह् और जड़वत हों जाता है सबकुछ ......
कांग्रेस मुल्लों का फेवर लेती है। नीले कबूतरों को कंट्रोल में रखती है।
बीजेपी नीलटों को छूट देती है, मुल्लों को टाइट करती है।
सवर्णों की गान बीजेपी और कांग्रेस दोनों मिलकर मारते हैं।
हम उस सुख के इंतजार में ख़र्च हुए जा रहे है जिसके स्वप्न या तो हमने स्वयं देखे है या जिन्हें किसी और के द्वारा हमे दिखा दिए गए है हमारा आज महज उस कल के इंतजार में खत्म हो रहा है जिसकी कोई गारंटी नहीं है कि वो कल कभी आएगा भी या नही...!
भारत में ये फैमिली वाला चोचला हर जगह है। फ्लैट देखने जाओ तो फैमिली चाहिए, अच्छी धर्मशालाओं और आश्रमों में रूम बुक करो तो उन्हें भी फैमिली ही चाहिए। अकेले कहीं जाना हो या रहना हो तो बड़ी समस्या होती है। जहाँ सिंगल रूम मिलते हैं वहाँ पार्किंग की समस्या। हम कोई अपराधी हैं क्या 🤧😥